अमेरिकी हमले में तीन भारतीयों के मारे जाने को लेकर विपक्ष के निशाने पर रहे पीएम मोदी ने डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात में कहा, 'दुनिया के अलग-अलग समुद्रों में लाखों भारतीय नाविक काम कर रहे हैं। उनकी सुरक्षा भी उतनी ही ज़रूरी है।'
जी7 सम्मेलन से अलग मोदी और ट्रंप की मुलाकात।
अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों के मारे जाने पर चुप्पी साधने का आरोप झेल रहे पीएम मोदी फ्रांस में G7 सम्मेलन से अलग जब डोनाल्ड ट्रंप से मिले तो बोले कि 'भारतीय नाविकों की सुरक्षा सबसे अहम है'। राहुल गांधी और बाक़ी विपक्षी नेता मांग कर रहे थे कि पीएम मोदी ट्रंप के सामने भारतीयों की मौत की निंदा करें और कड़ा विरोध जताएँ।
लेकिन विपक्ष के इस दबाव के बीच बुधवार को पीएम की ट्रंप के साथ हाथ मिलाने की तस्वीरें आईं और उन्होंने ट्रंप से कहा, 'हम हमेशा कहते रहे हैं कि समुद्री रास्तों की आजादी सुनिश्चित होनी चाहिए। दुनिया के अलग-अलग समुद्रों में लाखों भारतीय नाविक काम कर रहे हैं। उनकी सुरक्षा भी उतनी ही अहम है। मुझे विश्वास है कि ईरान के साथ होने वाले समझौते में नाविकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।'
फ्रांस में चल रहे G7 समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाक़ात हुई। इसमें पीएम ने कहा कि मुझे भरोसा है कि ईरान के साथ हुई डील में समुद्री यात्रियों की सुरक्षा पक्की की जाएगी और उसे प्राथमिकता दी जाएगी। मुलाक़ात के दौरान पीएम मोदी द्वारा नाविकों की सुरक्षा का ज़िक्र किए जाने पर प्रधानमंत्री की बात का जवाब देते हुए ट्रंप ने वादा किया कि अमेरिका इस मुद्दे को सुलझाने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करेगा। उन्होंने कहा, 'मैंने इसके बारे में सुना है। यह एक मुश्किल पेशा है। इसमें कोई शक नहीं है, और हम इस पर मिलकर काम करेंगे। ऐसा हमेशा से होता रहा है, लेकिन हम इस पर मिलकर काम करते हैं। हम उन सभी लोगों को बहुत पसंद करते हैं। वे बहुत अच्छे लोग हैं।'
विपक्ष का दबाव क्या?
विपक्षी दलों ने पीएम मोदी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने भारतीय नाविकों की मौत पर अमेरिका के खिलाफ सख्ती से आवाज नहीं उठाई। उन्होंने लगातार मांग की कि पीएम को इस मुद्दे को मजबूती से उठाना चाहिए था। विपक्षी नेताओं में राहुल गांधी पीएम पर हमला करने में बेहद आक्रामक रहे हैं। ट्रंप-मोदी की मुलाक़ात से पहले राहुल ने पीएम को 'आज्ञाकारी नौकर जैसा' क़रार दिया था।भारतीय नाविकों की मौत के मामले में 'चेतावनी' वाले अमेरिकी बयान को लेकर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि एक आजाद देश कभी भी ऐसी भाषा बर्दाश्त नहीं कर सकता, लेकिन हमारे 'कंप्रोमाइज्ड प्रधानमंत्री' चुप हैं।
राहुल गांधी ने रविवार को एक्स पर लिखा था, "अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की हत्या के चंद दिन बाद - न अफ़सोस, न माफ़ी। उल्टा, अमेरिका ने आदेश देना जारी रखा है। उनके शब्द पढ़िए: 'अमेरिकी सेना के आदेश तुरंत मानें।' कोई उल्लंघन 'बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।' उन्होंने आगे कहा, 'एक आज़ाद देश इस तरह की भाषा कभी नहीं सहेगा। लेकिन हमारे Compromised PM? चुप। एक आज्ञाकारी नौकर की तरह सुनते हैं, और आदेश मान लेते हैं। Compromised PM देश के सम्मान की रक्षा नहीं करेगा - क्योंकि जो देश का अपमान करते हैं, वो उन्हीं के वश में हैं।'
उल्टे अमेरिका ने 'चेताया' था भारत को!
