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शहबाज शरीफ पीएम चुने जाने के बाद रविवार को पाकिस्तानी सदन को संबोधित करते हुए

मनी लॉन्ड्रिंग केस में शहबाज शरीफ को पेशी से छूट, जमानत बढ़ी

पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के अध्यक्ष शहबाज शरीफ को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में व्यक्तिगत पेशी से सोमवार को छूट मिल गई। उनकी अर्जी को विशेष अदालत लाहौर के केंद्रीय जज एजाज हसन अवान ने सोमवार को स्वीकार कर लिया। जांच एजेंसी के अधिकारी आज अदालत में भी पेश नहीं हुए।पीएमएल-एन नेता की ओर से प्रस्तुत आवेदन में आज के नेशनल असेंबली सत्र के कारण छूट की मांग की गई थी, जिसमें वह प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे और बाद में चुन भी लिए गए। 

अदालत ने कथित तौर पर 25 अरब रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शहबाज और उनके बेटे हमजा शहबाज को आरोपित करने के लिए 11 अप्रैल की तारीख तय की थी।

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खास बात ये है कि फेडरल जांच एजेंसी (एफआईए) की सरकारी टीम भी उक्त आवेदन पर बहस के लिए अदालत में पेश नहीं हुई। अदालत ने मामले को 27 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दिया और पीएमएल-एन नेताओं की अंतरिम जमानत बढ़ा दी।इससे पहले की कार्यवाही में अदालत ने शहबाज को अदालत के सामने व्यक्तिगत पेशी से छूट देने की एफआईए की याचिका को खारिज कर दिया था। उस समय अदालत ने शहबाज को व्यक्तिगत पेशी से छूट देने की अर्जी भी स्वीकार कर ली थी।  
गौरतलब है कि उस समय की अदालत ने एफआईए के उस आवेदन को भी खारिज कर दिया था जिसमें शहबाज की जमानत रद्द करने की मांग इस आधार पर की गई थी कि ऐसा कोई कानून प्रावधान उपलब्ध नहीं है जो किसी आरोपी को जमानत के स्तर पर अदालत से अनुपस्थित रहने की छूट देता हो।
जमानत रद्द करने का आवेदन एफआईए के प्रतिनिधियों ने एक विशेष केंद्रीय अदालत के जज के समक्ष एक आवेदन प्रस्तुत किया था जिसमें कहा गया था कि शहबाज कई बार इस अदालत से अनुपस्थित रहे। कभी उनकी बीमारी के कारण, कभी राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने के कारण, जो बिल्कुल उचित नहीं है। कानून सभी के लिए समान है। कानून का मजाक नहीं बनाया जाए।25 मार्च को, आरोपी अदालत से अनुपस्थित रहा, उसकी ओर से उपस्थिति के लिए आवेदन दिया गया था और इस अदालत ने जमानत की कार्यवाही में अभियुक्त की उपस्थिति से छूट देने की कृपा की थी।

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एफआईए ने अदालत से प्रार्थना की कि उक्त आदेश को वापस लिया जाए और जमानत खारिज की जाए। याचिकाकर्ता शहबाज और उनके बेटे हमजा ने अपनी गिरफ्तारी से पहले की जमानत में दलील दी थी कि एफआईए के बयान का वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है। उन्हें केवल उन्हें अपमानित करने के लिए एक जाली मामले में फंसाया गया था। उन पर लगाए गए आरोप काफी झूठे और गलत हैं।

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