फारस की खाड़ी में तीन दिनों तक एक-दूसरे पर भीषण सैन्य हमले करने के बाद, अमेरिका और ईरान अब अपनी सैन्य कार्रवाइयों को रोकने (Pause) पर सहमत हो गए हैं। दोनों देश युद्ध जैसी स्थिति को टालने और विवादित 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) जलमार्ग संकट को सुलझाने के लिए इस मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में एक उच्चस्तरीय बैठक करने जा रहे हैं।
रॉयटर्स के मुताबिक एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया- दोनों पक्षों ने फिलहाल सभी सैन्य हमलों (Kinetic Activity) को रोकने का फैसला किया है, जिसके बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य हो सकेगी।

स्विट्जरलैंड से क़तर बदला गया बैठक का स्थान

मूल रूप से यह बैठक स्विट्जरलैंड में होने वाली थी, जहां ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा की जानी थी। लेकिन वीकेंड पर अचानक बढ़े तनाव और सैन्य हमलों के बाद, न केवल बैठक का स्थान बदलकर क़तर किया गया, बल्कि अब इसका मुख्य फोकस 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' जलमार्ग संकट को सुलझाना हो गया है। इस तकनीकी वार्ता में अमेरिकी तकनीकी टीम के प्रमुख निक स्टीवर्ट के शामिल होने की उम्मीद है। स्विट्जरलैंड में इससे पहले हुई 'लेक ल्यूसर्न समिट' में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने किया था।
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ईरान अमेरिका समझौते की धारा 5 पर बवाल क्यों मचा

दोनों देशों के बीच हाल ही में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए थे, लेकिन इसकी व्याख्या, विशेष रूप से 'आर्टिकल 5' (धारा 5) को लेकर दोनों पक्षों में मतभेद पैदा हो गया।

क्या है आर्टिकल 5?
  • 60 दिनों के लिए सुरक्षित मार्ग: इसके तहत ईरान को फारस की खाड़ी से ओमान के सागर तक वाणिज्यिक जहाजों (Commercial Vessels) की बिना किसी शुल्क के सुरक्षित आवाजाही के लिए 60 दिनों तक विशेष व्यवस्था करनी थी।
  • 30 दिनों में बारूदी सुरंगें हटाना: ईरान को जलमार्ग से सभी तकनीकी और सैन्य बाधाओं सहित समुद्री बारूदी सुरंगों (Demining) को 30 दिनों के भीतर हटाना था।
  • क्षेत्रीय देशों से बातचीत: अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के भविष्य के प्रबंधन के लिए ईरान को ओमान और खाड़ी के अन्य तटीय देशों के साथ बातचीत करनी थी।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया की कुल तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा (1/5th) इसी रास्ते से गुजरता है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर इसी धारा के उल्लंघन का आरोप लगाया। सारा विवाद अब होर्मुज पर केंद्रित हो गया है।

वीकेंड पर कैसे बढ़ा तनाव?

25 जून: विवाद की शुरुआत तब हुई जब ओमान के तट के पास स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बाहर निकल रहे सिंगापुर के ध्वज वाले मालवाहक जहाज 'M/V एवर लवली' (M/V Ever Lovely) पर ईरान ने ड्रोन से हमला किया।

अमेरिकी जवाबी कार्रवाई: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस हमले को युद्धविराम का 'मूर्खतापूर्ण उल्लंघन' करार दिया। अमेरिकी सेना ने इसके जवाब में दो दिनों तक ईरान के मिसाइल, ड्रोन और रडार ठिकानों को बमबारी कर नष्ट कर दिया।

ईरान का पलटवार (कुवैत और बहरीन पर हमला): ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिकी हमलों का बदला लेने के लिए पड़ोसी खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान ने कुवैत के 'अली अल सलेम एयर बेस' और बहरीन के 'सलमान पोर्ट' स्थित अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े (5th Fleet) पर मिसाइलें और ड्रोन दागे।

युद्ध को लेकर अलग-अलग दावे

कुवैत और बहरीन: कुवैत ने दावा किया कि उसने ईरान की दो मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया, जिससे कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। वहीं बहरीन के आंतरिक मंत्रालय के अनुसार, ईरानी हमले में एक आवासीय इमारत को भारी नुकसान पहुंचा।

कतर के नागरिक की मौत: कतर के आंतरिक मंत्रालय ने पुष्टि की कि इस क्षेत्र में सैन्य अभियानों के दौरान लगे छर्रों के कारण एक जहाज पर सवार कतर के नागरिक की मौत हो गई।

बयानबाजी: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची (Abbas Araghchi) ने अमेरिकी हमलों को संयुक्त राष्ट्र के चार्टर और हस्ताक्षरित MoU का उल्लंघन बताया। साथ ही उन्होंने पड़ोसी देशों को चेतावनी दी कि वे अपनी धरती का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमलों के लिए न होने दें। दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ किया कि अगर होर्मुज में हमले जारी रहे, तो अमेरिका और कड़ी सैन्य कार्रवाई करेगा। ईरान ने भी पलटवार करते हुए कहा है कि यदि युद्धविराम का फिर से उल्लंघन हुआ, तो सभी राजनयिक रास्ते पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे।
फिलहाल कतर की मध्यस्थता में होने वाली इस बैठक पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इस जलमार्ग के ठप होने से वैश्विक तेल बाजार और अर्थव्यवस्था पर गंभीर संकट मंडरा रहा था।