राहुल ने यह हमला तब किया था जब अमेरिकी हमलों की निंदा करने वाले एस जयशंकर के बयान के कुछ घंटे बाद अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कड़ा जवाब दिया था। डिप्टी प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा था कि मार्को रुबियो ने जयशंकर से बात की और जोर दिया कि सभी व्यावसायिक जहाजों को अमेरिकी बलों के आदेशों का तुरंत पालन करना चाहिए। टॉमी पिगॉट ने शनिवार को कहा था, 'विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कल भारत के विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर से बात की। दोनों अधिकारियों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में हाल की घटनाओं पर चर्चा की। विदेश मंत्री ने ज़ोर दिया कि सभी कमर्शियल जहाजों को अमेरिकी सेना के आदेशों का तुरंत पालन करना चाहिए, क्योंकि वे इस जलडमरूमध्य में शांति और सुरक्षा बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि अमेरिकी नाकेबंदी का उल्लंघन और ईरानी तेल की अवैध ढुलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।'
यह विवाद 10 जून को MT Settebello नाम के जहाज पर हुए हमले के बाद और बढ़ गया, जिसमें तीन भारतीय नाविक मारे गए थे। भारत ने दो बार अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स जेसन मीक्स को विदेश मंत्रालय में बुलाकर विरोध दर्ज कराया है।पीएम मोदी निशाने पर क्यों?
10 जून को अमेरिकी हमले में तीन भारतीयों के मारे जाने पर मोदी सरकार की ओर से कड़ा विरोध नहीं किए जाने पर आलोचना की जा रही है। सवाल उठ रहे हैं कि भारतीय नागरिकों की मौत पर आख़िर पीएम मोदी ने खुले तौर पर अमेरिका का विरोध क्यों नहीं किया? राहुल गांधी ने दो दिन पहले ही कहा था 'Compromised PM भारत माता के बेटों की रक्षा नहीं कर सकते, क्योंकि जिन्होंने उन बेटों की जान ली उन्हें नाराज़ करने की इनमें न हिम्मत है, न ताकत।'
राहुल गांधी ने कहा था, 'जब कोई विदेशी ताकत किसी भारतीय की हत्या करे, तो प्रधानमंत्री को बोलना पड़ता है। लेकिन मजाल है जो ये एक शब्द बोल जाएं। अगले हफ्ते G7 में, हमारे नाविकों की हत्या के बस चंद दिनों बाद, मोदी जी मुस्कुराएंगे, गले मिलेंगे और समझौते करेंगे - मगर, उन तीन भारतीयों के लिए उनके पास एक शब्द भी नहीं होगा।'
और अब पीएम मोदी ने दी ट्रंप को बधाई!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान शांति समझौते के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बधाई दी। इस समझौते की घोषणा हो चुकी है और शुक्रवार को इस पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए जाने हैं। मोदी ने कहा, 'पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों को आगे बढ़ाने में आपकी लीडरशिप की मैं सराहना करता हूं।' जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या उन्हें उम्मीद है कि भारत पश्चिम एशिया में कोई भूमिका निभाएगा, तो उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि भारत हर चीज़ में बड़ी भूमिका निभाता है।' उन्होंने आगे कहा, 'जब तक वह नेता हैं, भारत बड़ी भूमिका निभाता रहेगा।'
पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की यह बैठक फ्रांस में G7 समिट के दौरान हुई। यह फरवरी 2025 में पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा के बाद दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने मुलाकात थी। समिट में पश्चिम एशिया में शांति और ईरान के साथ अमेरिका के समझौते पर चर्चा हो रही है। पीएम मोदी ने ट्रंप को पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीद जगाने के लिए धन्यवाद भी दिया। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका की टीमें मिलकर तेजी से काम कर रही हैं और दोनों देशों के रिश्तों में नई ऊर्जा आई है।