डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी जारी करते हुए परमाणु समझौते पर सहमति न बनने की स्थिति में बड़े पैमाने पर सैन्य हमले की धमकी दी है। ईरान ने कहा है कि वो भी उतना ही सख्त जवाब देगा। सवाल है कि इन हालात में क्या युद्ध संभव हैः
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच एक बार फिर आक्रामक रुख अपनाते हुए सीधी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि ईरान या तो परमाणु कार्यक्रम पर "समझौता करे" या फिर उसे पहले से कहीं अधिक भीषण सैन्य हमले का सामना करना होगा।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट करते हुए कहा, "एक विशाल नौसैनिक बेड़ा (Armada) ईरान की ओर बढ़ रहा है। यह बहुत तेज़ी और पूरी शक्ति के साथ आगे बढ़ रहा है।" उन्होंने ईरान से आग्रह किया कि वह जल्द से जल्द मेज पर आए और एक ऐसा समझौता करे जिसमें परमाणु हथियारों की कोई जगह न हो। ट्रंप ने चेतावनी दी कि समय तेज़ी से निकल रहा है। ट्रंप ने बार-बार संकेत दिया है कि वह इस महीने तेहरान द्वारा सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर की गई कार्रवाई के जवाब में सैन्य कार्रवाई का आदेश देने पर विचार कर रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है।
ईरान की प्रतिक्रिया: ईरान ने ट्रंप की इस धमकी को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि "धमकियों के माहौल में कोई बातचीत नहीं हो सकती।" ईरानी सशस्त्र बलों के प्रमुखों ने कहा है कि उनके हाथ "ट्रिगर पर हैं" और यदि अमेरिका ने कोई हिमाकत की, तो ईरान ऐसा पलटवार करेगा जैसा पहले कभी नहीं देखा गया। ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि ईरान ने पिछले साल जून में इसराइल द्वारा देश पर किए गए कई दिनों के सैन्य हमले से "अत्यंत महत्वपूर्ण सबक" सीखे हैं, जिसके बाद ट्रंप प्रशासन ने ईरानी परमाणु स्थलों पर अपने हमले भी किए थे। ईरानी विदेश मंत्री ने कहा, "12-दिवसीय युद्ध से मिले महत्वपूर्ण सबक ने हमें और भी अधिक मजबूती से, तेजी से और प्रभावी ढंग से जवाब देने में सक्षम बनाया है।" अराघची की ये टिप्पणियां ट्रंप द्वारा ईरान पर सैन्य हमले की धमकी को दोहराने के कुछ ही घंटों बाद आई हैं। ईरान पर हाल ही में सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर की गई कार्रवाई को लेकर वाशिंगटन की ओर से लगातार दबाव बढ़ रहा है।
ईरान में जब प्रदर्शन शांत हो गए तो ट्रंप ने कहा कि ईरान ने प्रदर्शनकारियों पर अब बल प्रयोग या फांसी न देने का वादा किया है, इसलिए अब हमला नहीं होगा। लेकिन कुछ दिन बाद दोनों तरफ से बयानबाज़ी होने लगी। इस हफ्ते ट्रंप प्रशासन ने यूएसएस अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत को क्षेत्र में तैनात कर दिया। इसके बाद मिडिल ईस्ट में तनाव फिर से भड़क उठा, जिससे सैन्य टकराव की आशंका बढ़ गई।
क्या मौजूदा हालात में ईरान-अमेरिका युद्ध संभव है?
