अमेरिकी संसद (House of Representatives) के रिपब्लिकन सदस्यों के बीच ईरान युद्ध को लेकर असंतोष तेजी से बढ़ रहा है। बुधवार को 'हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी' की एक ब्रीफिंग के बाद कई सांसद इस संघर्ष के उद्देश्यों और इसकी लंबी अवधि को लेकर नाराज दिखे। वे अमेरिकी सेना को ईरान में ज़मीन पर उतारने को लेकर भी खिलाफ दिखे। अमेरिकी मीडिया में बुधवार से इस तरह की खबरें आ रही हैं कि ट्रंप अब यूएस आर्मी को ईरान में ज़मीन पर उतारने जा रहे हैं।
दक्षिण कैरोलिना (South Carolina) की रिपब्लिकन सांसद नैन्सी मेस ने बैठक में अपनी नाराजगी जाहिर की और बीच में ही बाहर निकल गईं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस युद्ध के लिए किसी भी अतिरिक्त फंडिंग (धनराशि) का समर्थन नहीं करेंगी।
मेस का कहना है कि कमेटी को गुमराह किया गया है और सेना के पास युद्ध को लेकर ठोस जवाब नहीं हैं। उन्होंने कहा, "जैसे-जैसे यह युद्ध खिंच रहा है, रिपब्लिकन पक्ष का समर्थन कम होता जा रहा है।"
ताज़ा ख़बरें
मेस ने सीनेटर लिंडसे ग्राहम के उस सुझाव की कड़ी आलोचना की, जिसमें उन्होंने ईरान के खार्ग द्वीप (Kharg Island) पर कब्जा करने की बात कही थी। खार्ग द्वीप ईरान के कच्चे तेल के निर्यात का लगभग 90% हिस्सा संभालता है।
नैंसी मेस ने कड़े शब्दों में कहा कि वे "तेल की कीमतों के लिए अमेरिकी बेटे-बेटियों को मरने के लिए युद्ध में नहीं भेजेंगी।" उन्होंने पिछले 70 वर्षों के इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका 'सत्ता परिवर्तन' (Regime Change) की कोशिशों में हमेशा विफल रहा है।
अमेरिका के भीतर युद्ध विरोधी प्रदर्शन तेज हो गए हैं। नैन्सी मेस जैसे सांसदों के विरोध के कारण $40 बिलियन का नया सैन्य सहायता पैकेज संसद में अटक गया है। जनता में बढ़ती महंगाई और पेट्रोल की कीमतों को लेकर भारी आक्रोश है।

ट्रंप की तेजी से गिरती लोकप्रियता

हालिया रॉयटर्स/इप्सोस (Reuters/Ipsos) और यूगोव (YouGov) के सर्वे के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग गिरकर 36% के स्तर पर आ गई है। यह उनके व्हाइट हाउस में दोबारा आने के बाद का सबसे निचला स्तर है। सर्वे बताते हैं कि आधे से अधिक अमेरिकी (लगभग 55-56%) उनके कामकाज के तरीके से नाखुश हैं। विशेष रूप से स्वतंत्र (Independent) मतदाताओं के बीच उनका समर्थन तेजी से घटा है, जो 2024 के चुनाव में उनकी जीत का मुख्य आधार थे।

ईरान में ज़मीनी सेना भेजने के खिलाफ 74% नागरिक

ईरान के खिलाफ शुरू किए गए 'ऑपरेशन आयरन सिटाडेल' को लेकर अमेरिकी जनता में भारी असंतोष है। क्विन्निपिएक यूनिवर्सिटी (Quinnipiac University) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, 54% अमेरिकी इस सैन्य कार्रवाई का खुलकर विरोध कर रहे हैं, जबकि केवल 39% इसका समर्थन करते हैं। लोग इस युद्ध को "बिना उद्देश्य का संघर्ष" मान रहे हैं। सबसे कड़ा विरोध ईरान में जमीनी सेना (Ground Troops) भेजने को लेकर है, जिसके खिलाफ लगभग 74% नागरिक हैं।

आर्थिक प्रभाव और महंगाई का दबाव

ट्रंप की लोकप्रियता गिरने का एक बड़ा कारण युद्ध से उपजी आर्थिक बदहाली है। खार्ग द्वीप की घेराबंदी और खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे अमेरिका में गैस (पेट्रोल) की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई हैं। यूगोव पोल के अनुसार, 69% अमेरिकियों का मानना है कि युद्ध ने महंगाई को असहनीय बना दिया है। केवल 29% लोग ट्रंप के आर्थिक प्रबंधन पर भरोसा जता रहे हैं, जो उनके अब तक के कार्यकाल का सबसे न्यूनतम स्तर है।
दुनिया से और खबरें

राष्ट्रपति ट्रंप की छवि को धक्का

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान "नो न्यू वॉर्स" (कोई नया युद्ध नहीं) का वादा किया था, लेकिन ईरान के साथ सीधे संघर्ष ने उनकी इस छवि को नुकसान पहुँचाया है। प्रदर्शनकारी अब सड़कों पर उतरकर उन्हें "युद्ध भड़काने वाला" (Warmonger) कह रहे हैं। लोगों का मानना है कि यह युद्ध अमेरिका को कम सुरक्षित बना रहा है। सर्वेक्षणों में 46% उत्तरदाताओं ने कहा कि इस संघर्ष से भविष्य में वैश्विक सुरक्षा को और अधिक खतरा पैदा होगा, जिससे ट्रंप के प्रति जनता का विश्वास लगातार कम हो रहा है।