जब डोनाल्ड ट्रंप युद्ध जल्द ख़त्म करने की बात कह रहे हैं और कुछ रिपोर्टों के अनुसार ट्रंप युद्ध से बाहर निकलने के प्रयास में हैं, तो ईरान ने युद्ध को खत्म करने के लिए तीन मुख्य शर्तें रख दी हैं। ये शर्तें हैं- ईरान के वैध अधिकारों को मान्यता देना, युद्ध के नुक़सान की भरपाई करना और भविष्य में फिर से हमला न करने की ठोस अंतरराष्ट्रीय गारंटी देना।
ईरान की तरफ़ से ये शर्तें तब आई हैं जब यह युद्ध अब अपना 13वां दिन पूरा कर रहा है और दोनों तरफ़ से हवाई हमले जारी हैं। इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके ये शर्तें बताईं। राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने लिखा, 'रूस और पाकिस्तान के नेताओं से बात करके मैंने इलाके में शांति के लिए ईरान की प्रतिबद्धता दोहराई है। इसराइल और अमेरिका द्वारा शुरू किए गए इस युद्ध को ख़त्म करने का एक ही रास्ता है वो है ईरान के वैध अधिकारों को मान्यता देना, युद्ध के नुक़सान की भरपाई करना, और भविष्य में फिर से हमला न करने की ठोस अंतरराष्ट्रीय गारंटी देना।'
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ईरान के वैध अधिकारों को मान्यता का मतलब है कि वह न्यूक्लियर एनरिचमेंट के अधिकार का दावा भी करेगा, क्योंकि ईरान एनपीटी का सदस्य है और पहले भी ये बात कह चुका है कि उसके पास परमाणु कार्यक्रम का शांतिपूर्ण अधिकार है। यह पहली बार है जब ईरान के किसी बड़े नेता ने युद्ध ख़त्म करने के लिए भरपाई की मांग की है। युद्ध से पहले न्यूक्लियर बातचीत में ईरान हमेशा कहता रहा कि एनरिचमेंट उसका वैध अधिकार है।
युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर अचानक हवाई हमले किए। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत कई बड़े अधिकारी मारे गए। 

ईरान ने शुरू से ही कहा कि वह अमेरिका से बात नहीं करेगा और सीजफायर नहीं मानेगा। लेकिन इसने अब शर्तें रखकर रुख नरम करने के संकेत दिए हैं। तो आख़िर वह इसके लिए तैयार कैसे हुआ?

ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद-बागेर घालिबाफ ने दो दिन पहले ही कहा, 'हम मानते हैं कि हमलावर को सजा मिलनी चाहिए और ऐसा सबक़ सिखाया जाए कि वह दोबारा ईरान पर हमला करने की हिम्मत न करे।' उन्होंने इसराइल के इतिहास को 'घिनौना' बताया और कहा कि इसराइल हमेशा 'युद्ध, बातचीत, सीजफायर, फिर युद्ध' का चक्र चलाता रहा है। ईरान इस चक्र को तोड़ेगा।

पुतिन की पेज़ेश्कियन से बात

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी मंगलवार को पेजेश्कियन से बात की और तुरंत तनाव कम करने की अपील की। क्रेमलिन ने कहा कि पुतिन ने राजनीतिक तरीक़े से समस्या सुलझाने पर जोर दिया। पेजेश्कियन ने रूस को मानवीय मदद के लिए धन्यवाद दिया।
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युद्ध ख़त्म करने पर ट्रंप का बयान

दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक इंटरव्यू में कहा, 'मैं चाहूं तो इस युद्ध को कभी भी खत्म कर सकता हूं। अब वहां ज्यादा कुछ बाकी नहीं बचा है जिस पर हमला किया जाए।' लेकिन अमेरिका और इसराइल ने हमले जारी रखे। इस बीच ख़बरें ऐसी आ रही हैं कि ट्रंप अब ईरान के साथ चल रहे युद्ध से बाहर निकलने या इसे जल्द खत्म करने का रास्ता ढूंढ रहे हैं, लेकिन यह आसान नहीं लग रहा।
ट्रंप ने एक अन्य बयान में कहा, 'कई मायनों में हमने ये युद्ध पहले ही जीत लिया है। और मिलिट्री ऑब्जेक्टिव्स लगभग पूरा हो चुके हैं।' उनका कहना है कि 90% मिसाइलें, 80% ड्रोन नष्ट कर दिए गए हैं। ट्रंप का कहना है कि यह ऑपरेशन पहले से तय समय 4-5 हफ्ते से आगे चल रहा है और अब इसे क़रीब-क़रीब पूरा माना जा सकता है। 

ट्रंप ने कुछ ऑयल सैंक्शंस भी अस्थायी रूप से हटा दिए ताकि तेल की कीमतें नियंत्रित रहें और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुल जाए। कुछ रिपोर्टों में इसे बड़ी जंग से बचने का अस्थायी कदम बताया गया है।

हालाँकि ट्रंप ने इसके विपरीत बातें भी कही हैं। उन्होंने पहले बिना शर्त समर्पण की मांग रखी और चेतावनी दी कि अगर ईरान होर्मुज को बंद रखेगा तो और हमले होंगे। उन्होंने पहले यह भी कहा था कि हम और आगे बढ़ सकते हैं।

हवाई हमले जारी

इस बीच, इसराइली डिफेंस फोर्सेस ने बताया कि उन्होंने ईरान में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, जिसमें आईआरजीसी यानी इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के हवाई बल के मुख्यालय, कमांड सेंटर, इमाम होसैन यूनिवर्सिटी का एक कम्पाउंड, बैलिस्टिक मिसाइल स्टोरेज और प्रोडक्शन साइट्स और एयर डिफेंस मिसाइलों को निशाना बनाया गया।
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ईरान के आईआरजीसी ने कहा कि उसने इलाक़े में दुश्मन के ठिकानों पर निर्णायक हमले किए। ये हमले पांच घंटे तक लगातार चले। इनमें लेबनान के हिजबुल्लाह के लड़ाकों के साथ मिलकर ऑपरेशन किया गया।
यह युद्ध शुरू होने के बाद से बहुत तेजी से बढ़ा है। दोनों तरफ से मिसाइल और ड्रोन से हमले हो रहे हैं, और इलाके में तनाव बहुत ज्यादा है। अब ईरान ने शांति की बात की है, लेकिन सख्त शर्तों के साथ। दुनिया की नजर इस पर है कि क्या ये शर्तें मानी जाती हैं या युद्ध और लंबा चलेगा।