अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में संभावित बातचीत की रिपोर्ट्स पर व्हाइट हाउस ने कहा कि इसकी कोई पुष्टि नहीं की जा सकती। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने कहा कि स्थिति बेहद संवेदनशील है। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना औपचारिक घोषणा के किसी भी बैठक की अटकलें अंतिम नहीं मानी जा सकतीं।
भारतीय समाचार एजेंसी के सवाल के जवाब में लेविट ने कहा, “ये संवेदनशील कूटनीतिक चर्चाएं हैं और अमेरिका प्रेस के माध्यम से बातचीत नहीं करेगा। यह नाज़ुक स्थिति है और बैठक की अटकलें तब तक अंतिम नहीं मानी जाएंगी, जब तक व्हाइट हाउस द्वारा औपचारिक रूप से घोषित न की जाए।”

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता को यह क्यों कहना पड़ा

यह बयान रॉयटर्स, फाइनेंशियल टाइम्स और टाइम्स ऑफ इसराइल की उन रिपोर्ट्स के बाद आया है, जिनमें दावा किया गया है कि मध्यस्थ देश अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में मीटिंग कराने की कोशिश कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान खुद को तटस्थ स्थान के रूप में पेश कर रहा है, क्योंकि उसके वाशिंगटन और तेहरान दोनों के साथ अच्छे संबंध हैं। एक वरिष्ठ इसराइली अधिकारी ने बताया कि दोनों पक्षों के सीनियर अधिकारियों की बैठक आयोजित करने के लिए संपर्क चल रहे हैं।

पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका

फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात की, जबकि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से कई बार फोन पर बातचीत की। रॉयटर्स ने बताया कि पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र के जरिए बैकचैनल डिप्लोमेसी चल रही है। अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकोफ और ईरानी अधिकारियों के साथ इन देशों के संपर्क हो रहे हैं।
पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी ने कहा, “अगर दोनों पक्ष सहमत होते हैं तो पाकिस्तान हमेशा बातचीत की मेजबानी के लिए तैयार है।” सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस, विशेष दूत स्टीव विटकोफ और पूर्व सलाहकार जेरेड कुश्नर इस हफ्ते इस्लामाबाद में ईरानी अधिकारियों से मिल सकते हैं।

ईरान का इनकारः ईरान ने सीधे अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत से इनकार किया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बागई ने कहा, “पिछले कुछ दिनों में कुछ मित्र देशों के जरिए अमेरिका की ओर से युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत का अनुरोध प्राप्त हुआ था। हमने उचित जवाब दिए।” ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर कालिबाफ ने ट्रंप के दावों को “फेक न्यूज” करार दिया और कहा कि यह तेल मार्केट को प्रभावित करने और अमेरिका-इसराइल की चुनौतियों से ध्यान भटकाने का प्रयास है।

चैथम हाउस की एनालिस्ट सनम वकील ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया कि देश युद्ध को कम करने के लिए “हड़बड़ी” में हैं, लेकिन यह युद्ध समाप्त होने का कोई संकेत नहीं है।

ट्रंप का बयान

यह घटनाक्रम ट्रंप के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने ईरान की ऊर्जा सुविधाओं पर हमले 5 दिन के लिए टाल दिए। ट्रंप ने कहा, “हम 5-दिन का समय दे रहे हैं और देखेंगे कि क्या होता है। अगर अच्छा रहा तो हम इसे सुलझा लेंगे, वरना हम अपने छोटे दिल से बमबारी जारी रखेंगे।” उन्होंने दावा किया कि ईरान के साथ “बहुत अच्छी” बातचीत हुई है और दोनों पक्षों में “मेजर पॉइंट्स ऑफ एग्रीमेंट” हैं। 
अमेरिकी इंटीरियर सचिव डग बर्गम ने कहा, “प्रेसिडेंट ट्रंप इसे सुलझा लेंगे। वे डीलमेकर-इन-चीफ हैं और अमेरिकियों के लिए जीत का सौदा लाएंगे।” स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले वैश्विक ऊर्जा प्रवाह के जोखिम से अमेरिका अवगत है।
बाजार की प्रतिक्रिया फिलहाल सकारात्मक है। ब्रेंट क्रूड 10.9% गिरकर 99.94 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ (पिछले हफ्ते 120 डॉलर के करीब पहुंचा था), जबकि एसएंडपी 500 में 1.1% की बढ़ोतरी हुई।

पाकिस्तान की दोहरी नीति

पाकिस्तान क्षेत्रीय दबावों के बीच संतुलन बना रहा है। उसने ईरान पर हमलों की निंदा की है और डी-एस्केलेशन की अपील की, लेकिन सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता और ईरान के साथ सीमा-अर्थव्यवस्था भी बनाए रखी है। फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के एडमंड फिटन-ब्राउन ने कहा, “पाकिस्तान खुद को मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है, लेकिन यह बहुत विश्वसनीय नहीं लगता।”
एक्सिओस, सीएनएन, अल जजीरा और अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी पुष्टि की कि तुर्की, मिस्र और पाकिस्तान संदेश दे रहे हैं। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची और अमेरिकी दूत विटकोफ के बीच अप्रत्यक्ष संपर्क चल रहे हैं। ईरान का कहना है कि कोई “सीधे बातचीत” नहीं हुई, जबकि अमेरिका इसे “नाज़ुक सिचुएशन” बता रहा है।
यह पूरी स्थिति ईरान-इसराइल संघर्ष और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बीच चल रही है, जिसमें दोनों पक्ष युद्धविराम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल कोई औपचारिक बैठक की पुष्टि नहीं हुई है।