यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीन के राष्ट्रपति शी जिनफिंग के बीच ताइवान और ईरान पर खुलकर बात की। न्यूयॉर्क टाइम्स और ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक चीन ने ताइवान को लेकर अमेरिका को सावधान किया।
बीजिंग में ट्रंप और शी के बीच बैठक
चीन के नेता शी जिनपिंग ने गुरुवार को बीजिंग में शुरू हुई शिखर वार्ता के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ताइवान मुद्दे पर चेतावनी दी। शी जिनपिंग ने कहा कि यदि इस मुद्दे को सही तरीके से नहीं संभाला गया, तो यह टकराव और “बेहद खतरनाक स्थिति” पैदा कर सकता है। दोनों नेताओं की मुलाकात चीनी राजधानी में भव्य स्वागत, औपचारिक समारोहों और एक-दूसरे की तारीफ के बीच हुई। लेकिन शी जिनपिंग की चेतावनी ने यह स्पष्ट कर दिया कि ताइवान, जिस पर चीन अपना दावा करता है, बीजिंग के लिए एक “रेड लाइन” है। न्यूयॉर्क टाइम्स और चीन के अखबार ग्लोबल टाइम्स ने ताइवान का मुद्दा उठाए जाने की खबरों की पुष्टि की है।
करीब एक दशक बाद चीन की यात्रा पर पहुंचे किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की यह पहली यात्रा है। यह शिखर वार्ता तय कर सकती है कि दोनों महाशक्तियों के बीच अब तक बनी नरमी और संतुलन आगे भी जारी रहेगा या नहीं, और दोनों पक्ष किस हद तक समझौते करने को तैयार हैं। इस उच्चस्तरीय बैठक में ताइवान, व्यापार और ईरान युद्ध जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
गुरुवार सुबह शी जिनपिंग ने बीजिंग के मध्य स्थित ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल के बाहर ट्रंप का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने हाथ मिलाया और बच्चों की कतारों के बीच गार्ड ऑफ आनर लेने के लिए साथ-साथ आगे बढ़े। अमेरिकी राष्ट्रगान “द स्टार-स्पैंगल्ड बैनर” बजने के दौरान थियानामान स्क्वायर पर 21 तोपों की सलामी दी गई।
ग्रेट हॉल के भीतर दोनों नेताओं ने अमेरिका-चीन संबंधों के महत्व पर जोर दिया। शी जिनपिंग ने कहा कि दोनों देशों को मिलकर दुनिया की बढ़ती “जटिल और अशांत परिस्थितियों” का सामना करना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमें प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार होना चाहिए।” ट्रंप ने शी जिनपिंग के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों नेता समस्याओं के समाधान के लिए फोन पर बातचीत करते रहते हैं। लंबी मेज पर आमने-सामने बैठी दोनों प्रतिनिधिमंडलों की मौजूदगी में ट्रंप ने शी से कहा, “आप एक महान नेता हैं।”
हालांकि, चीनी राष्ट्रपति ने साफ कर दिया कि ताइवान का मुद्दा दोनों देशों के रिश्तों को बिगाड़ सकता है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, ताइवान का जिक्र करते हुए शी ने कहा, “यदि इसे गलत तरीके से संभाला गया, तो दोनों देश टकरा सकते हैं या संघर्ष की स्थिति में पहुंच सकते हैं, जिससे पूरे अमेरिका-चीन संबंध बेहद खतरनाक स्थिति में आ जाएंगे।”
चीन की प्राथमिकताओं में से एक यह भी है कि अमेरिका ताइवान को हथियारों की बिक्री सीमित करे। फरवरी में हुई फोन बातचीत में शी जिनपिंग ने ट्रंप से इस मुद्दे को “अत्यंत सावधानी” से संभालने की अपील की थी। शिखर वार्ता से पहले इस बात के संकेत कम थे कि व्यापार जैसे बड़े मुद्दों पर कोई महत्वपूर्ण प्रगति होगी। दोनों नेताओं की पिछली मुलाकात अक्टूबर में दक्षिण कोरिया में हुई थी, जहां उन्होंने उस व्यापार युद्ध को रोकने पर सहमति जताई थी, जिसमें बीजिंग ने अमेरिकी वस्तुओं पर भारी शुल्क के जवाब में रेयर अर्थ मिनरल्स के निर्यात पर व्यापक प्रतिबंध लगाने की धमकी दी थी। उस समय शी जिनपिंग ने इन कदमों को एक वर्ष के लिए टालने का फैसला किया था। अब यह बड़ा सवाल है कि क्या चीन इन प्रतिबंधों को आगे भी स्थगित रखने पर सहमत होगा।
बड़े समझौते की संभावना कम
ट्रंप ने कहा है कि बीजिंग यात्रा के दौरान उनकी प्राथमिकता व्यापार और निवेश रहेगी। शुक्रवार तक चलने वाली इस यात्रा में ट्रंप और शी जिनपिंग ऐतिहासिक स्थलों पर भी मुलाकात करेंगे। चिप निर्माता कंपनी Nvidia के प्रमुख Jensen Huang समेत कई बड़े कारोबारी भी ट्रंप के साथ चीन पहुंचे हैं। अमेरिकी कारोबारी नेता लंबे समय से चीन के बाजार को और अधिक खोलने की मांग कर रहे हैं, हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि किसी बड़े समझौते की संभावना कम है। ईरान को लेकर बात होगी
ट्रंप से यह भी उम्मीद की जा रही है कि वे शी जिनपिंग से आग्रह करेंगे कि चीन, जो पश्चिम एशिया में ईरान का सबसे करीबी साझेदार माना जाता है, तेहरान को फरवरी के अंत से जारी अमेरिका-इज़राइल और ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए राजी करे। चीन और रूस की वजह से ईरान ने अमेरिका के आगे झुकने से इंकार कर दिया है।