ईरान की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने भी यूएस-ईरान समझौते की पुष्टि की है। इसके बाद तेल की कीमतें बुरी तरह गिर गईं हैं। एशिया समेत पूरी दुनिया के शेयर मार्केट उछल गए हैं।
ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई और यूएस राष्ट्रपति ट्रंप
मिडल ईस्ट (मध्य पूर्व) में हफ्तों से जारी भारी तनाव के बीच एक बहुत बड़ी कूटनीतिक कामयाबी सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौता (Peace Deal) हो गया है। इस समझौते के तहत दोनों देश लेबनान सहित सभी मोर्चों पर अपनी सैन्य कार्रवाइयों को तुरंत और हमेशा के लिए रोकने पर सहमत हो गए हैं। इस ऐतिहासिक शांति समझौते पर आगामी 19 जून को स्विट्जरलैंड में आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए जाएंगे। हालांकि ईरान में तमाम लोग इस समझौते की शर्तों से सहमत नहीं हैं। वहां सरकार और जनता में इसे लेकर मतभेद है। कुछ स्थानों पर प्रदर्शन भी हो रहे हैं।
पाकिस्तान ने पहले दी जानकारी
इस बड़े घटनाक्रम की सबसे पहली जानकारी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट के जरिए दी। इसके कुछ ही समय बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस समझौते की पुष्टि कर दी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' (Truth Social) पर इस समझौते की घोषणा करते हुए लिखा, "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ डील अब पूरी हो चुकी है। सभी को बधाई!"
होर्मुज भी खुला, सभी पक्षों का ऐलान
इसके साथ ही ट्रंप ने खाड़ी क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों (Commercial Shipping) के लिए एक और बड़ा ऐलान किया। उन्होंने अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी (Naval Blockade) को तुरंत हटाने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को व्यापार के लिए फिर से खोलने का आदेश दिया। ट्रंप ने लिखा: "दुनिया के जहाजों, अपने इंजन शुरू करो। तेल को बहने दो!"
ईरान ने रखी अपनी बात: आज रात से ही रुकेगा युद्ध
ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (National Security Council) ने बताया कि अमेरिका के साथ हुए इस नए समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत ईरान पर लगी समुद्री नाकेबंदी को तुरंत और पूरी तरह से हटा लिया जाएगा। परिषद के अनुसार, समझौते का मसौदा तैयार हो चुका है और सोमवार रात से ही लेबनान सहित सभी मोर्चों पर हर तरह की सैन्य और युद्ध गतिविधियां स्थायी रूप से बंद कर दी जाएंगी। 19 जून को होने वाले आधिकारिक हस्ताक्षर के बाद, दोनों पक्ष एक अंतिम और व्यापक परमाणु समझौते (Final Comprehensive Nuclear Deal) पर बातचीत शुरू करेंगे।ईरान की समाचार एजेंसी 'तस्नीम' के मुताबिक, इस शांति समझौते के औपचारिक रूप से लागू होते ही शुक्रवार (19 जून) को वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' पूरी तरह खुल जाएगा।
यूएस ईरान पीस डील की खास बातें
सैन्य कार्रवाइयों पर पूर्ण रोक: अमेरिका और ईरान लेबनान सहित सभी मोर्चों पर अपनी सैन्य गतिविधियां तुरंत और हमेशा के लिए बंद करेंगे।
होर्मुज खुला: वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद खास माना जाने वाला यह जलमार्ग अब पूरी तरह से "टोल-फ्री" और खुला रहेगा।
परमाणु समझौते की चेतावनी: 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने साफ किया कि अगर ईरान अंतिम परमाणु समझौते को पूरा करने में विफल रहता है, तो वह तेहरान पर फिर से सैन्य हमले शुरू करने पर विचार कर सकते हैं।
इसराइल का पक्ष और ट्रंप: इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के विरोध के बावजूद ट्रंप ने इस डील का बचाव किया। उन्होंने तर्क दिया कि उनके इस कदम ने इसराइल को परमाणु विनाश की कगार पर जाने से बचा लिया है।
कूटनीतिक मध्यस्थों की बड़ी भूमिका
