रूस ने अमेरिका के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि भारत ने रूसी कच्चा तेल (Crude Oil) खरीदना बंद करने का फैसला किया है। मास्को ने स्पष्ट किया है कि उसके पास यह मानने का "कोई कारण नहीं" है कि नई दिल्ली ने अपने रुख में कोई बदलाव किया है।

रूसी विदेश मंत्रालय का बयान

बुधवार को अपनी साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि भारत द्वारा रूसी हाइड्रोकार्बन की खरीद दोनों देशों के लिए फायदेमंद है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह व्यापार अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है।
जखारोवा ने कहा, "हमारे पास यह मानने का कोई कारण नहीं है कि भारत ने रूसी तेल खरीदने की अपनी स्थिति बदली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के दावों में कुछ भी नया नहीं है, जो स्वतंत्र देशों को डिक्टेट करने का अधिकार जता रहे हैं।"
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अमेरिका के क्या थे दावे?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब वाशिंगटन ने दावा किया कि नई दिल्ली रूसी कच्चे तेल के आयात को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है।

मार्को रुबियो का बयान: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पिछले हफ्ते कहा था कि भारत रूसी तेल खरीदना बंद करने के लिए सहमत हो गया है।

डोनाल्ड ट्रंप का दावा: फरवरी की शुरुआत में भारत के साथ एक व्यापार समझौते की घोषणा करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने भी दावा किया था कि भारत अब रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा। उन्होंने यह बात कई बार दोहराई।

ट्रेड डील और टैरिफ में कटौती

ये बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल ही में हुई फोन पर बातचीत के बाद आए हैं। इस बातचीत के बाद ट्रंप ने भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ को 50% से घटाकर 18% करने की घोषणा की थी। विशेष रूप से, ट्रंप ने पिछले साल अगस्त में रूसी तेल खरीदने के कारण भारत पर जो 25% का अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, उसे भी वापस ले लिया गया है।

भारत का रुख: 'राष्ट्रीय हित' सर्वोपरि

दिलचस्प बात यह है कि भारत ने अभी तक आधिकारिक तौर पर अमेरिका के इन दावों की न तो पुष्टि की है और न ही खंडन किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने हमेशा यह बरकरार रखा है कि ऊर्जा खरीद के फैसलों में "राष्ट्रीय हित" को ही प्राथमिकता दी जाएगी।

रूस का अमेरिका पर आरोप

रूस ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह टैरिफ, प्रतिबंध और सीधे रोक जैसे "दबावकारी" हथियारों का इस्तेमाल करके भारत और अन्य देशों को रूसी तेल खरीदने से रोकने की कोशिश कर रहा है। जखारोवा ने यूक्रेन के यूरोपीय सहयोगियों की भी आलोचना करते हुए कहा कि वे शांति समझौता करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।