Iran US tensions- ईरान ने कहा- अमेरिका के नए हमले की तैयारी की जानकारी है। ऐसा होने पर पूरे पश्चिम एशिया में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की धमकी। क़तर के ज़रिये बातचीत के लिए भी तीन शर्तें रख दीं। ट्रंप की ईरान को धमकी नये जुमलों के साथ फिर आई है।
मुजतबा खामेनेई और ट्रंप (दाएं)
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर वॉशिंगटन ने उस पर नया सैन्य हमला किया तो पूरे पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और अमेरिकी हितों के खिलाफ लगातार और जवाबी हमले किए जाएंगे। साथ ही ईरान ने उन क्षेत्रीय देशों को भी चेताया है जो किसी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में उसका साथ देंगे।
ईरान की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिका की ओर से भी तेहरान पर दबाव बढ़ाया जा रहा है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को समझौते पर नहीं आने की स्थिति में गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। दूसरी ओर, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी शर्तें पूरी होने तक न तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलेगा और न ही अमेरिका के साथ पहले वाले वार्ता ढांचे में लौटेगा।
अमेरिका के नए हमले की तैयारी की जानकारी हैः ईरान
ईरान के खतम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने रविवार को कहा कि उसे ऐसी जानकारी मिली है कि अमेरिका क्षेत्रीय सहयोगियों की मदद से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई फिर शुरू करने की तैयारी कर रहा है। हालांकि ईरानी सैन्य कमान ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उसे यह जानकारी किन स्रोतों से मिली है और संभावित अमेरिकी कार्रवाई कब या किस रूप में हो सकती है।ईरानी कमान ने सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के जरिए कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कोई नया कदम उठाया तो क्षेत्र में मौजूद उसके सभी ठिकानों और हितों को लगातार, प्रभावी और गंभीर जवाबी हमलों का सामना करना पड़ेगा। ईरान ने यह भी कहा कि ऐसे हमलों पर उसके जवाब में कोई भौगोलिक सीमा या पहले से तय संयम नहीं होगा।
सहयोगी देशों को भी ईरान की चेतावनी
ईरान की चेतावनी केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है। तेहरान ने पश्चिम एशिया के उन देशों को भी संदेश दिया है जो अमेरिका को किसी संभावित सैन्य अभियान में सहयोग कर सकते हैं। ईरानी सैन्य कमान के मुताबिक, अगर कोई क्षेत्रीय देश अमेरिका की सैन्य कार्रवाई में मदद करता है तो उसे संघर्ष का पक्षकार माना जाएगा। ऐसे देशों के खिलाफ भी ईरान जवाबी कार्रवाई कर सकता है। इस चेतावनी से पश्चिम एशिया में संघर्ष के और फैलने की आशंका बढ़ गई है, खासकर ऐसे समय में जब क्षेत्र में पहले से कई मोर्चों पर सैन्य तनाव जारी है।होर्मुज नहीं खोलेगा ईरान
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने से भी साफ इनकार कर दिया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़र क़ालिबाफ ने कहा कि जब तक अमेरिका तेहरान की शर्तों को स्वीकार नहीं करता, तब तक न तो होर्मुज को खोला जाएगा और न ही अमेरिका के साथ पिछली वार्ता व्यवस्था में वापसी होगी।क़ालिबाफ के मुताबिक, ईरान ने अपनी मांगें मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका तक पहुंचा दी हैं। ईरान का कहना है कि उसकी शर्तें पूरी होने, ईरानी जनता के वैध अधिकारों को मान्यता मिलने और अमेरिका की प्रतिबद्धताओं के लागू होने तक बातचीत की पुरानी स्थिति बहाल नहीं होगी।
ईरान की तीन प्रमुख शर्तें क्या हैं?
ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रेज़ाई के अनुसार, कतर की मध्यस्थता के जरिए अमेरिका को संघर्ष समाप्त करने की शर्तें बताई गई हैं।
इनमें प्रमुख रूप से:
- सभी मोर्चों पर युद्ध और सैन्य कार्रवाई समाप्त करना।
- ईरान के फ्रीज किए गए धन को जारी करना।
- ईरान पर लगाए गए अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को समाप्त करना।
ईरान का कहना है कि इन मुद्दों पर बात मानने के बिना संघर्ष खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ना मुश्किल है।
होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर ईरान का दावा
ईरानी सशस्त्र बलों के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अबोलफज़ल शेकारची ने कहा है कि रणनीतिक जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर पहल अभी भी ईरानी सशस्त्र बलों के हाथ में है। उन्होंने समुद्री यातायात को लेकर अमेरिका के बयानों को मनोवैज्ञानिक अभियान बताया। होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। यहां से तेल और गैस की बड़ी मात्रा अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचती है। इसलिए इस जलमार्ग में लंबे समय तक व्यवधान का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।अमेरिका ने 109 वाणिज्यिक जहाजों का रास्ता बदलाः इस बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने कहा है कि 20 सितंबर तक उसकी सेनाओं ने 109 वाणिज्यिक जहाजों का मार्ग बदला है। अमेरिका के मुताबिक यह कार्रवाई ईरान के खिलाफ लागू नौसैनिक नाकाबंदी को लागू कराने के प्रयास का हिस्सा है। CENTCOM के अनुसार ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले समुद्री यातायात पर नौसैनिक नाकाबंदी लागू करने की कार्रवाई 14 जुलाई से फिर शुरू की गई थी।
ट्रंप ने भी दी गंभीर चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को समझौते पर सहमत नहीं होने की स्थिति में गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने कहा कि वह ईरान को लेकर “निर्णय लेने की स्थिति” में हैं और “बहुत बड़ी चीजें” हो सकती हैं। उन्होंने ईरान के सामने आर्थिक संकट या उसके नेतृत्व के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जैसे संभावित परिणामों का भी संकेत दिया है। हालांकि इसी दौरान ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान न्यूयॉर्क में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन से बातचीत की संभावना से पूरी तरह इनकार भी नहीं किया है। ऐसे में सैन्य धमकियों के साथ-साथ कूटनीतिक संपर्क की संभावना भी बनी हुई है।हूती हमलों ने बढ़ाई क्षेत्रीय चिंता
तनाव का एक और महत्वपूर्ण पहलू यमन के हूती आंदोलन से जुड़ा है। ईरान समर्थित हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ हाल में हमलों का दावा किया है। इनमें राजधानी रियाद और लाल सागर के प्रमुख तेल बंदरगाह यनबू के पास तेल प्रतिष्ठान पर हमले के दावे शामिल हैं। सऊदी अरब ने इन दावों पर तत्काल टिप्पणी नहीं की, जबकि सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने अन्य हमलों को नाकाम करने की बात कही है। टेलीग्राफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक हूती बलों की यमन के लाल सागर तट पर बढ़त ने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। यह जलमार्ग लाल सागर और एशिया के बीच समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है।अमेरिका ने अपने नागरिकों को किया सतर्क
इस बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी विदेश विभाग ने शनिवार को पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी नागरिकों के लिए सुरक्षा चेतावनी जारी की। इसमें संभावित अप्रत्याशित तनाव बढ़ने की आशंका जताई गई और लोगों से अधिक सतर्क रहने को कहा गया। संभावित उड़ान रद्द होने और हवाई क्षेत्र बंद होने जैसी परिस्थितियों के लिए भी तैयार रहने की सलाह दी गई।तेल और वैश्विक बाजार पर भी असर
ईरान की ओर से होर्मुज में अधिकांश समुद्री यातायात पर प्रतिबंध और अमेरिका की ओर से ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। टेलीग्राफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज और बाब-अल-मंदेब दोनों महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर दबाव बढ़ने से खाड़ी क्षेत्र से वैश्विक बाजारों तक ऊर्जा निर्यात प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा अमेरिकी नाकाबंदी के कारण ईरान के अपने तेल निर्यात पर भी असर पड़ रहा है, जिससे पहले से दबाव झेल रही ईरानी अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।फिलहाल तस्वीर यह है कि एक तरफ अमेरिका ईरान पर समझौते के लिए दबाव और सैन्य विकल्प की चेतावनी दे रहा है, जबकि दूसरी तरफ तेहरान ने होर्मुज खोलने और पुरानी वार्ता व्यवस्था में लौटने के लिए युद्धविराम, जमे हुए धन की वापसी और नौसैनिक नाकाबंदी हटाने जैसी शर्तें रखी हैं। साथ ही ईरान ने किसी नए अमेरिकी हमले की स्थिति में क्षेत्रीय अमेरिकी ठिकानों और हितों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की खुली चेतावनी दी है।