अमेरिका-ईरान युद्ध की लागत को लेकर खबर सामने आई है। जिसमें कहा गया है कि यह युद्ध अमेरिका को लगभग 1 अरब डॉलर प्रतिदिन पड़ सकता है। ईरान पर थोपे गए आधुनिक युद्ध की आर्थिक वास्तविकता यही है। अल जज़ीरा ने इस रिपोर्ट का विस्तृत विश्लेषण किया है। 
इस हवाई युद्ध में अमेरिकी सरकार को कितना खर्च करना पड़ रहा है, यह जानकर शायद सांसदों और आम जनता को झटका लगेगा। अनुमान है कि यह खर्च प्रतिदिन 1 अरब डॉलर है। पेंटागन ने कथित तौर पर 50 अरब डॉलर के अतिरिक्त बजट का अनुरोध किया है ताकि टोमाहॉक मिसाइलों, थाड मिसाइलों और पैट्रियट मिसाइलों को बदला जा सके, जिनका इस्तेमाल युद्ध के पहले सात दिनों में ही हो चुका है। साथ ही, सैन्य खर्च में भारी वृद्धि के कारण क्षतिग्रस्त या खराब हो चुके अन्य उपकरणों को भी बदला जा सके। सांसद पहले से ही बजट घाटे और संघीय ऋण पर ब्याज को लेकर चिंतित हैं। 50 अरब डॉलर का एक और अनुरोध कुछ सांसदों को सोचने पर मजबूर कर सकता है।

युद्ध शुरू होने पर पहले 24 घंटे में ही 779 मिलियन डॉलर खर्च

हालिया आकलन के अनुसार अमेरिकी सैन्य अभियान के शुरुआती चरण में ही भारी खर्च सामने आया है। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के पहले 24 घंटे में ही लगभग 779 मिलियन डॉलर खर्च होने का अनुमान लगाया गया। इसमें शामिल थे: B-2 स्टेल्थ बॉम्बर,  F-35 और F-22 लड़ाकू विमान,  टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइल,  पैट्रियट और THAAD मिसाइल रक्षा प्रणाली। युद्ध शुरू होने से पहले ही सैनिकों, जहाज़ों और विमानों को तैनात करने में लगभग 630 मिलियन डॉलर खर्च हो चुके थे।
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आधुनिक हथियारों की कीमत: युद्ध क्यों महंगा है

इस युद्ध में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख हथियार बेहद महंगे हैं। Tomahawk क्रूज़ मिसाइल $1.5 – $2 मिलियन, THAAD इंटरसेप्टर ~$12.8 मिलियन, Patriot इंटरसेप्टर ~$4 मिलियन, B-2 बॉम्बर ऑपरेशन $130k–$150k प्रति फ्लाइट घंटा। F-35 ऑपरेशन ~$36k प्रति घंटा।

यदि एक रात में दर्जनों मिसाइलें दागी जाती हैं और उतनी ही मिसाइलें रोकने के लिए चलाई जाती हैं, तो खर्च तेजी से अरबों डॉलर तक पहुंच जाता है।

अमेरिकी सैन्य संसाधनों की तेज़ खपत

पेंटागन के अंदर सबसे बड़ी चिंता “munition burn rate” यानी हथियारों की तेजी से खपत है। पहले सप्ताह में ही: सैकड़ों Patriot और THAAD इंटरसेप्टर दागे गए। बड़ी संख्या में Tomahawk मिसाइलें इस्तेमाल हुईं। इसलिए पेंटागन लगभग 50 अरब डॉलर के अतिरिक्त बजट की मांग कर सकता है ताकि हथियारों का भंडार फिर से भरा जा सके।

युद्ध लंबा चला तो कुल अमेरिकी लागत 40 से 95 अरब डॉलर तक जा सकती है।

इसराइल पर युद्ध का आर्थिक बोझ

हालांकि अमेरिका ज्यादा खर्च कर रहा है, लेकिन इज़राइल पर भी भारी आर्थिक दबाव है। इसराइल को एयर डिफेंस सबसे महंगा पड़ रहा है। ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने के लिए इसराइल कई रक्षा प्रणालियों का इस्तेमाल कर रहा है: जिनमें Iron Dome ($40k – $100k),  David’s Sling ($1 मिलियन), Arrow-2 / Arrow-3 ($2–3 मिलियन) शामिल हैं। इनकी लागत इनके नाम के साथ दी गई है।

ईरान अगर सैकड़ों मिसाइल या ड्रोन एक साथ दागता है, तो उन्हें रोकने में इज़राइल को प्रति रात करोड़ों से अरबों डॉलर खर्च करने पड़ सकते हैं।

