ईरान ने डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी दी है कि यदि ज़मीन पर हमला किया गया तो वह रेड सी के एक और जलडमरूमध्य पर कब्जा कर सकता है। जानें बाब अल-मंदेब या रेड सी स्ट्रेट कितना अहम और यदि ऐसा हुआ तो कितना बड़ा संकट होगा।
होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से दुनिया भर में पहले ही तेल संकट भयावह स्तर तक पहुँच गया है और अब ईरान ने रेड सी के स्ट्रेट को बंद करने की चेतावनी दे दी है। दुनिया भर के कुल तेल का क़रीब 20 फीसदी तेल होर्मुज से गुजरता है और कई रिपोर्टों के अनुसार सामान्य दिनों में रेड सी के स्ट्रेट से क़रीब 10-12 फीसदी। अब यदि रेड सी भी बंद हुआ तो तेल संकट से कितना बड़ा हाहाकार मचेगा, इसका अंदाज़ा मौजूदा संकट से ही लगाया जा सकता है। तो सवाल है कि रेड सी स्ट्रेट की मौजूदा स्थिति क्या है और आख़िर ईरान इस पर कैसे नियंत्रण कर सकता है जब उसकी सीमा इससे काफ़ी दूर है? और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर हो सकता है?
इस पूरे घटनाक्रम को समझने से पहले यह जान लें कि इसको लेकर ताज़ा चेतावनी क्या आई है। ईरान ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सख्त चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ईरान पर ज़मीन से हमला करता है या उसके द्वीपों पर कब्जा करने की कोशिश करता है तो ईरान रेड सी में स्थित बाब अल-मंदेब स्ट्रेट पर भी नियंत्रण कर सकता है। बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को रेड सी स्ट्रेट क नाम से भी जाना जाता है। ईरान की यह चेतावनी तब आई है जब ख़बरें हैं कि अमेरिका जमीनी कार्रवाई और खर्ग द्वीप पर कब्जा करने के लिए घेराबंदी कर रहा है।
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने हाल ही में एक गुमनाम सैन्य सूत्र के हवाले से यह ख़बर दी। सूत्र ने कहा कि अगर अमेरिका ईरान के क्षेत्र या द्वीपों पर हमला करता है तो यमन में मौजूद ईरान समर्थक हूती विद्रोही बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले शुरू कर सकते हैं।
बाब अल-मंदेब स्ट्रेट कहाँ स्थित है?
यह जलडमरूमध्य जिबूती और यमन के बीच स्थित है। यहाँ से गुजरने वाले जहाज रेड सी को गल्फ ऑफ एडेन और अरब सागर से जोड़ते हैं। यह रास्ता यूरोप, एशिया और मध्य पूर्व के बीच व्यापार और तेल के लिए बेहद अहम है। पहले भी हूती विद्रोहियों ने यहां कई जहाजों पर हमले किए थे।रिपोर्ट के अनुसार सैन्य सूत्र ने कहा, 'हम दुश्मन की हर तैयारी पर नज़र रख रहे हैं। अगर दुश्मन हमारे द्वीपों या जमीन पर हमला करता है या फारस की खाड़ी और ओमान सागर में नौसेना से दबाव डालता है, तो हम उनके लिए नए मोर्चे खोल देंगे। यह उनके लिए सरप्राइज होगा। उनका हमला न सिर्फ बेकार जाएगा, बल्कि उनकी लागत भी दोगुनी हो जाएगी।'
ईरान का दावा है कि उसके पास उसकी सीमा से काफी दूर इस जलडमरूमध्य में वास्तविक खतरा पैदा करने की पूरी क्षमता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर पहले ही कब्जा
पिछले महीने ईरान ने फारस की खाड़ी के अहम होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण कर लिया था। दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। इस कदम से तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई। लगभग 43 लाख बैरल तेल रोजाना की कमी आ गई। एशिया के कई देशों में तेल की कमी के कारण आपात उपाय किए गए। तेहरान के मेयर डॉ. अलीरेजा जाकानी ने कहा कि होर्मुज पर नियंत्रण अमेरिका और उसके सहयोगियों पर नया प्रतिबंध है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, 'प्रतिबंध हटाने के लिए बातचीत की ज़रूरत नहीं। हमारी मिसाइलों ने पहले ही नतीजे दे दिए हैं।'
ईरान की पड़ोसी देशों को चेतावनी
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कालिबाफ ने चेतावनी दी कि अगर कोई पड़ोसी देश दुश्मनों के साथ मिलकर ईरान के किसी द्वीप पर कब्जा करने में मदद करता है तो ईरान उस देश पर हमला करेगा। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू होने के बाद से ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के उन देशों पर हमले किए हैं जहां अमेरिकी ठिकाने हैं।बाब अल-मंदेब स्ट्रेट क्यों अहम है?