1. ट्रंप की 'मैक्सिमम प्रेशर' रणनीति: डोनाल्ड ट्रंप अपनी पुरानी नीति पर वापस लौट आए हैं, जहाँ वे सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करके दुश्मन को समझौते के लिए मजबूर करते हैं। एक विशाल बेड़े (Armada) का भेजा जाना युद्ध की शुरुआत से ज्यादा एक मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति लगती है। ट्रंप का मुख्य उद्देश्य ईरान को बिना किसी शर्त के एक नए परमाणु समझौते के लिए मेज पर लाना है।
2. जून 2025 का संदर्भ (ऑपरेशन मिडनाइट हैमर): पिछले साल (जून 2025) में हुए अमेरिक ने ईरान पर हमला (ऑपरेशन मिडनाइट हैमर) किया था। जिससे ईरान के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुँचा था। ट्रंप का यह कहना कि "अगला हमला इससे भी बुरा होगा," यह दर्शाता है कि वे सैन्य विकल्प का इस्तेमाल करने से हिचकेंगे नहीं, जैसा कि उन्होंने पहले भी किया है।
3. ईरान की आंतरिक स्थिति: ईरान इस समय भीषण घरेलू विरोध प्रदर्शनों और आर्थिक संकट से जूझ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप इन आंतरिक कमजोरियों का फायदा उठाना चाहते हैं। यदि ईरान की सरकार गिरती हुई दिखती है, तो अमेरिका सीमित हवाई हमले कर सकता है ताकि शासन को अंतिम धक्का दिया जा सके।
4. क्षेत्रीय सहयोगियों का रुख: सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों ने इस बार तनाव कम करने की अपील की है। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने स्पष्ट किया है कि वे ईरान के खिलाफ किसी भी हमले के लिए अपनी जमीन या हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं करने देंगे। यह अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती है क्योंकि बिना क्षेत्रीय समर्थन के लंबी जंग लड़ना मुश्किल होगा।
कुल मिलाकर "पूर्ण पैमाने पर युद्ध" (Full-scale war) की तुलना में "सीमित सैन्य कार्रवाई" (Limited surgical strikes) की संभावना अधिक है। ट्रंप का इतिहास रहा है कि वे युद्ध की धमकी देकर "बेहतर डील" हासिल करना चाहते हैं। हालांकि, अगर ईरान की ओर से कोई गलतफहमी (miscalculation) होती है या वह अमेरिकी जहाजों पर हमला करता है, तो यह तनाव एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है। फिलहाल, दोनों पक्ष एक-दूसरे को परख रहे हैं (Brinkmanship), लेकिन युद्ध का खतरा 2026 के इस दौर में अपने उच्चतम स्तर पर है।
अल जज़ीरा में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कतर विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रोफेसर अदनान हयाजनेह के हवाले से कहा गया कि विमानवाहक पोत की तैनाती वाशिंगटन द्वारा "शक्ति प्रदर्शन" है, जिसका उद्देश्य तेहरान को यह संदेश देना है कि "यदि आप हमारी इच्छानुसार काम नहीं करते हैं, तो हम मिसाइलें दाग देंगे"। उन्होंने कहा कि यह देखना बाकी है कि अमेरिका कूटनीति का रास्ता चुनेगा या सैन्य कार्रवाई का, लेकिन ये धमकियां "ईरान को बातचीत की मेज पर लाने का अमेरिकी तरीका" हैं। हयाजनेह ने कहा कि वाशिंगटन ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को रोकना चाहता है, जो क्षेत्र में इसराइली वर्चस्व के लिए चुनौती पेश करते हैं, और ऐसा तब करना चाहता है जब तेहरान घरेलू, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमजोर हो।
ईरान का कहना है कि "हमारा रुख स्पष्ट है: धमकियों के साथ बातचीत नहीं हो सकती, और बातचीत तभी हो सकती है जब धमकियां और अत्यधिक मांगें न हों।" तेहरान में तैनात अल जज़ीरा के रिपोर्टर अली हाशिम ने कहा कि अमेरिका की सार्वजनिक धमकियों के बीच, ब्रोकर्स संकट का समाधान खोजने के लिए बंद दरवाजों के पीछे बहुत कुछ कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "ऐसा लगता है कि कूटनीतिक स्तर पर बहुत कुछ चल रहा है। मध्यस्थ समाधान निकालने की पूरी कोशिश कर रहे हैं क्योंकि इस समय स्थिति वास्तव में बहुत गंभीर है।" हाशिम ने बताया कि सार्वजनिक रूप से ईरान युद्ध के लिए अपनी तत्परता का संकेत दे रहा है, साथ ही बातचीत के लिए भी मना नहीं कर रहा है।