ईरान के साथ बातचीत नाकाम होने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज की आज से नाकाबंदी की घोषणा की। आईआरजीसी ने जवाबी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी देते हुए इसे दुश्मन जहाजों के लिए "घातक भंवर" बताया। पेजेश्कियन ने पुतिन को फोन किया है।
ट्रंप की होर्मुज पर फिर धमकी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार 13 अप्रैल को कहा कि पाकिस्तान में हुए संघर्ष विराम बातचीत के नाकाम होने के बाद ईरान अमेरिका के साथ बातचीत में लौटेगा या नहीं, इस बात से उन्हें कोई चिंता नहीं है। फ्लोरिडा से लौटने के बाद मैरीलैंड के जॉइंट बेस एंड्रयूज में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, "मुझे परवाह नहीं कि वे लौटें या न लौटें। अगर वे नहीं लौटते हैं, तो भी मुझे कोई आपत्ति नहीं है।" राष्ट्रपति ने कहा कि इस्लामाबाद में उपराष्ट्रपति जेडी वैंस के नेतृत्व में हुई बातचीत के दौरान ईरान ने परमाणु हथियार हासिल करने की इच्छा जताई थी। उन्होंने जोर देकर कहा, "वे अब भी परमाणु हथियार चाहते हैं, और उन्होंने पिछली रात यह स्पष्ट कर दिया। लेकिन मेरा कहना है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे।" यूएस ने आज 13 अप्रैल से होर्मुज के नाकाबंदी की घोषणा की है।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत के नाकाम होने के बाद 13 अप्रैल से होर्मुज जलडमरूमध्य के रिवर्स ब्लॉकेड (उल्टी नाकाबंदी) की घोषणा की थी। अमेरिका ईरान के कच्चे तेल निर्यात को रोकने की जबरदस्त कोशिश में जुटा है। इसके जवाब में ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने सैन्य हमले की चेतावनी दी है।
सेपेह न्यूज (रिवोल्यूशनरी गार्ड से संबद्ध मीडिया आउटलेट) के अनुसार, रिवोल्यूशनरी गार्ड के नौसेना कमांड ने कहा कि “होर्मुज जलडमरूमध्य से सभी जहाजों का गुजरना ईरानी सैन्य अधिकारियों के पूर्ण नियंत्रण में है।” उसने कहा- “अगर दुश्मन एक भी गलत कदम उठाता है, तो जलडमरूमध्य उनके लिए घातक भंवर (deadly vortex) बन जाएगा, जो उन्हें निगल लेगा।” उल्लेखनीय है कि रिवोल्यूशनरी गार्ड ने इस चेतावनी संदेश के साथ एक वीडियो भी पोस्ट किया, जिसमें समुद्र में जहाजों को स्कोप के क्रॉसहेयर (निशाने) के माध्यम से दिखाया गया था। इसमें दावा किया गया कि उनके पास वास्तविक हमला करने की क्षमता है।
इसे अमेरिकी और उसके सहयोगी देशों के जहाजों के लिए धमकी के रूप में देखा गया कि यदि वे जलडमरूमध्य से गुजरते हैं तो वे किसी भी समय हमले का निशाना बन सकते हैं। इससे पहले ट्रंप ने कहा था, “दुनिया की सबसे मजबूत अमेरिकी नौसेना सभी जहाजों के लिए जो होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश कर रहे हैं या बाहर निकल रहे हैं, तुरंत नाकाबंदी की प्रक्रिया शुरू कर देगी।”
ईरान का पुतिन को फोन
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स न्यूज के अनुसार, राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बातचीत के दौरान अमेरिका के साथ हुई बातचीत की स्थिति बताई। पेजेश्कियान ने कहा, “अमेरिका के साथ निष्पक्ष समझौते तक पहुंचने में सबसे बड़ी बाधा अमेरिका का दोहरा मापदंड और प्रभुत्ववादी रवैया है।” पेजेश्कियान ने कहा, “ईरान क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले संतुलित और निष्पक्ष समझौते तक पहुंचने के लिए पूरी तरह तैयार है। अगर अमेरिका अंतरराष्ट्रीय कानून के ढांचे का पालन करता है, तो समझौता पहुंचना बिल्कुल भी असंभव नहीं है।”
ईरान की संसद के डिप्टी स्पीकर हाजी बाबई ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य “पूरी तरह” ईरान के नियंत्रण में है। मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक डिप्टी स्पीकर ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को टोल (दस्तूरी) चुकाना होगा, जो ईरान की मुद्रा रियाल में भुगतान किया जाना चाहिए। संसद के 250 सदस्यों ने होर्मुज जलडमरूमध्य योजना का आमराय से समर्थन किया है। यह महत्वपूर्ण जलमार्ग किसी भी स्थिति में non-negotiable (कोई समझौता नहीं) है।”
डिप्टी स्पीकर बाबई ने कहा- “प्रतिबंधों के बावजूद, ईरान का तेल निर्यात 16 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक हो चुका हैं, और आज हमारे देश का तेल व्यावहारिक रूप से प्रतिबंध-मुक्त हो गया है। ईरानी राष्ट्र अपनी माँगों से एक इंच भी पीछे नहीं हटेगा।”
ईरान ने अमेरिकी दावे पर वीडियो जारी किया
हालाँकि, ईरान पक्ष ने इसका मजबूती से खंडन किया। ईरान के अनुसार, आईआरजीसी नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश कर चुके एक अमेरिकी मिसाइल विध्वंसक पोत को सीधे चेतावनी जारी करते हुए उसे तुरंत अपना मार्ग बदलने का आदेश दिया था। वीडियो क्लिप में एक आईआरजीसी सैनिक को यह कहते हुए सुना जा सकता है, "नौसेना युद्धपोत 121। यह सेपाह (आईआरजीसी) नौसेना स्टेशन है। आपको तुरंत अपना मार्ग बदलकर हिंद महासागर में वापस जाना होगा। यदि आप मेरे आदेश का पालन नहीं करते हैं, तो आप पर हमला किया जाएगा।"
ईरान द्वारा साझा किए गए ऑडियो में, अमेरिकी पोत को दृढ़तापूर्वक लेकिन सतर्कता से जवाब देते हुए सुना जा सकता है, जिसमें कहा गया है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में रहकर काम कर रहा है। अमेरिकी सैनिक ने कहा, "हम अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन कर रहे हैं। आपको चुनौती देने का मेरा कोई इरादा नहीं है, और मैं हमारी सरकार के युद्धविराम नियमों का पालन करने का इरादा रखते हैं।" अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक बयान में कहा कि दोनों जहाज USS फ्रैंक ई. पीटरसन जूनियर और USS माइकल मर्फी ईरान द्वारा पानी में बिछाए गए नौसेना माइन्स का पता लगाने और उन्हें हटाने की तैयारी में होर्मुज जलडमरूमध्य से होते हुए फारस की खाड़ी में प्रवेश कर गए।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों इतना महत्वपूर्ण है?
सीजफायर बातचीत में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण की माँग की है और कहा है कि इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से ट्रांजिट फीस वसूली जाएगी। यह महत्वपूर्ण जलमार्ग प्रतिदिन वैश्विक तेल और गैस परिवहन का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है। यह ईरान और ओमान के बीच स्थित है और सऊदी अरब, इराक, कतर तथा संयुक्त अरब अमीरात जैसे उत्पादकों से तेल के परिवहन की सुविधा प्रदान करता है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को घोषणा की कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करने या बाहर निकलने वाले जहाजों को रोकने के लिए “तुरंत” ब्लॉकेड शुरू कर देगी।