Trump Iran war latest news- ट्रंप ने ईरान पर फिर पैंतरा बदला। उन्होंने इंटरव्यू में कहा- मेरे सामने “बड़ा फैसला” आने वाला है और “कुछ भी हो सकता है।” सैन्य कार्रवाई की अस्पष्ट धमकी। होर्मुज समुद्री रास्ते में टैंकर पर हमला हुआ है।
मुजतबा खामेनेई और डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से जारी युद्ध अब एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान के खिलाफ अगला कदम तय करने के लिए एक “बड़ा फैसला” लेने वाले हैं। इसी बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में एक टोगो-झंडे वाले तेल टैंकर को निशाना बनाने का दावा किया है। टैंकर में आग लगने के बाद वह रुक गया।
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में जहाजों की आवाजाही पहले ही बेहद कम हो चुकी है और खाड़ी क्षेत्र से तेल की वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ रही है।
ट्रंप ने कहा- ‘बड़ा फैसला’ सामने है
डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया संस्था Axios को दिए इंटरव्यू में कहा कि वह ईरान युद्ध के अगले चरण को लेकर निर्णायक स्थिति में पहुंच रहे हैं।
ट्रंप के अनुसार, उनके सामने यह सवाल है कि क्या अमेरिका ईरान के खिलाफ फिर से बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू करे। उन्होंने कहा कि उनके सामने “एक बड़ा फैसला” आने वाला है और “कुछ भी हो सकता है।” ट्रंप ने ईरान के खिलाफ संभावित कार्रवाई को बेहद कठोर शब्दों में रखते हुए यह भी पूछा कि क्या वह ईरानी शासन को “पूरी तरह खत्म” करने के लिए आगे बढ़ें या नहीं। हालांकि, उन्होंने साथ ही यह संकेत दिया कि युद्ध समाप्त करने की संभावना भी बनी हुई है।कुछ दिन पहले ट्रंप ने कहा था- युद्ध खत्म होने के करीब
दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप के ताजा बयान से कुछ ही समय पहले उन्होंने कहा था कि ईरान के साथ युद्ध अपने अंतिम चरण में पहुंच सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि ईरान अमेरिका के साथ समझौता करना चाहता है और युद्ध के अंत की संभावना दिखाई दे रही है। लेकिन अब बड़े पैमाने पर सैन्य हमले दोबारा शुरू करने की संभावना पर उनका बयान सामने आया है। यानी अमेरिका की नीति में फिलहाल सैन्य दबाव और संभावित बातचीत—दोनों विकल्प खुले हुए हैं।अगले सप्ताह खाड़ी देशों के नेताओं से मिलेंगे ट्रंपः ट्रंप अगले सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान खाड़ी के छह देशों के नेताओं से मिलने वाले हैं। इनमें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान शामिल हैं। ट्रंप ने कहा है कि वह इन देशों के नेताओं से सीधे जानना चाहते हैं कि वे मौजूदा युद्ध और उसके संभावित अगले चरण को किस तरह देखते हैं। खाड़ी देशों के लिए यह युद्ध इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि संघर्ष ने तेल और गैस के बुनियादी ढांचे तथा समुद्री व्यापार मार्गों पर सीधा खतरा पैदा कर दिया है।
होर्मुज़ में तेल टैंकर पर ईरान का हमला
इसी बीच ईरान की IRGC नौसेना ने दावा किया कि उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में एक टोगो-ध्वज वाले तेल टैंकर को निशाना बनाया। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, टैंकर को उस समय निशाना बनाया गया जब वह ईरान द्वारा बताए गए एक “अवैध मार्ग” से होर्मुज़ पार करने की कोशिश कर रहा था। हमले के बाद जहाज में आग लग गई और वह रुक गया। ईरानी पक्ष ने जहाज के खिलाफ कार्रवाई को अपनी समुद्री निगरानी और होर्मुज़ में लागू किए गए नियमों का हिस्सा बताया है। कुछ ईरानी रिपोर्टों में टैंकर का नाम Trend बताया गया है।होर्मुज़ में जहाजों की आवाजाही बेहद कम
