ईरान के विदेश मंत्री अरागची, स्पीकर गालिबाफ इस्लामाबाद पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि बिना शर्तें पूरी हुए बात आगे नहीं बढ़ सकती। अमेरिका प्रतिनिधिमंडल भी जल्द ही पाकिस्तान पहुंचने वाला है। ताज़ा अपडेटः
ईरानी डेलीगेशन इस्लामाबाद पहुंचा, कहा- शर्तों के पूरा हुए बिना बातचीत नहीं
ईरान का एक उच्चस्तरीय दल शुक्रवार देर रात को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचा। जिसका नेतृत्व ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर कालिबाफ कर रहे हैं। इसमें ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची और अन्य अधिकारी भी शामिल हैं। यह दल अमेरिका के साथ शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान पहुंचा है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि बातचीत तभी शुरू होगी, जब वाशिंगटन तेहरान की पूर्व-शर्तों (प्रीकंडीशंस) को मान ले।
वैंस के साथ यूएस का डेलीगेशन भी पहुंचा
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, वरिष्ठ अधिकारियों को लेकर अमेरिकी सरकार का एक विमान शनिवार दोपहर इस्लामाबाद में उतरा, जिससे ईरान के साथ महत्वपूर्ण वार्ता का मंच तैयार हो गया। इस वार्ता का उद्देश्य मध्य पूर्व और वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला देने वाले छह सप्ताह से चल रहे युद्ध को समाप्त करना है। पाकिस्तानी सूत्रों के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल में उपराष्ट्रपति जेडी वैंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और सलाहकार जेरेड कुशनर शामिल हैं, जो वार्ता में वाशिंगटन की ओर से नेतृत्व कर रहे हैं।
लेबनान-इसराइल में 14 अप्रैल को बातः इसराइल और लेबनान के बीच 14 अप्रैल को सीधी बातचीत होगी। लेबनान के पीएम के फोन के बाद नेतन्याहू ने इसकी घोषणा की है।
ईरानी मीडिया ने बताया कि गालिबाफ, अरागची के अलावा सुप्रीम नेशनल डिफेंस काउंसिल के सचिव अली अकबर अहमदियान, सेंट्रल बैंक गवर्नर अब्दुल नासिर हिम्मती और पूर्व आईआरजीसी कमांडर मोहम्मद बागेर ज़ुलकद्र शामिल हैं। इसके अलावा ईरानी संसद के कई सदस्य भी इस दल के साथ हैं।
यह यात्रा ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष को खत्म करने की कोशिशों में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक शुरुआत का इशारा है। पाकिस्तान इस उच्चस्तरीय बैठक की मेजबानी कर रहा है, जिसमें दोनों पक्षों के बीच सीधी बातचीत (face-to-face discussions) होने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच नाजुक संघर्ष विराम (fragile ceasefire) की स्थिति बनी हुई है और आपसी अविश्वास अभी भी कायम है।
ईरान की प्रमुख शर्तें
इस्लामाबाद रवाना होने से पहले स्पीकर गालिबाफ ने दो खास शर्तें बताईं थीं कि इन्हें पूरा किए बिना बातचीत संभव नहीं है। हालांकि ईरान ने 10 शर्तें अमेरिका को बताई हैं। लेकिन दो प्रमुख शर्तों को लेकर गालिबाफ ने रात को ट्वीट किया था। उन्होंने एक्स पर लिखा था- दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से तय किए गए दो उपायों को अभी तक लागू नहीं किया गया है: लेबनान में युद्धविराम और बातचीत शुरू होने से पहले ईरान की सीज़ संपत्तियों को रिलीज़ किया जाना। बातचीत शुरू होने से पहले इन दोनों मामलों को पूरा किया जाना आवश्यक है। हालांकि यूएस राष्ट्रपति ट्रंप बार-बार होर्मुज को लेकर धमकी दे रहे हैं।
तेहरान ने बार-बार जोर दिया है कि औपचारिक वार्ता शुरू करने से पहले कुछ आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। इनमें क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे और आर्थिक प्रतिबंधों (economic restrictions) से संबंधित शर्तें शामिल हैं। ईरान का यह दृढ़ रुख बातचीत के दौरान भी जारी रहने वाला लगता है, भले ही वह बातचीत की प्रक्रिया में शामिल हो रहा है।
पाकिस्तान में इस बैठक का आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब ईरान-अमेरिका संबंधों में तनाव कम करने और शांति बहाल करने की कोशिशें चल रही हैं। ईरानी मीडिया ने दल के आगमन की पुष्टि करते हुए कहा कि अमेरिका द्वारा तेहरान की पूर्व-शर्तों को मान्यता दिए बिना कोई औपचारिक वार्ता नहीं होगी।
यह यात्रा क्षेत्रीय कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि पाकिस्तान दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। आगे की वार्ताओं पर नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों का समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।