डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर नए सैन्य हमले के संकेत दिए। कहा- अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार है, लेकिन पूरे ईरान को तबाह नहीं करना चाहते। कतर के जरिए ईरान ने अमेरिका को नया परमाणु प्रस्ताव भी भेजा है।
मुजतबा खामेनेई और डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर फिर से बड़े सैन्य हमले की संभावना से इनकार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार है और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई कर सकती है। हालांकि, ट्रंप ने यह भी कहा कि जहां तक संभव होगा ईरान के बाकी बचे हिस्से को तबाह नहीं करना चाहते।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार, 5 नवंबर को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान संकेत दिया कि अमेरिका ईरान के खिलाफ फिर से बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना किसी भी संभावित कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections) में उनकी रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है। चुनाव में पार्टी की हार के बाद ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप प्रशासन पर घरेलू राजनीतिक और आर्थिक दबाव भी बढ़ा है। इसके बावजूद ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपने आक्रामक रुख में नरमी के कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिए हैं।
'ईरान के खिलाफ कार्रवाई को अमेरिका पूरी तरह तैयार'
ट्रंप ने ओवल ऑफिस में पत्रकारों से कहा कि अमेरिकी सेना इस समय पहले से कहीं अधिक हथियार बना रही है। उन्होंने कहा, अमेरिकी सेना अभी जितने हथियार बना रही है, उतने पहले कभी नहीं बनाए गए। अगर हमें ईरान के मामले में आगे की कार्रवाई करनी पड़ी तो हम पूरी तरह तैयार हैं। ट्रंप ने इसके लिए 'लॉक्ड एंड लोडेड' (Locked and Loaded) शब्द का इस्तेमाल किया। सैन्य भाषा में इसका अर्थ है कि सेना कार्रवाई के लिए तैयार और हथियारों से लैस है। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान पर दोबारा हमला करने का विकल्प अभी खत्म नहीं हुआ है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि अमेरिका कब और किस तरह का सैन्य अभियान शुरू कर सकता है।'ईरान को दोबारा खड़ा होने में 25 साल लगेंगे'
ट्रंप ने ईरान के खिलाफ आगे की सैन्य कार्रवाई को लेकर कहा कि अमेरिका को यह फैसला करना होगा कि क्या वह अभियान को और आगे बढ़ाना चाहता है ताकि ईरान का परमाणु खतरा हमेशा के लिए खत्म किया जा सके। उन्होंने कहा कि अमेरिका को तय करना है कि क्या वह इस अभियान को अंतिम रूप देना चाहता है, ताकि ऐसा दोबारा कभी न हो सके। ट्रंप के मुताबिक, अगर ईरान को और नुकसान पहुंचाया गया तो उसे दोबारा अपने देश को खड़ा करने में करीब 25 साल लग सकते हैं। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने एक महत्वपूर्ण बात भी कही। ट्रंप ने कहा, 'अगर संभव हुआ तो मैं ईरान के बाकी बचे हिस्से को तबाह नहीं करना चाहूंगा, लेकिन शायद मुझे ऐसा करना पड़े। आपको इसका पता बहुत जल्द चल जाएगा।' उनके इस बयान से साफ है कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बड़े हमले की संभावना को अभी पूरी तरह खारिज नहीं किया है। साथ ही, ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि अंतिम फैसला अभी होना बाकी है।
मध्यावधि चुनाव में हार के बाद ईरान युद्ध पर दबाव
ट्रंप का यह बयान अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की करारी हार के बाद आया है। ईरान युद्ध और उसके कारण पैदा हुए आर्थिक संकट ने अमेरिकी मतदाताओं के बीच ट्रंप प्रशासन की मुश्किलें बढ़ाई हैं। अमेरिका में ईंधन की ऊंची कीमतें और युद्ध का आर्थिक असर चुनाव के दौरान बड़े मुद्दे रहे। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने रिपब्लिकन पार्टी की चुनावी हार के लिए ईरान युद्ध और उसके आर्थिक प्रभाव को प्रमुख कारणों में गिनाया था।ट्रंप ने वेंस की बात से आंशिक सहमति जताई। हालांकि, उन्होंने युद्ध शुरू करने के अपने फैसले का बचाव किया। ट्रंप ने कहा कि अगर उन्हें दोबारा वही फैसला लेने का मौका मिलता तो वह फिर से ऐसा ही करते। इस तरह ट्रंप ने एक तरफ युद्ध के राजनीतिक और आर्थिक नुकसान को स्वीकार किया, लेकिन दूसरी तरफ सैन्य अभियान को गलत मानने से इनकार कर दिया।
ईरान ने अमेरिका को भेजा परमाणु कार्यक्रम पर नया प्रस्ताव
एक तरफ ट्रंप ईरान पर संभावित हमले की धमकी दे रहे हैं, दूसरी तरफ दोनों देशों के बीच युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीतिक बातचीत भी जारी है। रॉयटर्स की 5 नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका को एक नया प्रस्ताव भेजा है। यह प्रस्ताव मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया है। रिपोर्ट में इस मामले से परिचित दो लोगों के हवाले से बताया गया है कि ईरान ने परमाणु कार्यक्रम से संबंधित प्रस्ताव को व्यापक शांति समझौते की शर्तों से अलग भेजा है। इस प्रस्ताव का आगे बढ़ना शांति समझौते की बाकी सात शर्तों की स्वीकार्यता पर निर्भर करेगा।ईरान का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच बातचीत तेज हुई है। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले ऐसी खबरें आई थीं कि चुनाव खत्म होने के बाद अमेरिका ईरान पर बड़ा हमला कर सकता है। इन खबरों में यह भी दावा किया गया था कि इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिका पर हमले के लिए दबाव बना रहे हैं।
परमाणु प्रस्ताव पर ट्रंप ने क्या कहा?
गुरुवार को पत्रकारों ने ट्रंप से रॉयटर्स की उस रिपोर्ट के बारे में सवाल किया जिसमें ईरान के परमाणु प्रस्ताव भेजने की बात कही गई थी।
इस पर ट्रंप ने कहा कि ईरान अमेरिका की मंजूरी के बिना कुछ नहीं कर रहा है। हालांकि, उन्होंने ईरान के प्रस्ताव की शर्तों, उसकी स्वीकार्यता या अमेरिका के संभावित जवाब के बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया। इससे स्पष्ट है कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता खुला हुआ है, लेकिन किसी समझौते पर पहुंचने की स्थिति अभी साफ नहीं है।क्या फिर शुरू होगा अमेरिका-ईरान युद्ध?
अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा संकट में अब दो संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। पहली, दोनों देश कूटनीतिक बातचीत के जरिए युद्ध खत्म करने का रास्ता निकालें। दूसरी, बातचीत विफल होने की स्थिति में अमेरिका फिर से बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू कर दे।
ट्रंप के ताजा बयान ने दूसरी संभावना को भी जिंदा रखा है। एक ओर वह ईरान के बाकी हिस्से को तबाह नहीं करना चाहते, दूसरी ओर उनका कहना है कि जरूरत पड़ी तो अमेरिका पीछे नहीं हटेगा।ईरान का नया परमाणु प्रस्ताव और अमेरिका का अगला फैसला आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति तय कर सकता है। इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि ट्रंप कूटनीतिक समझौते को प्राथमिकता देंगे या ईरान के खिलाफ युद्ध को एक नए और अधिक विनाशकारी चरण में ले जाएंगे।