निर्वासन में अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में शेख हसीना ने यूनुस को हत्यारा फासीवादी बताया। पढ़िए उन्होंने बांग्लादेश में चल रही हिंसा को लेकर किसको जिम्मेदार ठहराया।
मुहम्मद यूनुस और शेख हसीना
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भारत में निर्वासन में रहते हुए अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने यूनुस को 'खूनी फासीवादी' कहा और आरोप लगाया कि वह एक अवैध और हिंसक शासन चला रहे हैं। हसीना ने कहा कि बांग्लादेश अब आतंक, अराजकता और लोकतंत्र के निर्वासन के दौर में पहुंच गया है।
यह संबोधन दिल्ली के फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब में 'सेव डेमोक्रेसी इन बांग्लादेश' नाम के एक कार्यक्रम में ऑडियो मैसेज के ज़रिए दिया गया। हसीना खुद वहां मौजूद नहीं थीं, लेकिन उनका संदेश हॉल में मौजूद लोगों तक पहुंचा। कार्यक्रम में हसीना की अवामी लीग सरकार के कई पूर्व मंत्री और बांग्लादेशी प्रवासी शामिल थे।
हसीना ने कहा कि बांग्लादेश आज एक गहरे गड्ढे के किनारे खड़ा है। उन्होंने अपने पिता शेख़ मुजीबुर्रहमान और 1971 के स्वतंत्रता संग्राम की याद दिलाई। उनका कहना था कि देश अब एक बड़ा जेलखाना, फांसी का मैदान और मौत की घाटी बन गया है। उन्होंने चरमपंथी ताकतों और विदेशी हितों पर आरोप लगाया कि वे राष्ट्र को बर्बाद कर रहे हैं।
हसीना ने दावा किया कि 5 अगस्त 2024 को उन्हें एक सुनियोजित साजिश के तहत जबरन सत्ता से हटाया गया। उसके बाद से देश आतंक के युग में चला गया है। लोकतंत्र निर्वासित हो गया है। मानवाधिकार कुचल दिए गए हैं, प्रेस की आजादी खत्म हो गई है, महिलाओं और अल्पसंख्यकों पर हिंसा बिना रोक-टोक चल रही है। उन्होंने कहा, 'जीवन और संपत्ति की कोई सुरक्षा नहीं बची। कानून-व्यवस्था पूरी तरह ढह गई है। राजधानी से लेकर गांवों तक लूटपाट, जबरन वसूली और भीड़ द्वारा हिंसा हो रही है।'
मुहम्मद यूनुस को कोसा
हसीना का सबसे ज्यादा निशाना यूनुस पर था। हसीना ने उन्हें 'खूनी फासीवादी', 'सूदखोर', 'मनी लॉन्ड्रर' और 'सत्ता के भूखे गद्दार' कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि यूनुस राष्ट्र को खाली कर रहे हैं और विदेशी हितों के लिए देश की जमीन और संसाधन बेच रहे हैं। इससे बांग्लादेश को बहुराष्ट्रीय संघर्ष की आग में धकेला जा रहा है।
हसीना ने कहा, 'राष्ट्र के साथ गद्दारी करके खूनी फासीवादी यूनुस हमारी मातृभूमि को तबाही की ओर ले जा रहे हैं।' उन्होंने इसे देशद्रोही साजिश बताया जो संप्रभुता को खतरे में डाल रही है।
समर्थकों से एकजुट होने की अपील
यह संबोधन सिर्फ हमला नहीं था, बल्कि समर्थकों को एकजुट करने की अपील भी थी। हसीना ने लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और गैर-सांप्रदायिक ताकतों से एकजुट होने को कहा। उन्होंने शहीदों के खून से लिखे संविधान को बहाल करने की बात की। भाषण में 'जय बांग्ला' और 'जय बंगबंधु' के नारे लगे।
हसीना ने अवामी लीग को देश की सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण पार्टी बताया। उन्होंने कहा कि यह पार्टी बांग्लादेश की संस्कृति और लोकतंत्र से गहराई से जुड़ी है। उन्होंने वादा किया कि पार्टी लोगों की मदद से छीनी गई खुशहाल मातृभूमि को वापस लाएगी।हसीना क्या चाहती हैं?
- अवैध यूनुस प्रशासन को हटाना: लोकतंत्र बहाल करने और निष्पक्ष चुनाव के लिए यूनुस गिरोह का साया हटाना जरूरी है।
- सड़क पर रोज होने वाली हिंसा और अराजकता रोकना। स्थिरता के बिना अर्थव्यवस्था और सेवाएं नहीं चल सकतीं।
- धार्मिक अल्पसंख्यकों, महिलाओं और कमजोर वर्गों की सुरक्षा की गारंटी: लक्षित हमले बंद होने चाहिए ताकि हर नागरिक सुरक्षित महसूस करे।
- राजनीतिक बदले की कार्रवाई खत्म करना: पत्रकारों, अवामी लीग सदस्यों और विरोधियों को डराने-धमकाने के लिए कानून का दुरुपयोग बंद हो। न्यायपालिका में विश्वास बहाल हो।
- संयुक्त राष्ट्र से नई निष्पक्ष जांच: पिछले साल की घटनाओं की सच्चाई सामने आए ताकि देश मेल-मिलाप कर आगे बढ़ सके।
हसीना ने समर्थकों से कहा अंतरराष्ट्रीय समुदाय आपके साथ है। उन्होंने कहा कि अंतरिम सरकार लोगों की आवाज नहीं सुन रही। हम सब मिलकर मजबूत हैं और अपनी मांगें मनवा सकते हैं।
हसीना इसे सिर्फ सत्ता बदलाव नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों और चरमपंथ, अराजकता व विदेशी हस्तक्षेप के बीच की लड़ाई बता रही हैं। भारत में यह उनका पहला सार्वजनिक संबोधन था। इससे साफ है कि वे विदेश से ही बांग्लादेश की राजनीति को प्रभावित करना जारी रखेंगी। हसीना ने लोगों से कहा, 'अब हार मत मानो। उनसे लड़ो जो हमारा देश नष्ट करना चाहते हैं। मिलकर बांग्लादेश में लोकतंत्र बहाल करें।'