12-दिवसीय युद्ध का अनुभव

2025 में हुए 12-दिवसीय ईरान-इसराइल टकराव के दौरान अमेरिका और इसराइल ने दर्जनों THAAD इंटरसेप्टर दागे, जिनकी लागत $810 मिलियन से $1.2 बिलियन तक पहुंच गई। इससे स्पष्ट हुआ कि इसराइल की रक्षा प्रणाली ही सबसे महंगी है।

इसराइल की कुल संभावित लागत

सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार यदि युद्ध लंबा चलता है तो: इसराइल की दैनिक लागत $200 मिलियन से $500 मिलियन तक हो सकती है।
इसमें शामिल हैं: एयर डिफेंस इंटरसेप्टर, एयरफोर्स मिशन, रिजर्व सैनिकों की लामबंदी, नागरिक सुरक्षा और बंकर सिस्टम, आर्थिक नुकसान (एयरपोर्ट, उद्योग, पर्यटन)।

रणनीतिक वास्तविकता: ईरान का सस्ता ड्रोन बनाम इसराइल की महंगी रक्षा

इस युद्ध का सबसे बड़ा आर्थिक विरोधाभास यह है: ईरान का ड्रोन $20,000 – $50,000 और अमेरिका/इसराइल की इंटरसेप्टर मिसाइल: $4–12 मिलियन। यानी: यदि ईरान 100 सस्ते ड्रोन भेजता है तो उन्हें रोकने में अरबों डॉलर तक खर्च हो सकता है।

इसे रक्षा विश्लेषक “cost-exchange imbalance” कहते हैं।

अमेरिका में चिंता क्यों

अमेरिकी कांग्रेस में चिंता के तीन कारण हैं- पहले से ही बजट घाटा और कर्ज़ का ब्याज बढ़ रहा है। यूक्रेन युद्ध और अन्य सैन्य प्रतिबद्धताएं पहले से महंगी हैं। चीन के साथ संभावित संघर्ष के लिए हथियार भंडार बचाना जरूरी है। इसलिए $50 अरब का अतिरिक्त रक्षा बजट कई अमेरिकी सांसदों को असहज कर सकता है।
अमेरिका की ईरान युद्ध की कुल लागत $40–95 अरब तक पहुंच सकती है। इसराइल भी हर दिन सैकड़ों मिलियन डॉलर खर्च कर रहा है।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि सस्ते ड्रोन और मिसाइलों के सामने महंगी रक्षा प्रणाली आर्थिक रूप से टिकाऊ नहीं है।

ट्रंप का बयान और बाज़ार की हालत

ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष से वैश्विक तेल बाज़ार हिल रहे हैं और पेट्रोल पंपों पर कीमतें बढ़ रही हैं। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि अमेरिकियों को इस बारे में ज़्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए। पेट्रोल की कीमतों में अचानक हुई बढ़ोतरी के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने रॉयटर्स से कहा, "मुझे इसकी कोई चिंता नहीं है। यह संघर्ष खत्म होते ही कीमतें बहुत तेज़ी से गिरेंगी, और अगर बढ़ती भी हैं तो बढ़ने दीजिए, लेकिन पेट्रोल की कीमतों में थोड़ी-बहुत बढ़ोतरी से कहीं ज़्यादा ज़रूरी यह है।"

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ये टिप्पणियां ट्रंप के रुख में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाती हैं, जिन्होंने कुछ ही सप्ताह पहले अपने स्टेट ऑफ द यूनियन भाषण और टेक्सास में ऊर्जा पर केंद्रित एक रैली में पेट्रोल की गिरती कीमतों का जश्न मनाया था। पिछले शनिवार को युद्ध शुरू होने के बाद से वैश्विक तेल की कीमतों में लगभग 16% की वृद्धि हुई है, क्योंकि यह बढ़ता संघर्ष मध्य पूर्व में ऊर्जा आपूर्ति के लिए खतरा बन गया है।
अमेरिकी ट्रैवल कंपनी AAA के अनुसार, पिछले सप्ताह पेट्रोल की राष्ट्रीय औसत कीमत में 27 सेंट की वृद्धि हुई है और यह बढ़कर 3.25 डॉलर प्रति गैलन हो गई है, जो एक साल पहले की तुलना में लगभग 15 सेंट अधिक है। हालांकि, ट्रंप ने जोर देकर कहा कि यह वृद्धि प्रबंधनीय है। उन्होंने कहा, "कीमतों में बहुत ज्यादा वृद्धि नहीं हुई है।"