डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व आर्थिक मंच के दौरान दावोस में गुरुवार को अपना नया 'बोर्ड ऑफ पीस' लॉन्च कर दिया। इस समारोह में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ट्रंप के साथ मंच पर नजर आए और चार्टर पर हस्ताक्षर किए, जबकि भारत ने इस लॉन्च से दूरी बनाए रखी। भारत को निमंत्रण मिला था, लेकिन नई दिल्ली ने इसमें शामिल होने पर अभी तक फ़ैसला नहीं लिया है। रूस, फ्रांस जैसे कई और बड़े देशों ने भी अभी तक दूरी बनाकर रखी है। इससे इस पहल की वैश्विक स्वीकार्यता और मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।

ट्रंप ने इसे एक अंतरराष्ट्रीय संगठन के रूप में पेश किया है, जो दुनिया के संघर्ष वाले इलाकों में स्थिरता लाने, कानून का शासन बहाल करने और लंबे समय तक शांति सुनिश्चित करने का काम करेगा। शुरू में यह ग़ज़ा के पुनर्निर्माण के लिए बनाया गया था, जहां इसराइल की सैन्य कार्रवाई के बाद दो साल से ज्यादा समय हो चुका है। ट्रंप का 20 सूत्री ग़ज़ा प्लान इसमें मुख्य भूमिका निभाएगा। इसमें ग़ज़ा को आतंकवाद मुक्त बनाना, हमास को हथियार छुड़वाना और वहां नए विकास कार्य करना शामिल है।
ट्रंप ने कहा कि बोर्ड बनने के बाद 'हम जो चाहें कर सकते हैं' और यह संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर काम करेगा। ट्रंप इस बोर्ड के चेयरमैन होंगे। इसमें सिर्फ राष्ट्राध्यक्ष स्तर के लोग होंगे। एग्जीक्यूटिव बोर्ड में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, पूर्व ब्रिटिश पीएम टोनी ब्लेयर, ट्रंप के दामाद जेरेड कुश्नर, विश्व बैंक अध्यक्ष अजय बंगा जैसे बड़े नाम शामिल हैं। यह बोर्ड ग़ज़ा प्रशासन के लिए 'नेशनल कमिटी' चलाएगा।

'बोर्ड ऑफ़ पीस' तब लॉन्च हुआ है जब ग़ज़ा में अक्टूबर से सीजफायर नाजुक स्थिति में है, लेकिन सीजफायर का उल्लंघन भी हो रहा है। इसराइल कहता है कि हमास सभी बंधकों की लाशें नहीं लौटा रहा, जबकि हमास इजराइल पर सहायता रोकने का आरोप लगाता है।

भारत अनुपस्थित क्यों रहा?

समारोह में करीब 35 देशों ने चार्टर पर हस्ताक्षर किए। पाकिस्तान ने इसमें शामिल होने की पुष्टि की। शहबाज शरीफ ट्रंप के दाएं तरफ बैठे, हाथ मिलाया और हस्ताक्षर किए। भारत ने इस कार्यक्रम से दूरी बनाई। पीएम नरेंद्र मोदी को निमंत्रण मिला था, लेकिन भारत ने न तो हां कहा और न ही साफ मना किया। भारत से साथ ही फ्रांस, ब्रिटेन, चीन और जर्मनी जैसे देश भी अनुपस्थित रहे। न्यूयॉर्क टाइम्स और अन्य रिपोर्टों में कहा गया कि भारत पाकिस्तान की आतंकवाद भूमिका को देखते हुए सतर्क है। भारत दो-राज्य समाधान का समर्थन करता है, जहां इसराइल और फिलिस्तीन शांति से साथ रहें।

ट्रंप फिर भारत-पाक मध्यस्थता पर बोले

ट्रंप ने भाषण में दोहराया कि उनकी मध्यस्थता से भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुका, जो दोनों परमाणु देश हैं। उन्होंने कहा, 'हमने भारत और पाकिस्तान के बीच शुरू हुए युद्ध को रोका। पाकिस्तान के पीएम ने कहा कि ट्रंप ने 10-20 मिलियन जिंदगियां बचाईं।' यह दावा मई 2025 के 'ऑपरेशन सिंदूर' से जुड़ा है, जब भारत ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे। भारत ने ट्रंप के ऐसे दावों को पहले खारिज किया है।

'बोर्ड ऑफ़ पीस' पर संदेह क्यों?

कई देशों में इस बोर्ड को लेकर असहजता है। डिप्लोमेट्स कहते हैं कि यह संयुक्त राष्ट्र की भूमिका कमजोर कर सकता है। अमेरिका के अलावा कोई भी स्थायी यूएनएससी सदस्य इसमें नहीं जुड़ा। रूस ने भी अभी तक स्थिति साफ़ नहीं की है, जबकि फ्रांस और ब्रिटेन ने अभी नहीं जुड़ने की बात कही। यूएन ने कहा कि कोई सहयोग यूएनएससी रेजोल्यूशन के तहत होगा।

बहरहाल, ट्रंप ने इसे सबसे बड़ा बोर्ड बताया और कहा कि यह दुनिया में शांति की नयी मिसाल बनेगा। लेकिन कम भागीदारी और प्रमुख सहयोगियों की अनुपस्थिति से इसकी सफलता पर सवाल हैं।