जिन डोनाल्ड ट्रंप को पीएम मोदी 'मेरे दोस्त' बताते रहे हैं उनके प्रशासन के अमेरिकी होमलैंड सुरक्षा विभाग द्वारा जारी एक एआई-जनरेटेड विज्ञापन में 'मिस्टर सिंह' को निशाना बनाए जाने पर सिख और हिंदू संगठनों ने 'नस्लवादी' और 'भारत विरोधी' बताया है।
ट्रंप प्रशासन के सेल्फ डिपोर्ट विज्ञापन पर विवाद
पीएम मोदी के 'दोस्त' डोनाल्ड ट्रंप के ही विभाग ने अमेरिका में भारतीयों के ख़िलाफ़ नया अभियान शुरू किया है। अमेरिका से भगाओ। इसका नाम दिया है सेल्फ डिपोर्ट। इसको लेकर एक विज्ञापन जारी किया है और उसमें ऐसे शब्द का इस्तेमाल किया है जिसकी नस्लवादी और भारतीय विरोधी कहकर आलोचना की जा रही है।
दरअसल, नया विवाद अमेरिका में ट्रंप प्रशासन द्वारा अवैध प्रवासियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत जारी एक एआई आधारित सोशल मीडिया विज्ञापन को लेकर खड़ा हुआ है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग द्वारा जारी इस विज्ञापन में 'मिस्टर सिंह' नाम के एक किरदार को निशाना बनाया गया है। इस पर अमेरिका में सिख और हिंदू संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे नस्लवादी, भारतीय-विरोधी और भेदभावपूर्ण बताया है। विवाद इसलिए और बढ़ गया क्योंकि 'सिंह' उपनाम का इस्तेमाल बड़ी संख्या में सिख समुदाय के लोग करते हैं, जबकि कई हिंदू भी यह उपनाम रखते हैं। संगठनों का कहना है कि किसी पूरे समुदाय को इस तरह निशाना बनाना ग़लत है।
एआई जनरेटेड पोस्ट से बढ़ा विवाद
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक एआई-जनरेटेड पोस्ट साझा किया। यह पोस्ट ट्रंप प्रशासन के 'सेल्फ-डिपोर्ट' अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे लोगों से स्वयं देश छोड़ने की अपील की जा रही है।
पोस्ट में हॉलीवुड की लोकप्रिय ट्रांसफॉर्मर्स फ्रेंचाइज़ी के पात्रों जैसी एआई इमेज का इस्तेमाल किया गया है। विज्ञापन में ऑप्टिमस प्राइम एक दाढ़ी वाले भूरे रंग की त्वचा वाले व्यक्ति, जिसे 'मिस्टर सिंह' कहा गया है, को चेतावनी देता दिखाई देता है। पोस्ट में लिखा गया है, "खुद देश छोड़ दो, वरना अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहो।" इसके साथ एक और संदेश लिखा गया था, 'Get off our roads, you don't know how to drive Mr Singh.' यानी, 'हमारी सड़कों से हट जाओ, तुम्हें गाड़ी चलानी नहीं आती, मिस्टर सिंह।' यही टिप्पणी सबसे अधिक विवाद का कारण बनी।ट्रंप प्रशासन का अभियान क्या है?
यह अभियान ट्रंप प्रशासन की अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त नीति का हिस्सा बताया जा रहा है। सरकार विशेष रूप से उन प्रवासी ट्रक ड्राइवरों पर कार्रवाई कर रही है, जिनके पास वैध दस्तावेज नहीं हैं या जिन पर आपराधिक मामलों के आरोप हैं।
इसी अभियान से जुड़े एक अन्य वीडियो में ट्रांसफॉर्मर्स के खलनायक मेगाट्रॉन कुछ ट्रक चालकों की रिहाई की मांग करता दिखाई देता है। इन चालकों में हरजिंदर सिंह, राजेंद्र कुमार, जसवीर सिंह, बेकझान बेइशेकेव और अखरोर बोजोरोव जैसे नाम शामिल किए गए हैं। इन पर सड़क दुर्घटनाओं और अन्य अपराधों में शामिल होने का आरोप बताया गया है।वीडियो के साथ होमलैंड सिक्योरिटी ने लिखा, 'यदि आप इस देश के प्रति शत्रुतापूर्ण इरादे से आए हैं तो जान लीजिए कि हम अपनी रक्षा करेंगे, अमेरिकी मूल्यों की रक्षा करेंगे और अपने देश की रक्षा करेंगे।'
हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने क्या कहा?
हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन यानी एचएएफ़ ने इस विज्ञापन की कड़ी आलोचना की। संगठन ने सोशल मीडिया पर लिखा, "'सिंह' केवल सिख ही नहीं, हिंदू भी हैं। वे अमेरिकी नागरिक भी हैं और वाहन भी चलाते हैं। डिपार्टमेंट ऑफ़ होमलैंड सिक्योरिटी द्वारा किया गया यह नस्लवादी, भारत-विरोधी और अमेरिकी मूल्यों के ख़िलाफ़ प्रोफ़ाइलिंग पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोरने वाली है।" फाउंडेशन ने इस मामले की जांच की मांग करते हुए अमेरिकी न्याय विभाग और एफबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों को भी टैग किया।
संगठन का कहना है कि किसी सरकारी एजेंसी द्वारा किसी विशेष उपनाम या समुदाय को इस तरह निशाना बनाना सामान्य राजनीतिक संदेश नहीं बल्कि गंभीर भेदभाव का मामला है।
सिख कोएलिशन की भी कड़ी प्रतिक्रिया
अमेरिका के प्रमुख सिख अधिकार संगठन सिख कोएलिशन ने भी इस अभियान की आलोचना की। संगठन ने कहा कि 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों के 25 साल बाद भी सिख समुदाय केवल अपनी पहचान और पहनावे की वजह से भेदभाव झेल रहा है। सिख कोएलिशन ने कहा कि अमेरिका में लाखों लोगों का उपनाम 'सिंह' है, जिसका अर्थ 'शेर' होता है। संगठन ने कहा कि सिख अपनी पहचान पर गर्व करते हैं और सरकार द्वारा उन्हें दुश्मन की तरह दिखाने के बावजूद वे अपनी धार्मिक पहचान नहीं छोड़ेंगे।
क्या है 'सेल्फ-डिपोर्ट' कार्यक्रम?
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग इस समय सीबीपी होम नाम का एक कार्यक्रम चला रहा है। इसके तहत जिन लोगों के पास अमेरिका में रहने के वैध दस्तावेज नहीं हैं, उन्हें स्वेच्छा से देश छोड़ने का विकल्प दिया जा रहा है। सरकार का दावा है कि जो लोग स्वयं अमेरिका छोड़ने के लिए आवेदन करेंगे, उन्हें यात्रा में सहायता और 2,600 डॉलर तक की आर्थिक मदद भी दी जाएगी।
भारतीय समुदाय में नाराजगी
सोशल मीडिया पर भी इस विज्ञापन को लेकर काफी नाराजगी देखने को मिली। कई लोगों का कहना है कि 'मिस्टर सिंह' नाम का इस्तेमाल कर पूरे भारतीय और सिख समुदाय को ट्रक ड्राइवरों या अवैध प्रवासियों के रूप में पेश करना नस्लीय पूर्वाग्रह को बढ़ावा देता है।
आलोचकों का कहना है कि किसी सरकारी एजेंसी को अपराधियों या अवैध प्रवासियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन किसी पूरे समुदाय या उपनाम को निशाना बनाना उचित नहीं है। बता दें कि ट्रंप प्रशासन उन भारतीयों को निशाना बना रहा है जिनको पीएम मोदी अक्सर 'मेरे दोस्त', 'डियर फ्रेंड' या 'माय डियर फ्रेंड' कहकर संबोधित करते रहे हैं।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब ट्रंप प्रशासन अमेरिका में अवैध प्रवासियों के ख़िलाफ़ लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा है। दूसरी ओर, भारतीय मूल के संगठनों का कहना है कि कानून लागू करना अलग बात है, लेकिन किसी विशेष नस्ल, धर्म या समुदाय की पहचान को नकारात्मक तरीके से पेश करना लोकतांत्रिक मूल्यों और समानता के सिद्धांत के खिलाफ है।