यूएस के मिनियापोलिस में आईसीयू नर्स एलेक्स प्रीटी की हत्या के बाद, मिनेसोटा के गवर्नर टिम वाल्ज़ ने राष्ट्रपति ट्रंप से राज्य से 3,000 फेडरल इमीग्रेशन एजेंटों को वापस बुलाने का आग्रह किया है।
नर्स एलेक्स प्रेटी को इसी जगह मारा गया था। लोग शोक जताने पहुंच रहे हैं
मिनेसोटा के गवर्नर टिम वाल्ज ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मांग की है कि वे राज्य से लगभग 3,000 "अप्रशिक्षित" फेडरल इमिग्रेशन एजेंट्स (आईसीई और बॉर्डर पेट्रोल) को तुरंत हटा लें। यह मांग शनिवार, 24 जनवरी 2026 को मिनियापोलिस में एक आईसीयू नर्स एलेक्स प्रेटी (37 वर्षीय) की फेडरल एजेंट्स द्वारा गोली मारकर हत्या के बाद आई है। यह शहर में इस महीने दूसरी ऐसी घटना है, जिसमें फेडरल एजेंट्स ने एक अमेरिकी नागरिक की जान ली।
एलेक्स प्रेटी, जो एक इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) नर्स थे और वेटरन्स की सेवा के लिए जाने जाते थे, विरोध प्रदर्शन के दौरान घटनास्थल पर पहुंचे थे। वीडियो फुटेज (जो अमेरिकी मीडिया और सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं) दिखाते हैं कि प्रेटी के हाथ में फोन था, कोई बंदूक नहीं। वे कुछ महिला प्रदर्शनकारियों को बचाने की कोशिश कर रहे थे, जिन्हें एजेंट्स ने जमीन पर धकेल दिया था। एजेंट्स ने प्रेटी पर पेपर स्प्रे किया, उन्हें जमीन पर गिराया और पकड़ लिया। किसी ने बंदूक की चेतावनी दी, जिसके बाद एजेंट्स ने प्रेटी से एक बंदूक निकाली (हालांकि वीडियो में वह कभी बंदूक नहीं निकालते दिखे)। इसके तुरंत बाद एक एजेंट ने उनकी पीठ पर चार गोलियां दागीं, और दूसरे एजेंट ने भी फायरिंग की, कुल मिलाकर करीब 10 गोलियां चलीं। जिसमें उनकी मौत हो गई। सारे वीडियो सबूत बता रहे हैं कि नर्स प्रेटी की हत्या की गई।
प्रेटी के माता-पिता ने बयान जारी कर कहा, "एलेक्स स्पष्ट रूप से बंदूक नहीं पकड़े हुए थे जब ट्रंप के हत्यारे और कायर आईसीई गुंडों ने उन पर हमला किया। उनके दाहिने हाथ में फोन था और खाली बायां हाथ सिर के ऊपर उठा हुआ था, जबकि वे एक महिला की रक्षा कर रहे थे। कृपया हमारे बेटे के बारे में सच फैलाएं। वह एक अच्छा इंसान था।"
ट्रंप प्रशासन ने दावा किया है कि प्रेटी एजेंट्स पर हमला करने वाला "गनमैन" और "असैसिन" था। उसने एजेंट्स को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम सहित अधिकारियों ने इसे सेल्फ-डिफेंस बताया। राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रेटी को "गनमैन" कहा और डेमोक्रेट्स पर आरोप लगाया कि वे "अवैध एलियन क्रिमिनल्स" को प्राथमिकता दे रहे हैं।
गवर्नर टिम वाल्ज ने रविवार को न्यूज ब्रीफिंग में ट्रंप से सीधे सवाल किया: "डोनाल्ड ट्रंप, क्या प्लान है? इन फेडरल एजेंट्स को हमारे राज्य से बाहर निकालने के लिए हमें क्या करना चाहिए? क्या आपने सोचा था कि डर, हिंसा और अराजकता हम चाहते हैं? तो आपने इस राज्य और राष्ट्र के लोगों को कम आंका है।" उन्होंने कहा, "हम इस राज्य में कानून और व्यवस्था में विश्वास करते हैं, शांति में विश्वास करते हैं। और हमें लगता है कि डोनाल्ड ट्रंप को इन 3,000 अप्रशिक्षित एजेंट्स को मिनेसोटा से बाहर निकालना चाहिए इससे पहले कि वे किसी और की जान ले लें।"
