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नेपाल में खड़ा हुआ राजनीतिक संकट, विश्वास मत हारे ओली

पड़ोसी देश नेपाल में राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है क्योंकि सोमवार को प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली संसद में विश्वास मत हार गए। ओली के सियासी विरोधी पुष्पकमल दहल प्रचंड के सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद से ही ओली की सरकार अल्पमत में आ गई थी। 

275 सांसदों वाले सदन में ओली को अपनी सरकार को बचाए रखने के लिए 136 वोट की ज़रूरत थी लेकिन वह 93 मत ही हासिल कर सके। नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी के निर्देश पर संसद का विशेष सत्र बुलाया गया था। विश्वास मत के विरोध में 124 सांसदों ने मतदान किया जबकि 15 सांसद तटस्थ रहे। मतदान में कुल 232 सांसदों ने हिस्सा लिया। 

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विपक्षी दलों नेपाली कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ नेपाल (सीपीएन) ने ओली सरकार के ख़िलाफ़ मतदान किया। ओली के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाली बात यह भी रही कि उनके एक और सियासी विरोधी माधव नेपाल गुट के 28 सांसद मतदान के दौरान ग़ैर-हाजिर रहे। 

विश्वास मत हारने के साथ ही ओली की प्रधानमंत्री के पद से विदाई हो गई है। नेपाल में अब संवैधानिक नियमों के मुताबिक़ नई सरकार का गठन होगा। 

सीपीएन-माओवादी केंद्रीय, नेपाली कांग्रेस और कुछ अन्य दल मिलकर देश में नई सरकार बनाने के काम में जुट गए हैं। इस बीच, प्रचंड सहित कई बड़े नेताओं ने राष्ट्रपति से अपील की है कि वे देश में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया को शुरू करें। 

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वर्चस्व की जंग 

नेपाल में बीते साल 20 दिसंबर को राजनीतिक संकट तब शुरू हुआ था जब राष्ट्रपति ने ओली की सिफ़ारिश पर संसद को भंग कर दिया था और 2021 अप्रैल-मई में नए चुनाव कराने का एलान किया था। ओली के इस क़दम का प्रचंड गुट ने जोरदार विरोध किया था और नेपाल में सत्तारूढ़ पार्टी नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी में वर्चस्व स्थापित करने के लिए जंग छिड़ गई थी। लेकिन फरवरी में देश की शीर्ष अदालत ने संसद को बहाल कर दिया था। 

ओली और प्रचंड के बीच झगड़े की जड़ यह थी कि ओली के गुट को लगता था कि प्रचंड गुट देश में एक समानांतर सरकार चलाने की कोशिश कर रहा है।

नेपाल में सत्ता को लेकर सत्ताधारी पार्टी में लंबे समय से खींचतान चल रही है और उसी का नतीजा है कि ओली ने संसद को भंग करने की अनुशंसा की थी। सत्ता पाने का यह संघर्ष मौजूदा प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व प्रीमियर पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' के बीच चल रहा है।

पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' की अगुवाई में एनसीपी के प्रतिद्वंद्वी गुटों ने पीएम ओली पर काफ़ी दबाव बनाया। पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल और प्रचंड लंबे समय से ओली पर प्रधानमंत्री पद छोड़ने के लिए दबाव बना रहे थे। 

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