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह समझौता कई हफ्तों की गहन कूटनीतिक कोशिशों और क्षेत्रीय देशों की मध्यस्थता के बाद संभव हो पाया है। उन्होंने इस पूरी बातचीत में कतर (Qatar) की नेतृत्वकारी भूमिका और समर्थन की जमकर तारीफ की। इसके साथ ही उन्होंने सऊदी अरब और तुर्की (Turkey) के महत्वपूर्ण योगदान की भी सराहना की, जिन्होंने दोनों पक्षों के मतभेदों को दूर करने में मदद की।हस्ताक्षर से पहले, आने वाले दिनों में मध्यस्थ देश दोनों पक्षों के साथ कई तकनीकी बैठकें करेंगे ताकि समझौते की निगरानी (Monitoring Mechanisms) और अन्य परिचालन विवरणों को अंतिम रूप दिया जा सके।
यदि 19 जून को स्विट्जरलैंड में इस समझौते पर सफलतापूर्वक हस्ताक्षर हो जाते हैं, तो यह वॉशिंगटन और तेहरान के दशकों पुराने तनाव को कम करने और मध्य पूर्व में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में एक नया अध्याय साबित होगा।
कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट
अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते की घोषणा के साथ ही वैश्विक ऊर्जा बाजार को बड़ी राहत मिली है। इस समझौते के तहत सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक तेल मार्ग, 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' (Strait of Hormuz) को बिना किसी शुल्क (Toll-Free) के तुरंत खोलने और अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी हटाने का ऐलान किया गया है। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें लगभग 4% गिरकर 84 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 4.6% से अधिक टूटकर 81 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। वैश्विक और एशियाई शेयर बाजारों में जबरदस्त उछाल
मिडल ईस्ट में युद्ध समाप्त होने और व्यापारिक मार्ग खुलने की खबर से दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में उत्साह की लहर दौड़ गई है। सोमवार सुबह बाजार खुलते ही एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के शेयर सूचकांकों में ऐतिहासिक तेजी देखी गई। जापान का बेंचमार्क इंडेक्स निक्केई 225 (Nikkei 225) 4.5% की भारी बढ़त के साथ उछला, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) इंडेक्स 5.7% तक मजबूत हो गया। इसके अलावा, अमेरिकी शेयर बाजार के वायदा कारोबार (Futures Market) में भी S&P 500 और नैस्डैक (Nasdaq) क्रमशः 1% और 1.6% की बढ़त के साथ हरे निशान पर कारोबार करते दिखे। भारतीय बाजार (Sensex & Nifty) पर भी दिखेगा असर
वैश्विक स्तर पर आई इस तेजी और कच्चे तेल के सस्ता होने का सीधा फायदा भारतीय शेयर बाजार को भी मिलने की उम्मीद है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में आई यह कमी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद सकारात्मक है। इस कूटनीतिक सफलता के बाद घरेलू स्तर पर भी निवेशकों का भरोसा बढ़ा है, जिससे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के निफ्टी में सोमवार को नए रिकॉर्ड स्तर (Fresh Highs) को छूने की मजबूत संभावना बन गई है।बहरहाल, विशेषज्ञों का मानना है कि इस शांति समझौते ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के सिर पर मंडरा रहे एक बड़े संकट को टाल दिया है। यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय तक बंद रहता, तो कच्चा तेल 100 डॉलर के पार जा सकता था, जिससे दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने लगतीं। तेल की कीमतों में आई इस तात्कालिक गिरावट से वैश्विक स्तर पर महंगाई (Inflation) के मोर्चे पर बड़ी राहत मिलेगी। यह स्थिति दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों (जैसे अमेरिकी फेडरल रिजर्व) को ब्याज दरों में कटौती करने या उन्हें स्थिर रखने के लिए अधिक अनुकूल माहौल प्रदान करेगी, जिससे आर्थिक विकास को गति मिलेगी।