यह संकरा जलमार्ग रेड सी को गल्फ ऑफ एडेन से जोड़ता है। यहां से गुजरने वाले जहाज आगे स्वेज नहर की ओर जाते हैं। अगर यहाँ समस्या हुई तो जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के लंबे रास्ते से जाना पड़ेगा, जिससे समय और ख़र्च बहुत बढ़ जाएगा।
पिछले सालों में हूती विद्रोहियों के हमलों की वजह से यहां शिपिंग सुरक्षा बड़ी चिंता का विषय बन गई है।
होर्मुज संकट का सबक क्या?
पश्चिमी देश अब होर्मुज को सुरक्षित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन रेड सी के अनुभव से उन्हें पता चल चुका है कि यह आसान नहीं है। रेड सी में हूती हमलों से बचाव के लिए अरबों डॉलर खर्च हुए, कई जहाज डूबे, लेकिन पूरी तरह सुरक्षा नहीं हो सकी। कई शिपिंग कंपनियां अब भी उस रास्ते से बच रही हैं। होर्मुज में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी के पास उन्नत हथियार हैं- बैलिस्टिक मिसाइलें, हथियारों से लैस ड्रोन, समुद्री माइन्स और तेज हमला करने वाली नौकाएँ। विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज की सुरक्षा रेड सी से कहीं ज़्यादा मुश्किल है।
तेल की क़ीमतें बढ़ीं, दुनिया चिंतित
इस संकट से तेल की क़ीमतें तेजी से बढ़ गई हैं। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहा और रेड सी के स्ट्रेट को बंद किया गया तो कमी और बढ़ सकती है। इससे ईंधन, खाना और परिवहन के दाम दुनिया भर में प्रभावित होंगे।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बुधवार को न्यूयॉर्क में चेतावनी दी, 'दुनिया एक बड़े युद्ध की ओर बढ़ रही है। अब समय है कि हम बढ़ते तनाव की सीढ़ी चढ़ना बंद करें और कूटनीति की सीढ़ी चढ़ें।' संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में होर्मुज को सुरक्षित करने के उपायों पर चर्चा चल रही है। कुछ देश सख्त कदमों की बात कर रहे हैं, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी बढ़ते ख़तरे को देखते हुए सतर्क हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज में सुरक्षित आवागमन बहाल करने में कई महीने लग सकते हैं। इसमें सैन्य एस्कॉर्ट, माइन्स साफ करना और हवाई निगरानी की जरूरत होगी। फिर भी ड्रोन, मिसाइल और चौंकाने वाली रणनीतियों के ख़तरे बने रहेंगे।
दुनिया अब बाब अल-मंदेब और होर्मुज दोनों जलडमरूमध्यों पर नज़र रखे हुए है। ये दोनों संकरे रास्ते याद दिलाते हैं कि समुद्री सुरक्षा अब वैश्विक आर्थिक स्थिरता का केंद्र बन चुकी है। स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है और आगे क्या होता है, इस पर पूरी दुनिया की नजर है।