यूएस राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को लेकर फिर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि या तो उसे पूरी तरह नष्ट कर दिया जाए या फिर उससे समझौता कर लिया जाए। इस बयान के बीच तेल की कीमतें उछल गई हैं। जानिए ट्रंप के बयान के क्या मायने हैंः
डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान के साथ संभावित समझौते को लेकर संदेह जताया और कहा कि तेहरान की ओर से भेजे गए प्रस्तावों से वे “खुश” नहीं हैं। क्योंकि बातचीत लगातार खिंचती जा रही है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्हें यह “नहीं लगता” है कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता हो पाएगा।
उन्होंने कहा, “हमारी अभी ईरान के साथ बातचीत हुई है। देखते हैं क्या होता है, लेकिन मैं कहूंगा कि मैं खुश नहीं हूं... उन्हें सही तरह का समझौता लेकर आना होगा। इस वक्त वे जो पेशकश कर रहे हैं, उससे मैं संतुष्ट नहीं हूं।” ट्रंप ने कहा, “हम इस समय बातचीत के लिहाज से हर संभव कोशिश कर रहे हैं, टेलीफोन के जरिए भी। कुछ प्रगति जरूर हुई है, लेकिन मुझे नहीं पता कि वे कभी मंज़िल तक पहुंच पाएंगे या नहीं।”
ट्रंप ने ईरान के मुद्दे पर दो विकल्प भी सामने रखे- “या तो उन्हें पूरी तरह तबाह कर दिया जाए या फिर समझौता किया जाए।” उन्होंने कहा,
“विकल्प मौजूद हैं। क्या हम जाकर उन्हें पूरी तरह खत्म कर दें, या फिर समझौता करने की कोशिश करें?... मानवीय आधार पर मैं समझौते को प्राथमिकता दूंगा।”
ट्रंप ने यह भी दोहराया कि ईरान के साथ युद्ध खत्म होने पर तेल और गैस की कीमतों में गिरावट आएगी। जब उनसे पूछा गया कि क्या वे ईरान पर नए हमलों पर विचार कर रहे हैं, तो उन्होंने उल्टा सवाल करते हुए कहा, “मैं आपको यह क्यों बताऊं?”
ईरान का नया प्रस्ताव
ईरान ने दो महीने से जारी युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका को एक नया प्रस्ताव सौंपा है। समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब फारस की खाड़ी में स्थित दुनिया के अहम समुद्री मार्ग होर्मुज पेट्रोलियम व्यापार के लिए बंद पड़ा है। यह नया प्रस्ताव उस समय सामने आया है जब ट्रंप दावा कर रहे थे कि ईरान समझौता करने के लिए बेताब है, क्योंकि वॉशिंगटन द्वारा लगाए गए “आर्थिक हमले” (Economic Fury) के कारण उसकी अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में है।हालांकि, ईरान के इस नए प्रस्ताव के विवरण फौरन उपलब्ध नहीं हो सके हैं। इससे पहले, तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और युद्ध समाप्त करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत को बाद के लिए टालना चाहता था।
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया और वार्ताकारों से कहा कि मसौदे में परमाणु मुद्दे को फिर से शामिल किया जाए।
अमेरिकी मीडिया Axios की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित संशोधनों में यह मांग भी शामिल थी कि ईरान यह वचन दे कि वह अपने बमबारी किए गए परमाणु स्थलों से संवर्धित यूरेनियम बाहर नहीं ले जाएगा और बातचीत जारी रहने तक उन स्थलों पर कोई गतिविधि फिर से शुरू नहीं करेगा।
व्हाइट हाउस का रुख
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अन्ना केली ने Fox News डिजिटल से बातचीत में कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता, और अमेरिका की अल्पकालिक और दीर्घकालिक राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बातचीत जारी है।” उन्होंने यह टिप्पणी उस रिपोर्ट के जवाब में की, जिसमें कहा गया था कि ईरान ने अमेरिका के साथ संघर्ष समाप्त करने के लिए अपनी नई वार्ता योजना पाकिस्तान को भी सौंपी है। केली ने कहा, “हम निजी कूटनीतिक बातचीत का विवरण सार्वजनिक नहीं करते।”युद्ध और तेल बाजार पर असर
ईरान ने 28 फरवरी को अमेरिका-इसराइल युद्ध शुरू होने के तुरंत बाद होर्मुज को प्रभावी रूप से बंद कर दिया था। 8 अप्रैल को युद्धविराम की घोषणा के बाद भी अमेरिका ने इस मार्ग से ईरान के लिए आने-जाने वाले जहाजों पर रोक लगा दी। इस तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ा। गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 114.70 डॉलर प्रति बैरल के युद्धकालीन उच्च स्तर तक पहुंच गईं। बाद में यह गिरकर 107 डॉलर तक आईं और अंततः 110.40 डॉलर प्रति बैरल पर स्थिर हो गईं।