ब्रिक्स के सदस्य ईरान पर अमेरिकी-इसराइली हमलों को लेकर भारत की अध्यक्षता में BRICS के साझा बयान जारी नहीं करने के लिए आलोचना झेल रही मोदी सरकार ने अब ईरान को औपचारिक तौर पर आमंत्रण भेज दिया है। ईरान ने कहा है कि यह औपचारिक न्यौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से फोन पर बातचीत के दौरान दिया गया। दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति, ईरान-अमेरिका समझौते, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।

भारत में ईरानी दूतावास ने कहा है, 'भारतीय प्रधानमंत्री ने संगठन के एजेंडे को आगे बढ़ाने में सदस्य देशों के सहयोग और समर्थन से BRICS में हुई प्रगति पर संतोष जताया। उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति को भारत की मेज़बानी में होने वाले आगामी BRICS नेताओं के शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया और उम्मीद जताई कि यह बैठक सदस्य देशों के बीच बहुपक्षीय सहयोग को और मज़बूत करने में योगदान देगी।'
यह निमंत्रण इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों को लेकर BRICS देशों की ओर से भारत की अध्यक्षता में कोई संयुक्त बयान जारी नहीं किया गया था। चीन, रूस और ब्राजील ने हमलों की निंदा की, लेकिन भारत ने साफ़ तौर पर अमेरिका-इसराइल की आलोचना से परहेज किया। भारत ने केवल संयम, कूटनीति और संवाद की अपील की। इसके साथ ही इसने ईरान की उसके पड़ोसी देशों में कार्रवाई की आलोचना की।

ब्रिक्स में भारत की भूमिका

2026 में ब्रिक्स की रोटेटिंग प्रेसिडेंसी भारत के पास है। ईरान ने पहले भारत से अपील की थी कि वह ब्रिक्स प्लेटफॉर्म से यूएस-इसराइल की निंदा करे और 'आक्रमण रोकने' में सक्रिय भूमिका निभाए। लेकिन भारत ने सहमति नहीं बनने का हवाला दिया। इससे ब्रिक्स की साख पर सवाल उठे और भारत के नेतृत्व पर भी।
ताज़ा ख़बरें
इन सब के पीछे भारत का अमेरिका और इसराइल से संबंध बताया गया। यूएई और सऊदी अरब जैसे गल्फ देशों के साथ आर्थिक हित हैं। इन देशों में 1 करोड़ से ज्यादा भारतीय काम करते हैं और इन देशों से ऊर्जा आयात होता रहा है। ऐसी स्थिति में भारत ने बीच का रास्ता अपनाया और ईरान के मामलों में चुप्पी जैसी स्थिति रही। इसे अमेरिका-इसराइल की तरफ़ झुकाव माना गया। भारत में विपक्षी दलों ने भी ईरान के साथ सदियों पुराने संबंध को उतना महत्व नहीं देने के लिए आलोचना की। आलोचना इसलिए हुई क्योंकि ब्रिक्स की अध्यक्षता में भारत ने 'न्यूट्रिलिटी' को तरजीह दी, जबकि ईरान मज़बूत एकता की उम्मीद कर रहा था।

बहरहाल, पीएम मोदी और राष्ट्रपति पेज़ेशकियन के बीच यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए समझौता हुआ है। वहीं, भारत ने ब्रिक्स मंच पर ईरान को आमंत्रित कर दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने का संकेत दिया है।

पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीद जताई

फोन पर बातचीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा कि उन्होंने राष्ट्रपति पेजेशकियन से पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि हाल की वार्ताओं में हुई प्रगति का स्वागत किया गया है और उम्मीद है कि आगे भी बातचीत जारी रहने से क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित होगी। प्रधानमंत्री ने यह भी दोहराया कि भारत सभी विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के ज़रिए किए जाने का समर्थन करता है।

होर्मुज की सुरक्षा पर जोर

बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। यह समुद्री मार्ग भारत के लिए बेहद अहम है क्योंकि भारत अपनी बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और गैस का आयात इसी रास्ते से करता है। हाल के संघर्ष के दौरान इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी, जिससे भारत सहित कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा था। हालाँकि ईरान-अमेरिका समझौते के बाद भारत आने वाले कई जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। इसके बावजूद अभी भी कई भारतीय जहाज फारस की खाड़ी में मौजूद हैं और उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।

ईरान ने जताया भारत का आभार

ईरान की ओर से जारी बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री मोदी और भारत सरकार द्वारा क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के समर्थन की सराहना की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में अंतरराष्ट्रीय संबंधों में आक्रामकता और बल प्रयोग की कोई जगह न हो। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भारत और ईरान के विचार कई मामलों में समान हैं और दोनों देश बहुपक्षीय मंचों पर मिलकर काम करते रहे हैं।

खामेनेई के निधन पर संवेदना

ईरानी पक्ष के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी ने हालिया संघर्ष में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई, अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और नागरिकों की मृत्यु पर भारत सरकार और भारतीय जनता की ओर से संवेदना व्यक्त की। ईरान ने यह भी बताया कि भारत अंतिम संस्कार में भाग लेने के लिए एक विशेष प्रतिनिधिमंडल भेजेगा।

मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी अपने पूर्व निर्धारित विदेश दौरे के कारण अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाएंगे। भारत की ओर से विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल भेजे जाने की संभावना है।
दुनिया से और खबरें

भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा है मामला

पश्चिम एशिया में तनाव का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है। भारत अपनी तेल की ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है। सरकार का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही बाधित होती है तो तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से भारत लगातार क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समुद्री व्यापार की सुरक्षा पर जोर देता रहा है।

BRICS के ज़रिए बढ़ रहा सहयोग

हाल के महीनों में भारत और ईरान के बीच BRICS मंच पर लगातार संपर्क बना हुआ है। हाल ही में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची भारत आए थे। ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के वरिष्ठ अधिकारी ने भी नई दिल्ली का दौरा किया। ईरान के पेट्रोलियम मंत्री ने ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में भाग लिया। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेशकियन के बीच हुई यह बातचीत भारत-ईरान संबंधों को नई दिशा देने के साथ-साथ ब्रिक्स के भीतर सहयोग को भी और मजबूत कर सकती है।