वाल्ज ने प्रेटी की हत्या की स्वतंत्र जांच की मांग की है। हजारों एजेंट्स को मिनियापोलिस में तैनात किया गया है, मुख्य रूप से सोमाली इमिग्रेंट्स द्वारा कथित फ्रॉड के आरोपों के बाद, जिन्हें ट्रंप और कंजर्वेटिव मीडिया ने बढ़ावा दिया। मिनियापोलिस में सोमाली समुदाय बड़ा है और शहर डेमोक्रेटिक की तरफ झुकाव रखता है।
रविवार को करीब 1,000 प्रदर्शनकारी ठंड में सड़कों पर उतरे और एजेंट्स के हटने की मांग की। घटनास्थल पर अस्थायी मेमोरियल बनाए गए। यह घटना पिछले कुछ हफ्तों में रेनी गुड (37 वर्षीय, तीन बच्चों की मां) की हत्या के बाद आई, जो भी फेडरल एजेंट द्वारा मारी गई थी।
स्थानीय अधिकारियों और डेमोक्रेट्स ने फेडरल एजेंट्स की कार्रवाइयों को "अवैध कब्जा" जैसा बताया और उचित प्रक्रिया की कमी पर सवाल उठाए। मिनेसोटा अटॉर्नी जनरल कीथ एलिसन ने ट्रंप के फ्रॉड दावों को खारिज किया।
विवादों में यूएस के इमीग्रेशन एजेंट्स
अमेरिका में इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) की स्थापना 2003 में 9/11 हमलों के बाद हुई थी, जो पूर्व INS और कस्टम्स सर्विस के कार्यों को मिलाकर बनाई गई। इसका मुख्य उद्देश्य देश के अंदर अवैध प्रवासियों की गिरफ्तारी, निर्वासन और तस्करी-मानव तस्करी जैसे अपराधों की जांच करना है। शुरुआती वर्षों से ही ICE पर हिरासत केंद्रों में खराब स्थितियां, इलाज में लापरवाही और मौतों के मामले सामने आए, जिससे मानवाधिकार संगठनों ने आलोचना की।
2017-2021 के ट्रंप प्रशासन में विवाद चरम पर पहुंच गए, जब 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत हजारों प्रवासी बच्चों को उनके माता-पिता से अलग कर दिया गया। इस नीति को क्रूर और अमानवीय बताया गया, जिससे 'अबोलिश ICE' आंदोलन तेज हुआ। हिरासत में मौतें बढ़ीं, अमेरिकी नागरिकों की गलत गिरफ्तारी के मामले आए और बड़े पैमाने पर छापेमारी से समुदायों में डर फैला। बाइडेन काल में कुछ सुधारों की कोशिश हुई, लेकिन हिरासत की समस्याएं और मौतें जारी रहीं।
2025 से ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में ICE की कार्रवाइयां फिर से आक्रामक हो गईं, जिसमें बड़े पैमाने पर निर्वासन, एजेंटों की तैनाती और हिरासत में रिकॉर्ड मौतें (30 से अधिक) दर्ज हुईं। हाल की घटनाओं में अमेरिकी नागरिकों की मौत और विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा के आरोपों ने विवाद को नया रूप दिया है। ICE अब अमेरिकी इमिग्रेशन नीति के सबसे विवादास्पद प्रतीक के रूप में देखा जाता है, जहां एक तरफ कानून प्रवर्तन की जरूरत और दूसरी तरफ मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप आम हैं।