बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन से अलग प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात हुई। पुतिन ने पुष्टि की है कि वे 12-13 सितंबर को ब्रिक्स समिट के लिए भारत आएंगे। इसके साथ ही पीएम ने अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच ईरान के राष्ट्रपति से भी द्विपक्षीय चर्चा की।
पीएम मोदी और पुतिन की मुलाक़ात
शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO शिखर सम्मेलन की बैठक से अलग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की और यूक्रेन युद्ध को लेकर एक बार फिर शांति का संदेश दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हर दिन चलने वाला युद्ध पूरी मानवता को पीछे धकेलता है और अब दुनिया को 'अनंत युद्ध' से निकलकर 'युद्ध के अंत' की दिशा में बढ़ना चाहिए।
क़रीब 30 मिनट तक चली इस द्विपक्षीय बैठक में दोनों नेताओं ने रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, निवेश और द्विपक्षीय सहयोग समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने यह भी पुष्टि की कि वह 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने भारत आएंगे।
बैठक की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के गर्मजोशी से हाथ मिलाने और गले मिलने के साथ हुई। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'हर दिन का युद्ध मानवता को पीछे ले जाता है। अब समय आ गया है कि हम अंतहीन युद्धों से निकलकर युद्ध के अंत की दिशा में बढ़ें। सभी समस्याओं का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए। भारत शांति स्थापित करने के हर प्रयास का समर्थन करता है।' उन्होंने कहा कि भारत हमेशा बातचीत और कूटनीति के जरिए विवादों के समाधान का पक्षधर रहा है।
गांधी और बुद्ध की धरती से शांति का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह महात्मा गांधी और गौतम बुद्ध की धरती से शांति का संदेश लेकर आए हैं। उन्होंने कहा, 'भारत हमेशा शांति के साथ खड़ा रहेगा। दोनों देश अपने-अपने राष्ट्रीय हितों का सम्मान करते हुए आगे बढ़ सकते हैं।' प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और दोनों देशों का सहयोग नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
पुतिन बोले- भारत-रूस संबंध और मजबूत हुए
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी भारत-रूस संबंधों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तिगत प्रयासों की वजह से दोनों देशों के रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 के दौरान दोनों देशों के बीच पर्यटन में भी लगभग 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। पुतिन ने यह भी कहा कि वह जल्द ही भारत आने को लेकर उत्साहित हैं और ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।दोनों नेताओं की बैठक में भारत-रूस संबंधों के पारंपरिक क्षेत्रों पर भी विस्तार से बातचीत हुई। इनमें प्रमुख रूप से रक्षा सहयोग, ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी, व्यापार और निवेश, आर्थिक सहयोग बढ़ाना, भविष्य की रणनीतिक साझेदारी शामिल रहे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देशों ने इन क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई।
दिल्ली बैठक के फ़ैसलों पर हुई समीक्षा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति पुतिन की पिछली भारत यात्रा काफी सफल रही थी। उन्होंने कहा, 'दिल्ली में हुई हमारी पिछली बैठक के फैसलों को लागू करने में दोनों देशों के अधिकारी लगातार काम कर रहे हैं। इससे हमारे आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नई गति मिली है।' प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के लोग राष्ट्रपति पुतिन के आगामी दौरे का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।पीएम मोदी और पुतिन की इस मुलाकात में एक बार फिर दोनों नेताओं की प्रसिद्ध 'कार डिप्लोमेसी' भी देखने को मिली। बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन एक ही कार में बैठकर वर्ल्ड नोमैड गेम्स देखने पहुंचे।
इस तरह की तस्वीर पहली बार पिछले वर्ष चीन के तियानजिन में आयोजित एससीओ सम्मेलन के दौरान सामने आई थी। बाद में पुतिन की भारत यात्रा के दौरान भी दोनों नेताओं ने साथ यात्रा की थी। अब बिश्केक में भी यह परंपरा जारी रही।
ईरान के राष्ट्रपति से भी मिले पीएम मोदी
एससीओ सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-ईरान व्यापार को और बढ़ाने, पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति तथा समुद्री व्यापार और नाविकों की सुरक्षा पर चर्चा की।प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'हमने भारत और ईरान की पुरानी मित्रता को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच व्यापार को और विविध बनाने पर सहमति बनी।'
अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच हुई मुलाकात
यह मुलाकात तब हुई है जब अमेरिका ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों और कंपनियों को कड़ी चेतावनी दी है। हाल ही में अमेरिका ने ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल व्यापार से जुड़े मामलों में भारत की कुछ कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। इसके बावजूद भारत और ईरान ने व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाने तथा क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के प्रयास जारी रखने पर सहमति जताई।
शांति पर भारत का दोहराया रुख
बिश्केक में हुई प्रधानमंत्री मोदी की लगातार बैठकों से यह संकेत मिला कि भारत रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के तनाव जैसे वैश्विक संकटों के बीच भी बातचीत और कूटनीति के रास्ते पर जोर देता रहेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने साफ़ किया कि भारत का मानना है कि युद्ध किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है और दुनिया को शांति, संवाद तथा सहयोग के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए।