अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए बनाए गए नए कानून के कई प्रावधानों पर छूट देकर अपनी ही नीति में बड़ा बदलाव किया है। ट्रंप प्रशासन का यह कदम अमेरिका में डीजल की बढ़ती कीमतों, 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों और रूस से ईंधन की आपूर्ति के मुद्दे से जुड़ा है। इस समय अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत में हैं। 
इस फैसले का भारत पर भी असर पड़ सकता है। जिस कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति को दिया गया था, उसी कानून के कुछ प्रावधानों को अब राष्ट्रीय हित का हवाला देकर लागू करने से छूट दी गई है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि रूस से ऊर्जा खरीदने वाले सभी देशों पर टैरिफ लगाने की संभावना हमेशा के लिए खत्म हो गई है।

ट्रंप ने ग्रैहम एक्ट के कई प्रावधानों पर लगाई रोक

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने 17 अक्टूबर को जारी कार्यकारी आदेश में लिंडसे ओ. ग्रैहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट, 2026 के कई प्रावधानों को छूट देने का फैसला किया। इस कानून पर सितंबर 2026 में हस्ताक्षर किए गए थे। इसका उद्देश्य यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की आर्थिक कमाई, खासकर ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों से होने वाली आय, पर दबाव डालना था। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने कानून की धारा 115 के तहत राष्ट्रपति को मिले अधिकार का इस्तेमाल किया। यह प्रावधान राष्ट्रपति को अमेरिका के राष्ट्रीय हित में कुछ प्रतिबंधों, व्यक्तियों पर लागू पाबंदियों और आयात शुल्कों से छूट देने की अनुमति देता है। ट्रंप ने कहा कि इस फैसले के समर्थन में जरूरी प्रमाणपत्र और कारण बताने वाली रिपोर्ट कांग्रेस को भेज दी गई है।
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कार्यकारी आदेश के तहत कानून की धारा 112 और 113 के तहत निर्धारित शुल्कों तथा धारा 102(d) के तहत आने वाले प्रतिबंधों और पाबंदियों पर छूट दी गई है। आदेश में विदेशी व्यक्तियों पर प्रतिबंधों और कुछ अन्य प्रावधानों को भी शामिल किया गया है। ये छूट तब तक प्रभावी रहेंगी, जब तक ट्रंप या विदेश मंत्री संबंधित अधिकारियों से परामर्श के बाद आगे की कार्रवाई जरूरी नहीं समझते।

पुतिन से बातचीत के बाद रूस से डीजल खरीदने का फैसला

ट्रंप का यह कदम रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के बाद रूस से डीजल खरीदने की घोषणा के बाद आया है। ट्रंप ने इस बातचीत को बेहद सफल बताया था। उनके मुताबिक, रूस तत्काल 3 लाख टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा। इसके बाद नवंबर और अगले महीनों में अतिरिक्त खेप भेजने की योजना है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका के नियंत्रण और रूस से ऊर्जा आपूर्ति की नई व्यवस्था के कारण अमेरिका सहित दुनिया भर में डीजल की कीमतें तेजी से गिरेंगी।

अमेरिकी चुनाव से पहले डीजल की महंगाई बड़ी चुनौती

अमेरिका में ईंधन की बढ़ती कीमतें ट्रंप प्रशासन के लिए राजनीतिक चुनौती बन गई हैं। 3 नवंबर 2026 को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर कारोबारियों, परिवहन क्षेत्र और आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, सितंबर में डीजल की कीमत 6.52 डॉलर प्रति गैलन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। 16 अक्टूबर, शुक्रवार को यह करीब 6.28 डॉलर प्रति गैलन थी। ऐसे में रूस से डीजल खरीदने का फैसला घरेलू ईंधन लागत घटाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रावधान क्या था?

इस पूरे घटनाक्रम का भारत के लिए विशेष महत्व है। ग्रैहम एक्ट ने अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार दिया था। भारत और चीन जैसे बड़े रूसी ऊर्जा खरीदार इस प्रावधान के दायरे में आ सकते थे।

भारत के लिए इसके क्या मायने हैं?

इस घटनाक्रम के तीन बड़े निहितार्थ हैं।
  • टैरिफ का तत्काल दबाव कम हो सकता है: कानून के कुछ प्रावधानों पर छूट से भारत पर संभावित अमेरिकी आर्थिक दबाव के आकलन में बदलाव आ सकता है। हालांकि, भविष्य में टैरिफ लगाने का विकल्प पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
  • ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भारत की दलील मजबूत होती है: यदि अमेरिका घरेलू कीमतें कम करने के लिए रूस से ईंधन खरीद सकता है, तो भारत के लिए भी अपनी ऊर्जा जरूरतों और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के आधार पर फैसले लेने का तर्क महत्वपूर्ण बना रहता है।
  • अमेरिका-भारत संबंधों की दिशा पर नजर रहेगी: भारत के रूसी तेल आयात और अमेरिका की टैरिफ नीति के बीच संतुलन दोनों देशों के व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों के लिए अहम बना रहेगा।
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अमेरिका की रूस नीति पर उठे सवाल

ग्रैहम एक्ट को अमेरिकी कांग्रेस में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक, दोनों दलों के व्यापक समर्थन से मंजूरी मिली थी। इस कानून का नाम दक्षिण कैरोलाइना के सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया था। इसका लक्ष्य रूस के ऊर्जा और रक्षा उद्योगों तथा प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले उसके तथाकथित शैडो फ्लीट टैंकर नेटवर्क पर दबाव बढ़ाना था। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी इस कानून का समर्थन किया था।
  • लेकिन अब रूस से डीजल खरीदने और प्रतिबंधों में छूट देने के फैसले से अमेरिकी नीति में विरोधाभास दिखाई देता है। एक ओर वॉशिंगटन रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने की संभावना बनाए रखता है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका खुद रूस से डीजल खरीदने की व्यवस्था कर रहा है।
ट्रंप का फैसला रूस के खिलाफ आर्थिक दबाव की नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। अमेरिका में डीजल की बढ़ती कीमतें और मध्यावधि चुनाव इसकी तात्कालिक पृष्ठभूमि हैं। भारत के लिए यह घटनाक्रम संभावित टैरिफ जोखिम और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे अमेरिकी प्रतिबंध नीति की स्थायी समाप्ति नहीं माना जाना चाहिए।