होर्मुज में जिस तरह के टोल टैक्स लगाने की बात ईरान करता रहा है, अब उसकी चेतावनी ट्रंप ने दी है। ट्रंप ने इसे मिडिल ईस्ट देशों के लिए अमेरिकी सुरक्षा का खर्च बताया है। इधर, लेबनान पर इसराइली हमले को लेकर होर्मुज में आवाजाही पर ऊहापोह की स्थिति है।
मुजतबा खामेनेई और डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान के साथ युद्ध ख़त्म करने के लिए 60 दिनों में अंतिम समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलेगा।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया साइट ट्रुथ सोशल पर लिखा, '60 दिनों के संघर्ष विराम के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई टोल नहीं लगेगा। लेकिन 60 दिन बाद भी तब तक कोई टोल नहीं होगा, जब तक कि अमेरिका द्वारा टोल न लगाया जाए।' उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि यदि अंतिम सौदा पूरा नहीं हुआ तो अमेरिका टोल वसूलेगा। ट्रंप ने आगे लिखा कि यह टोल मध्य पूर्व के देशों के लिए गार्जियन एंजेल बनने की सेवाओं के बदले में वसूला जाएगा। उन्होंने कहा कि यह पिछले, मौजूदा और भविष्य के खर्चों की भरपाई के लिए होगा।
ईरान के 'सर्विस फीस' का जवाब?
ट्रंप की यह धमकी तब आई है जब ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से लगातार होर्मुज स्ट्रेट में टोल यानी 'सर्विस फीस' लगाने की बात करता रहा है। वह ऐसा इसलिए करता रहा है क्योंकि यह उसके लिए रणनीतिक, आर्थिक और राजनीतिक हथियार बन गया है।2026 में अमेरिका-इसराइल हमलों के बाद ईरान को भारी नुकसान हुआ। वह टोल को 'युद्ध लागत' की भरपाई और सड़कें, अस्पताल, आदि इंफ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत के लिए इस्तेमाल करने का हवाला देता है। ईरानी सांसदों ने हाल ही में कहा था कि 'युद्ध क़ीमत मांगता है और स्वभाविक है कि हमें ट्रांजिट फीस लेनी चाहिए।'
ईरान पर लंबे समय से प्रतिबंध हैं। होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से टोल या फीस वसूलने से सालाना 70-100 बिलियन डॉलर तक की कमाई का अनुमान लगाया जा रहा था। इसे प्रतिबंधों को बायपास करने और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का तरीका माना गया।
सुरक्षा और सेवा का दावा
ईरान कहता है कि वह स्ट्रेट की सुरक्षा, नेविगेशन, पर्यावरण संरक्षण और अन्य सेवाएं देता है, इसलिए फीस वाजिब है। वह स्वेज नहर और पनामा नहर से इसकी तुलना करता है। हालाँकि दोनों की स्थिति अलग है। अंतरराष्ट्रीय कानून मानव-निर्मित नहर और प्राकृतिक होर्मुज स्ट्रेट के बीच अंतर करता है। यही कारण है कि ईरान टोल की बजाय 'सर्विस फीस' शब्द इस्तेमाल करता है।अब्बास अरागची होर्मुज स्ट्रेट पर क्या बोले?
होर्मुज के हालात क्या?
