इसराइल के कट्टर और घोर विरोधी माने जाने वाले ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद को ही सत्ता में वापस लाने के लिए इसराइल ने बड़ी योजना बनाई थी। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। इसराइल ने अपनी इस योजना को पूरा करने के लिए अपनी खुफिया एजेंसी मोसाद को लगाया था। मोसाद के प्रमुख के साथ अहमदीनेजाद की बैठक भी हुई थी। मोसाद के एजेंट लंबे समय तक उनके संपर्क में रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल 2025 में ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका-इसराइल के युद्ध के बाद सत्ता परिवर्तन कर अहमदीनेजाद को कुर्सी पर बैठाने की योजना थी। लेकिन इस बीच इस साल फिर से शुरू हुए युद्ध में कुछ ऐसा हुआ कि इसराइल की योजना फेल हो गई।

अमेरिकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स की एक खोजी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इसराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने कई वर्षों तक ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के साथ गुप्त संपर्क बनाए रखा। रिपोर्ट के मुताबिक, इसराइल उन्हें पिछले साल के युद्ध के बाद ईरान में संभावित नए नेतृत्व के रूप में देख रहा था और इसके लिए एक गुप्त योजना पर काम किया गया था। रिपोर्ट में किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और न ही इसराइल या ईरान की सरकार ने इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है।
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NYT रिपोर्ट में क्या दावा किया गया?

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इसराइल ने अहमदीनेजाद को एक ऐसे नेता के रूप में देखा जो भविष्य में ईरान की सत्ता संभाल सकते थे। इसके लिए कथित तौर पर विदेशों में कई गुप्त बैठकें कराई गईं, आर्थिक मदद दी गई और ईरान में उन्हें सरकारी निगरानी से निकालने की योजना भी बनाई गई। रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरी रणनीति ईरान में सत्ता परिवर्तन की व्यापक योजना का हिस्सा थी।

बुडापेस्ट में हुई कथित गुप्त बैठकें

अमेरिकी अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़ वर्ष 2024 में हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में आयोजित एक जलवायु सम्मेलन को कथित तौर पर मोसाद और अहमदीनेजाद के बीच मुलाकात का माध्यम बनाया गया। 

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बुडापेस्ट में सम्मेलन के दौरान तत्कालीन मोसाद प्रमुख डेविड बार्निया ने स्वयं अहमदीनेजाद से मुलाकात की। बाद में मोसाद ने अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए को बताया कि उसने अहमदीनेजाद के साथ संपर्क बना लिया है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जून 2025 में अहमदीनेजाद फिर बुडापेस्ट पहुंचे। इस दौरान उनके सुरक्षा कर्मियों ने बताया कि वह दो बार बिना बताए कई घंटों के लिए गायब हो गए और बाद में कहा कि वे विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों से मिलने गए थे।

इसराइल ने क्यों चुना अहमदीनेजाद को?

सत्ता में रहने के दौरान अहमदीनेजाद इसराइल के घोर विरोधी रहे थे और कहा जाता है कि उन्होंने परमाणु कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ाया। लेकिन 2013 में राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद अहमदीनेजाद और ईरान के मौजूदा सत्ता प्रतिष्ठान के बीच दूरी बढ़ती गई। बताया गया है कि उन्होंने अपने पुराने कट्टर इसराइल विरोधी बयानों को कम कर दिया था और ईरान की सुरक्षा एजेंसियों तथा शासक वर्ग की आलोचना भी शुरू कर दी थी।
रिपोर्ट में अहमदीनेजाद के एक पूर्व सहयोगी के हवाले से दावा किया गया है कि उनका मानना था कि मौजूदा इस्लामी गणराज्य की व्यवस्था रहते हुए वे दोबारा सत्ता में नहीं लौट सकते। इसी वजह से उन्होंने कथित तौर पर अपने करीबी लोगों से कहा था कि यदि विदेशी समर्थन मिले तो वे सत्ता परिवर्तन के बाद ईरान का नेतृत्व कर सकते हैं, इसराइल को मान्यता दे सकते हैं और अमेरिका की मध्यस्थता में संबंध सामान्य करने की दिशा में कदम उठा सकते हैं।

'पैसे नहीं, सत्ता चाहिए थी'

रिपोर्ट में अहमदीनेजाद के पूर्व सलाहकार अब्दोलरेज़ा दावरी के हवाले से कहा गया है कि अहमदीनेजाद धन के लिए नहीं बल्कि सत्ता के लिए यह सब करने को तैयार थे। उनके अनुसार, अहमदीनेजाद आर्थिक रूप से पहले से मज़बूत थे और उनका लक्ष्य फिर से देश की सत्ता हासिल करना था।

इस साल युद्ध के दौरान योजना पर फिरा पानी!

रिपोर्ट का सबसे सनसनीखेज दावा 28 फरवरी की घटना को लेकर है। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, अमेरिका और इसराइल के सैन्य अभियान के शुरुआती दिनों में अहमदीनेजाद के तेहरान स्थित परिसर पर एक हवाई हमला हुआ। इसके बाद एक काली प्यूज़ो कार वहां पहुंची और उन्हें वहां से निकालकर एक गुप्त सुरक्षित ठिकाने पर ले जाया गया। 

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस अभियान को मोसाद एजेंटों ने अंजाम दिया था ताकि अहमदीनेजाद को सरकारी निगरानी से दूर रखकर सत्ता परिवर्तन की योजना आगे बढ़ाई जा सके।

हालाँकि, बताया गया है कि इस पूरे घटनाक्रम से अहमदीनेजाद असहज हो गए और बाद में उन्होंने सुरक्षित ठिकाना छोड़ दिया। इसके बाद योजना आगे नहीं बढ़ सकी।

अब नजरबंद हैं?

रिपोर्ट के अनुसार, अहमदीनेजाद लंबे समय तक सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए। हाल ही में वे ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में संक्षिप्त रूप से नज़र आए। न्यूयॉर्क टाइम्स ने चार वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों के हवाले से दावा किया है कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी की खुफिया इकाई ने उनके इसराइल से कथित संपर्कों का पता लगा लिया है और उन्हें फिलहाल घर में नजरबंद रखा गया है।
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ईरान में सत्ता बदलने के लिए थी योजना?

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अहमदीनेजाद से जुड़ा अभियान ईरान में शासन परिवर्तन की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा था। इस योजना में कथित तौर पर उत्तरी इराक में मौजूद कुर्द समूहों को हथियार उपलब्ध कराने, पश्चिमी ईरान के कुछ हिस्सों पर नियंत्रण स्थापित करने और बाद में तेहरान की ओर बढ़ने जैसी योजनाएं भी शामिल थीं। हालाँकि रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से कोई भी योजना सफल नहीं हो सकी।

यह पूरा घटनाक्रम न्यूयॉर्क टाइम्स की जांच रिपोर्ट में किए गए दावों पर आधारित है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसराइल, ईरान या अमेरिका की ओर से भी इन आरोपों पर कोई आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।