लेबनान पर इसराइल के फिर से हमले की वजह से यूएस ईरान पीस डील खटाई में पड़ गई है। व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस फिलहाल स्विट्ज़रलैंड नहीं जा रहे हैं और ईरान के साथ प्रस्तावित तकनीकी वार्ताओं की योजना अभी अंतिम रूप नहीं ले सकी है। इसराइली हमले की वजह से ईरान ने स्विट्ज़रलैंड अपनी टीम नहीं भेजने का फैसला किया है।
व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता ने कहा, "जैसा कि उपराष्ट्रपति ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, आगामी तकनीकी बातचीत की योजनाएं अभी अंतिम नहीं हैं। फिलहाल उपराष्ट्रपति आज रात स्विट्ज़रलैंड नहीं जा रहे हैं।" अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्ज़रलैंड बातचीत शुक्रवार को तय थी।

ईरान ने भी रद्द किया स्विट्ज़रलैंड दौरा

अमेरिकी उपराष्ट्रपति की यात्रा स्थगित होने से पहले ईरान भी स्विट्ज़रलैंड में प्रस्तावित वार्ता से पीछे हट चुका था। ईरानी समाचार एजेंसी फ़ार्स और अल-मयादीन की रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने अमेरिका के साथ चल रही पूरी 60-दिवसीय वार्ता प्रक्रिया को निलंबित कर दिया है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका और इसराइल के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MOU) की पहली शर्त का उल्लंघन किया गया है। तेहरान का कहना है कि समझौते पर इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर होने के 24 घंटे के भीतर ही इशराइल ने दक्षिणी लेबनान में सैन्य कार्रवाई जारी रखी, जो समझौते की भावना और शर्तों के खिलाफ है।
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ईरान कर चुका था तैयारी

रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी वार्ता प्रतिनिधिमंडल स्विट्ज़रलैंड रवाना होने की तैयारी कर चुका था और पहले दौर की बातचीत शुरू होने वाली थी। लेकिन लेबनान में इसराइली हमलों के चलते तेहरान ने अंतिम समय में पूरी यात्रा और वार्ता प्रक्रिया को स्थगित करने का फैसला किया। पीस डील घोषित होने के बाद से ही इसराइल तरह-तरह की हरकतें कर रहा है। वो इस डील को हर हालत में रोकना चाहता है। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वैंस उसे फटकार चुके हैं।

ईरान ने ताज़ा घटनाक्रम पर क्या बयान दिया

ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को एकतरफा तरीके से पूरा नहीं करेगा। तेहरान का कहना है कि जब तक उसे यह भरोसा नहीं हो जाता कि इसराइल ने लेबनान में अपने हमले पूरी तरह रोक दिए हैं और अमेरिका ने समझौते की पहली शर्त का व्यावहारिक रूप से पालन सुनिश्चित किया है, तब तक वार्ता शुरू नहीं होगी।

इसराइल को लेकर वैंस के कड़े संकेत

इस बीच उपराष्ट्रपति वैंस ने इसराइल को लेकर "बेहद कड़े शब्दों" का इस्तेमाल किया है। यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब इसराइली अधिकारियों और अमेरिका के कई प्रो-इसराइल समूहों ने ईरान के साथ हुए समझौते की आलोचना की है। इसराइल के दक्षिणपंथी मंत्रियों, इतामार बेन-ग्विर और बेजलेल स्मोट्रिच द्वारा की जा रही आलोचनाओं का जवाब देते हुए वेंस ने व्हाइट हाउस में कहा: 

"आप सिर्फ 90 लाख की आबादी वाला देश हो। आप अपनी हर राष्ट्रीय सुरक्षा समस्या का समाधान केवल हत्याएं करके (Kill your way out) नहीं निकाल सकते। आपको इस शांति प्रक्रिया का सम्मान करना होगा, जो अंततः आपके लिए ही अच्छी है।"

वैंस ने इसरायल को याद दिलाया कि दुनिया में इस समय डोनाल्ड ट्रंप ही उनके एकमात्र शक्तिशाली हमदर्द बचे हैं और इसराइल की रक्षा करने वाले दो-तिहाई हथियार अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसों से बनते हैं। वैंस ने लेबनान की राजधानी बेरूत में इसराइली हमलों में मारे जा रहे नागरिकों पर भी नाराजगी जताई और कहा कि "बेरूत में ऐसे हमले अब स्वीकार्य नहीं हैं।" राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इसराइली प्रधानमंत्री के बीच भी हाल के दिनों में तीखी बातचीत हुई थी। ट्रंप को पहले ही आशंका थी कि लेबनान में इसराइल की सैन्य कार्रवाइयां उस समझौते को खतरे में डाल सकती हैं।

लेबनान समझौते का अहम हिस्सा, इसराइल की नीयत

विश्लेषकों का कहना है कि समझौते में लेबनान का मुद्दा शामिल है। ईरान ने बार-बार साफ किया कि लेबनान पर किसी भी तरह का हमला होने पर पीस डील कैंसल हो जाएगी।  ट्रंप भी पहले संकेत दे चुके थे कि लेबनान एक अलग मुद्दा है, लेकिन अंतिम समझौता ज्ञापन में स्पष्ट रूप से लेबनान को शामिल किया गया और इसराइल से वहां सैन्य अभियान नहीं चलाने की अपेक्षा रखी गई। यही वह प्वाइंट है जिसने इसराइल समर्थक अमेरिकी सांसदों और समूहों के बीच सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि ट्रंप प्रशासन इस आलोचना का जवाब दे रहा है और समझौते को बचाने की कोशिश कर रहा है।

यूएस ईरान पीस डील का भविष्य अधर में

अमेरिका और ईरान दोनों पक्षों द्वारा स्विट्ज़रलैंड यात्रा स्थगित किए जाने के बाद परमाणु वार्ता का भविष्य फिलहाल अनिश्चित दिखाई दे रहा है। कूटनीतिक सूत्रों का मानना है कि लेबनान में स्थिति सामान्य होने और इसराइल की गतिविधियों पर स्पष्टता आने के बाद ही वार्ता प्रक्रिया दोबारा शुरू हो सकेगी। फिलहाल वॉशिंगटन और तेहरान दोनों अगले कदमों पर विचार कर रहे हैं, जबकि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने कूटनीतिक प्रयासों को जटिल बना दिया है।