फिलहाल, होर्मुज में ऊहापोह की स्थिति है। जैसा कि अमेरिका और ईरान से दावे-प्रति दावे आ रहे हैं, उससे लगता है कि होर्मुज न तो अभी पूरी तरह खुला है, और न ही पूरी तरह बंद। यह आंशिक रूप से खुला है। ईरानी सेना आईआरजीसी ने इसराइल के लेबनान में हमले को अमेरिका के साथ MoU के उल्लंघन का हवाला देते हुए 20 जून को फिर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने का ऐलान कर दिया। उन्होंने जहाजों को आगे बढ़ने से मना किया है। लेकिन US सेंट्रल कमांड ने ईरान के दावे को खारिज किया है और कहा कि शिपिंग सामान्य रूप से चल रही है। इसने दावा किया कि 20 जून को 55 से ज़्यादा कमर्शियल जहाज गुजरे, जिनमें 17 मिलियन बैरल से ज्यादा तेल था।
होर्मुज में मुख्य मार्ग की स्थिति
होर्मुज का सेंट्रल रूट अभी भी खतरनाक है। करीब 80 माइन्स हैं, जिन्हें साफ करने में समय लगेगा। इससे सामान्य ट्रैफिक अभी संभव नहीं है। इस वजह से जहाज आल्टरनेट रूट्स यानी ईरानी या ओमानी तट के करीब से गुजर रहे हैं, लेकिन क्षमता कम है, जोखिम है और ट्रैफिक बहुत कम है। पिछले कुछ दिनों में 20-25 जहाज प्रति दिन गुजरे, जबकि सामान्य स्तर 100-120 जहाज प्रति दिन का है। सैकड़ों जहाज अभी भी अटके हुए हैं।
होर्मुज में इन अलग-अलग दावों और ट्रंप के इस ताज़ा बयान के कुछ घंटे बाद ईरान की सेना के खतम अल-अंबिया मुख्यालय ने कहा कि वह जलडमरूमध्य को फिर से बंद कर देगा।
ईरान ने आरोप लगाया कि लेबनान में इसराइल अभी भी हमले कर रहा है, जबकि सीजफायर हो चुका है। साथ ही उसने अमेरिका पर भी आरोप लगाया कि वह अमेरिका-ईरान सीजफायर समझौते के पहले हिस्से का सम्मान नहीं कर रहा है। ईरान की सरकारी प्रसारक IRIB ने इस बयान को प्रसारित किया। वहीं अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के दावे को खारिज कर दिया, हालांकि उसने ज्यादा डिटेल नहीं दी।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर के बाद एक MoU हुआ था। इसमें यह साफ नहीं किया गया था कि लंबे समय तक होर्मुज पर नियंत्रण किसके पास रहेगा। वर्तमान व्यवस्था के तहत 60 दिनों तक जहाज बिना टोल दिए आ-जा सकते हैं, जबकि ईरान और उसके खाड़ी पड़ोसी देश लंबे समय का फोर्मूला तय करने की कोशिश कर रहे हैं। अगर 60 दिन बाद कोई स्थायी समझौता नहीं होता है, तो ईरान खुद टोल लगा सकता है। ट्रंप अब कह रहे हैं कि इस स्थिति में अमेरिका टोल लगाएगा। ट्रंप ने इस हफ्ते पहले भी कहा था कि जलडमरूमध्य पहले 60 दिनों और उसके बाद भी टोल-फ्री रहेगा, लेकिन शनिवार का उनका बयान इससे थोड़ा अलग है।
जेडी वेंस का बयान
उप-राष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने शनिवार सुबह फॉक्स न्यूज को बताया कि जलडमरूमध्य को फिर से खोलना उनकी प्राथमिकता थी और अब यह हो गया है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 24 घंटों में रिकॉर्ड 1.6 करोड़ बैरल तेल इस रास्ते से गुजरा। लेकिन ईरान के बंद करने की घोषणा के बाद स्थिति अभी भी अस्थिर दिख रही है।
जेनेवा में शुरू होगी बातचीत
अमेरिकी और ईरानी अधिकारी रविवार से जेनेवा में तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू करेंगे। अमेरिकी टीम में जे.डी. वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुश्नर शामिल हैं। दोनों पक्षों के पास ईरान के परमाणु कार्यक्रम समेत दूसरे मुद्दों पर 60 दिनों में समझौता करने का समय है।
होर्मुज अहम क्यों?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है। यहां से दुनिया का बहुत बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है। अगर यहां टोल लगता है या रास्ता बंद होता है, तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और व्यापार प्रभावित हो सकता है। ट्रंप का यह बयान ईरान के साथ चल रही नाजुक बातचीत के बीच आया है, जिसमें अभी भी कई बड़े मुद्दे सुलझने बाकी हैं। स्थिति तेजी से बदल रही है और अगले कुछ दिनों में जेनेवा की बैठकें अहम साबित हो सकती हैं।