ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव अब पश्चिम एशिया से आगे समुद्री इलाकों तक फैलने की आशंका पैदा कर रहा है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह मुजतबा खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार याह्या रहीम सफवी ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने ईरान पर दोबारा हमला किया तो तेहरान युद्ध का दायरा हिंद महासागर और संभवतः उससे भी आगे तक बढ़ा सकता है।
सफवी ने यह बयान ईरानी समाचार एजेंसी फार्स द्वारा जारी किए गए एक वीडियो में दिया। उनके मुताबिक, संघर्ष पहले ही फारस की खाड़ी और होर्मुज समुद्री रास्ते से आगे बढ़कर लाल सागर तक पहुंच चुका है। ऐसे में अगर दोबारा युद्ध हुआ तो मोर्चा और विस्तृत हो सकता है और हिंद महासागर तक पहुंच सकता है।

फारस की खाड़ी से रेड सी तक पहुंच चुका है संघर्ष

सफवी का बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य, ओमान की खाड़ी और लाल सागर के आसपास लगातार बढ़ रहा है। ईरानी नेतृत्व पहले भी संकेत दे चुका है कि अमेरिका की ओर से नए सैन्य हमले की स्थिति में जवाब केवल ईरान के आसपास के इलाकों तक सीमित नहीं रहेगा। ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों और क्षेत्र में अमेरिकी हितों को निशाना बनाने की चेतावनियां भी दी हैं।
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इससे पहले ईरान की सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रज़ाई ने भी चेतावनी दी थी कि अगर युद्ध दोबारा शुरू होता है तो हिंद महासागर में मौजूद अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने दावा किया था कि ईरान ने संभावित नौसैनिक टकराव के लिए अपनी क्षमताओं को मजबूत किया है।

हिंद महासागर क्यों महत्वपूर्ण है?

हिंद महासागर दुनिया के पांच प्रमुख महासागरीय क्षेत्रों में तीसरा सबसे बड़ा है। इसका क्षेत्रफल लगभग 7.05 करोड़ वर्ग किलोमीटर है और यह पृथ्वी की जल सतह के करीब 20 प्रतिशत हिस्से को कवर करता है। इसके उत्तर में भारत, पाकिस्तान, ईरान और बांग्लादेश समेत एशियाई देश स्थित हैं। ईरान की धमकी का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि पश्चिम एशिया से एशिया की ओर जाने वाला बड़ा समुद्री व्यापारिक नेटवर्क इसी व्यापक क्षेत्र से जुड़ा है।खास तौर पर बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और आगे हिंद महासागर की ओर समुद्री संपर्क उपलब्ध कराता है। इस क्षेत्र में पहले से ही जहाजों की आवाजाही सुरक्षा संबंधी चिंताओं से प्रभावित रही है।

होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर असर

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, हाल के सप्ताहांत में केवल 17 कमोडिटी जहाज होर्मुज से गुजरे, जबकि उससे पिछले सप्ताह यह संख्या 37 थी। युद्ध से पहले यहां औसतन करीब 125 जहाज प्रतिदिन गुजरते थे। बाब-अल-मंदेब में भी जहाजों की आवाजाही कम हुई है। यदि संघर्ष हिंद महासागर तक फैलता है, तो इसका असर केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित रहने के बजाय अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर भी पड़ सकता है।

भारत के लिए क्यों बढ़ सकती है चिंता?

हिंद महासागर में किसी बड़े सैन्य संघर्ष या समुद्री मार्गों में व्यापक व्यवधान का भारत पर सीधा असर पड़ सकता है। भारत की खाड़ी क्षेत्र, अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक कड़ियां हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान पहले ही तेल, एलपीजी और शिपिंग लागत पर दबाव डाल रहा है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 88 प्रतिशत से अधिक आयात करता है, इसलिए पश्चिम एशिया में लंबे समय तक समुद्री व्यवधान भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आयात बिल को प्रभावित कर सकता है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से भारत के लिए आयात लागत बढ़ सकती है और इसका असर रुपये तथा घरेलू ऊर्जा कीमतों पर भी पड़ सकता है।

ईरान की चेतावनी का व्यापक संदेश

ईरानी नेतृत्व के हालिया बयानों में एक बात लगातार सामने आ रही है- अगर अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई करता है तो ईरान जवाब को केवल फारस की खाड़ी तक सीमित नहीं रखेगा। इससे पहले रेजाई ने कहा था कि युद्ध दोबारा शुरू होने पर अमेरिकी जहाजों को हिंद महासागर में निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने ईरान द्वारा हाइपरसोनिक मिसाइलों की गति बढ़ाने और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तथा वायु रक्षा प्रणालियों में सुधार का भी दावा किया था।
वहीं ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत के लिए कुछ शर्तें भी रखी हैं। इनमें सभी मोर्चों पर लड़ाई रोकना, ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करना और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करना शामिल है। ईरानी अधिकारियों ने बातचीत के साथ-साथ यह भी कहा है कि अगर नया अमेरिकी हमला हुआ तो तेहरान व्यापक सैन्य जवाब देने के लिए तैयार है।

अब खतरा सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं

ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार की ताजा चेतावनी से संकेत मिलता है कि अमेरिका और ईरान के बीच किसी नए सैन्य टकराव की स्थिति में संघर्ष का भौगोलिक दायरा काफी बड़ा हो सकता है। फारस की खाड़ी → होर्मुज → लाल सागर → बाब-अल-मंदेब → हिंद महासागर—इन समुद्री मार्गों के एक साथ प्रभावित होने की स्थिति में ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक व्यापार, समुद्री बीमा और एशियाई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर व्यापक असर पड़ सकता है। फिलहाल यह ईरानी अधिकारी की चेतावनी है; इसे वास्तविक सैन्य विस्तार की घोषणा के रूप में नहीं, बल्कि संभावित जवाब की चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए।