दावोस (स्विट्जरलैंड) की बर्फ़ीली पहाड़ियों के बीच जब दुनिया के दिग्गज नेता जुटे, तो कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक ऐसा धमाका किया, जिसकी गूँज लंबे समय तक सुनी जाएगी। विश्व आर्थिक मंच (WEF) में अपने संबोधन के दौरान कार्नी ने साफ़ शब्दों में कहा कि अमेरिकी नेतृत्व वाला पुराना वैश्विक दौर अब इतिहास बन चुका है और जिसे हम 'नियम-आधारित व्यवस्था' (Rules-based order) कहते थे, वह एक खूबसूरत झूठ के सिवा कुछ नहीं था।
मार्क कार्नी ने अपने भाषण की शुरुआत किसी कूटनीतिक औपचारिकता से नहीं, बल्कि एक कड़वी सच्चाई से की। उन्होंने कहा, "मैं सीधा और स्पष्ट होना चाहता हूँ। हम किसी परिवर्तन के दौर में नहीं हैं, बल्कि हम टूटने के दौर में हैं। पुरानी विश्व व्यवस्था अब वापस नहीं आने वाली।" उन्होंने कहा- कनाडा कभी भी अमेरिका के आगे नहीं झुकेगा। कनाडा किसी ग़ज़ा प्लान में शामिल नहीं होगा।
कार्नी ने बिना डरे "अमेरिकी आधिपत्य" (American Hegemony) पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस आर्थिक एकीकरण ने कभी साझा समृद्धि का वादा किया था, आज बड़ी शक्तियाँ उसी को हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं।
कार्नी ने वैश्विक मंच पर स्वीकार किया कि दुनिया लंबे समय से एक छलावे में जी रही थी। उनके भाषण के कुछ तीखे अंश:

  • दोगले नियम: कार्नी के अनुसार, हमें हमेशा से पता था कि अंतरराष्ट्रीय नियमों की कहानी आंशिक रूप से झूठी थी। सबसे शक्तिशाली देश अपनी सुविधा के अनुसार खुद को इन नियमों से ऊपर रखते थे।

  • पक्षपाती व्यापार: व्यापार के नियम हमेशा से असमान रूप से लागू किए गए।

  • अमरीकी ढाल: कार्नी ने माना कि अमेरिकी वर्चस्व ने कुछ सार्वजनिक सुविधाएं (जैसे सुरक्षित समुद्री मार्ग और स्थिर वित्तीय प्रणाली) जरूर दीं, लेकिन अब वह सौदा खत्म हो चुका है।

टैरिफ दबाव डालने का औजार

कनाडा के प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी कि आज के दौर में टैरिफ केवल टैक्स नहीं, बल्कि 'दबाव डालने के औजार' बन गए हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी शक्तियाँ अब सप्लाई चेन और वित्तीय प्रणालियों को दूसरों को झुकाने के लिए 'हथियार' की तरह इस्तेमाल कर रही हैं। कनाडा के पीएम का संदेश गंभीर था: "आप एकीकरण के उस झूठ के सहारे नहीं जी सकते, जहाँ वही एकीकरण आपकी गुलामी का कारण बन जाए।"

कनाडा की नई रणनीति: आत्मनिर्भरता और विविधीकरण

कार्नी ने स्पष्ट किया कि कनाडा अब केवल भूगोल या पुराने गठबंधनों के भरोसे नहीं रह सकता। उन्होंने एक "सिद्धांतवादी और व्यावहारिक" रणनीति का प्रस्ताव रखा:

  • घरेलू क्षमता: जो देश खुद को खिला नहीं सकता, ईंधन नहीं दे सकता या अपनी रक्षा नहीं कर सकता, उसके पास विकल्प बहुत कम होते हैं।

  • नए साझेदार: किसी एक देश (अमेरिका) पर निर्भरता कम करने के लिए व्यापारिक रिश्तों में विविधता लाना अनिवार्य है।

  • लचीले गठबंधन: कार्नी ने कहा कि "मध्यम शक्तियों" (Middle Powers) को एक साथ आना होगा। उन्होंने मशहूर जुमला दोहराया: "अगर आप मेज (table) पर नहीं हैं, तो आप मेनू (menu) पर हैं।"
अपने भाषण के अंत में कार्नी ने स्पष्ट किया कि उन्हें पुरानी व्यवस्था के जाने का कोई दुख नहीं है। उन्होंने कहा, "हमें पुराने दौर के लिए शोक नहीं मनाना चाहिए। अतीत की यादों में खोए रहना कोई रणनीति नहीं है। इस बिखराव से हम कुछ बेहतर, मजबूत और अधिक न्यायपूर्ण निर्माण कर सकते हैं।"

मार्क कार्नी का यह बयान न केवल अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती है, बल्कि यह बदलती वैश्विक राजनीति का एक नया घोषणापत्र भी माना जा रहा है।