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में इस समय समुद्री यातायात पर युद्ध का सीधा असर दिखाई दे रहा है। Reuters के मुताबिक, बुधवार को केवल तीन वाणिज्यिक जहाज होर्मुज़ से गुजरे। इसके एक दिन पहले यह संख्या 12 थी और पिछले 10 दिनों का औसत करीब 17 जहाज प्रतिदिन था। AIS ट्रैकिंग सिस्टम बंद करके चलने वाले कुछ जहाज इन आंकड़ों में शामिल नहीं हो सकते, लेकिन फिर भी समुद्री यातायात में भारी गिरावट संघर्ष की गंभीरता को दिखाती है।दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए क्यों अहम है होर्मुज़?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा समुद्री मार्गों में से एक है। युद्ध से पहले वैश्विक तेल और LNG का करीब पांचवां हिस्सा इस जलमार्ग से होकर गुजरता था। इसलिए यहां जहाजों की आवाजाही में किसी भी बड़े व्यवधान का असर केवल ईरान और खाड़ी देशों पर नहीं, बल्कि एशिया, यूरोप और अमेरिका के ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है। अमेरिकी नौसेना इस जलमार्ग से जहाजों को सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रही है, जबकि ईरान का कहना है कि वह अमेरिकी नाकाबंदी हटाए जाने तक होर्मुज़ को अपने नियंत्रण में रखेगा।सऊदी अरब और हूती संघर्ष ने बढ़ाई चिंता
ईरान-अमेरिका तनाव के साथ-साथ यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच भी लड़ाई तेज हुई है। Reuters के अनुसार, गुरुवार को दोनों पक्षों के बीच सीमा पार हमले हुए। हूतियों के हमलों के बाद सऊदी अरब के पश्चिमी शहर ताइफ में मलबे की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत हुई। इससे तेल की आपूर्ति के लिए एक दूसरे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बाब-अल-मंदेब पर भी खतरा बढ़ गया है। यमन में हालिया लड़ाई के कारण एक लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं और कुछ लोग लाल सागर पार करके जिबूती की ओर भाग रहे हैं।सऊदी तेल पाइपलाइन पर भी असर
क्षेत्रीय संघर्ष का असर सऊदी अरब की तेल आपूर्ति व्यवस्था पर भी पड़ा है। सऊदी अरब की East-West Pipeline पर ड्रोन हमलों से तीन पंपिंग स्टेशन क्षतिग्रस्त हुए हैं। यह पाइपलाइन देश के पूर्वी तेल क्षेत्रों से कच्चा तेल लाल सागर के बंदरगाह यानबू तक पहुंचाती है। Reuters के मुताबिक, इसके लंबे समय तक बंद रहने से वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 4 प्रतिशत तक प्रभावित हो सकता है। सऊदी अरब वैकल्पिक तौर पर ओमान के सोहर बंदरगाह के पास ship-to-ship transfers के जरिए एशियाई ग्राहकों को तेल पहुंचाने की कोशिश कर रहा है।जून का समझौता भी टिक नहीं पाया
अमेरिका और ईरान के बीच जून में एक अंतरिम समझौता हुआ था, लेकिन कुछ ही सप्ताह में वह व्यवस्था टूट गई। उसके बाद दोनों देशों के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है। अब अगले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरान का मुद्दा फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में आने वाला है। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार ईरानी प्रतिनिधिमंडल को महासभा में भाग लेने की अनुमति होगी।अब दुनिया की नजर ट्रंप के अगले कदम पर
इस समय स्थिति कई स्तरों पर एक साथ बदल रही है—ट्रंप ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य हमले पर फैसला लेने की बात कर रहे हैं, ईरान होर्मुज़ में जहाजों की आवाजाही पर अपना नियंत्रण जताते हुए टैंकर पर कार्रवाई कर रहा है, जबकि सऊदी अरब और हूतियों के बीच संघर्ष ने लाल सागर के रास्ते को भी जोखिम में डाल दिया है। इसका सीधा असर तेल की कीमतों, वैश्विक शिपिंग, एशियाई ऊर्जा आयात और मध्य-पूर्व की सुरक्षा पर पड़ सकता है। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि ट्रंप अगले सप्ताह खाड़ी देशों के नेताओं से बातचीत के बाद ईरान पर सैन्य कार्रवाई बढ़ाते हैं या कूटनीतिक रास्ते को आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं।