ईरान और अमेरिका के बीच दो दौर की बातचीत शनिवार को इस्लामाबाद में पूरी हो गई है। अगले दौर की बातचीत शनिवार देर रात या संडे को हो सकती है। इस बीच होर्मुज को लेकर अलग-अलग खबरें ईरानी और यूएस मीडिया दे रहा है।
इस्लामाबाद में ईरानी डेलीगेशन शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के साथ
इस्लामाबाद में दो दौर की बातचीत पूरी
ईरानी सरकारी टीवी ने बताया कि इस्लामाबाद में ईरानी और अमेरिकी अधिकारियों के बीच दो दौर की बातचीत हो चुकी है। तीसरे दौर की बातचीत शनिवार देर रात या रविवार को होने की उम्मीद है। आईआरआईबी ने बताया, "सरकारी टीवी संवाददाता को बातचीत से जुड़े लोगों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, बातचीत का एक और दौर आज रात या कल संडे को होने की संभावना है।"
होर्मुज को लेकर बातचीत में गतिरोध
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत करने वालों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर चल रही अमेरिका-ईरान बातचीत में गतिरोध बना हुआ है। बातचीत से जुड़े दो सूत्रों ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया कि होर्मुज को फिर से खोलने को लेकर चर्चा में अभी भी गतिरोध बना हुआ है। इनमें से एक सूत्र ने बताया कि ईरान का कहना है कि जलमार्ग पर उसका नियंत्रण बना हुआ है और वह जहाजों से शुल्क वसूल सकता है।
होर्मुज पर यूएस सेना का बयान, ईरान का खंडन
अमेरिकी सेना का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से बारूदी सुरंगें हटाने के लिए 'शर्तें तय की जा रही हैं।' अमेरिकी सेना ने शनिवार को कहा कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य से बारूदी सुरंगें हटाने के लिए "कंडीशन्स तय करना" शुरू कर दिया है, जिसके तहत दो अमेरिकी युद्धपोत इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजरे। X पर एक पोस्ट में, अमेरिकी केंद्रीय कमान ने कहा कि यूएसएस फ्रैंक पीटरसन और यूएसएस माइकल मर्फी ने होर्मुज जलडमरूमध्य को "ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स द्वारा पहले बिछाई गई समुद्री बारूदी सुरंगों से पूरी तरह मुक्त करने के व्यापक मिशन के हिस्से के रूप में" पार किया। हालांकि ईरान ने इस दावे का खंडन किया है। आईआरजीसी ने कहा कि होर्मुज पर उसका नियंत्रण बना हुआ है। इससे पहले एक अमेरिकी जहाज़ को चेतावनी देकर वापस भेज दिया गया है। दोनों तरफ से दावों को देखते हुए यह कहना अभी मुश्किल है कि सच क्या है। होर्मुज इस बातचीत का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।
अमेरिका ईरान के फंड को रिलीज़ करेगा
इस्लामाबाद में चल रही संवेदनशील कूटनीतिक बातचीत के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, ईरान के एक खास सूत्र ने दावा किया है कि अमेरिका ने कतर और अन्य विदेशी बैंकों में फंसी ईरानी संपत्तियों को अनफ्रीज़ (जारी) करने पर सहमति दे दी है। इसे वॉशिंगटन की ओर से समझौते के प्रति “गंभीरता” का संकेत माना जा रहा है। सूत्र ने, पहचान गुप्त रखने की शर्त पर, बताया कि इन संपत्तियों को अनफ्रीज़ करना सीधे तौर पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने से जुड़ा हुआ है। यह मुद्दा इस्लामाबाद में हो रही बातचीत का एक प्रमुख मुद्दा है।
(इस खबर को विस्तार से हमारी वेबसाइट पर पढ़िए)क्या चीन फिर से ईरान को हथियार सप्लाई कर रहा है
अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, चीन आने वाले कुछ हफ्तों में ईरान को नई हवाई रक्षा प्रणालियां पहुंचाने की तैयारी कर रहा है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, बीजिंग कंधे से दागे जाने वाले एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम, जिन्हें MANPADs (Man-Portable Air Defense Systems) कहा जाता है, ईरान को ट्रांसफर करने की तैयारी में है। ये सिस्टम पांच सप्ताह चले ईरान-अमेरिका युद्ध के दौरान कम उड़ान भरने वाले अमेरिकी सैन्य विमानों के लिए एक असममित खतरा साबित हुए थे और अगर संघर्ष विराम टूटा तो दोबारा ऐसा खतरा पैदा कर सकते हैं।
खुफिया सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान इस संघर्ष विराम का फायदा उठाकर अपने कुछ हथियार सिस्टम को फिर से भरने की कोशिश कर रहा है। जिसमें प्रमुख विदेशी साझेदारों की मदद शामिल हो सकती है। दो सूत्रों ने सीएनएन को बताया कि बीजिंग शिपमेंट को तीसरे देशों के रास्ते भेजने की योजना बना रहा है ताकि असली उत्पत्ति (origin) को छिपाया जा सके। चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने वाशिंगटन में इस आरोप का सख्त खंडन करते हुए कहा, “चीन ने संघर्ष के किसी भी पक्ष को हथियार कभी नहीं दिए हैं; यह जानकारी पूरी तरह गलत और झूठी है।”
ईरानी दल गालिबाफ और अरागची के नेतृत्व में पहुंचा
ईरान का एक उच्चस्तरीय दल शुक्रवार देर रात को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचा। जिसका नेतृत्व ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर कालिबाफ कर रहे हैं। इसमें ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची और अन्य अधिकारी भी शामिल हैं। यह दल अमेरिका के साथ शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान पहुंचा है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि बातचीत तभी शुरू होगी, जब वाशिंगटन तेहरान की पूर्व-शर्तों (प्रीकंडीशंस) को मान ले।
ईरानी डेलीगेशन इस्लामाबाद पहुंचा, कहा- शर्तों के पूरा हुए बिना बातचीत नहीं
वैंस के साथ यूएस का डेलीगेशन भी पहुंचा
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, वरिष्ठ अधिकारियों को लेकर अमेरिकी सरकार का एक विमान शनिवार दोपहर इस्लामाबाद में उतरा, जिससे ईरान के साथ महत्वपूर्ण वार्ता का मंच तैयार हो गया। इस वार्ता का उद्देश्य मध्य पूर्व और वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला देने वाले छह सप्ताह से चल रहे युद्ध को समाप्त करना है। पाकिस्तानी सूत्रों के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल में उपराष्ट्रपति जेडी वैंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और सलाहकार जेरेड कुशनर शामिल हैं, जो वार्ता में वाशिंगटन की ओर से नेतृत्व कर रहे हैं।
लेबनान-इसराइल में 14 अप्रैल को बातः इसराइल और लेबनान के बीच 14 अप्रैल को सीधी बातचीत होगी। लेबनान के पीएम के फोन के बाद नेतन्याहू ने इसकी घोषणा की है।
ईरानी मीडिया ने बताया कि गालिबाफ, अरागची के अलावा सुप्रीम नेशनल डिफेंस काउंसिल के सचिव अली अकबर अहमदियान, सेंट्रल बैंक गवर्नर अब्दुल नासिर हिम्मती और पूर्व आईआरजीसी कमांडर मोहम्मद बागेर ज़ुलकद्र शामिल हैं। इसके अलावा ईरानी संसद के कई सदस्य भी इस दल के साथ हैं।
यह यात्रा ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष को खत्म करने की कोशिशों में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक शुरुआत का इशारा है। पाकिस्तान इस उच्चस्तरीय बैठक की मेजबानी कर रहा है, जिसमें दोनों पक्षों के बीच सीधी बातचीत (face-to-face discussions) होने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच नाजुक संघर्ष विराम (fragile ceasefire) की स्थिति बनी हुई है और आपसी अविश्वास अभी भी कायम है।
ईरान की प्रमुख शर्तें
इस्लामाबाद रवाना होने से पहले स्पीकर गालिबाफ ने दो खास शर्तें बताईं थीं कि इन्हें पूरा किए बिना बातचीत संभव नहीं है। हालांकि ईरान ने 10 शर्तें अमेरिका को बताई हैं। लेकिन दो प्रमुख शर्तों को लेकर गालिबाफ ने रात को ट्वीट किया था। उन्होंने एक्स पर लिखा था- दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से तय किए गए दो उपायों को अभी तक लागू नहीं किया गया है: लेबनान में युद्धविराम और बातचीत शुरू होने से पहले ईरान की सीज़ संपत्तियों को रिलीज़ किया जाना। बातचीत शुरू होने से पहले इन दोनों मामलों को पूरा किया जाना आवश्यक है। हालांकि यूएस राष्ट्रपति ट्रंप बार-बार होर्मुज को लेकर धमकी दे रहे हैं।
तेहरान ने बार-बार जोर दिया है कि औपचारिक वार्ता शुरू करने से पहले कुछ आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। इनमें क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे और आर्थिक प्रतिबंधों (economic restrictions) से संबंधित शर्तें शामिल हैं। ईरान का यह दृढ़ रुख बातचीत के दौरान भी जारी रहने वाला लगता है, भले ही वह बातचीत की प्रक्रिया में शामिल हो रहा है।
पाकिस्तान में इस बैठक का आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब ईरान-अमेरिका संबंधों में तनाव कम करने और शांति बहाल करने की कोशिशें चल रही हैं। ईरानी मीडिया ने दल के आगमन की पुष्टि करते हुए कहा कि अमेरिका द्वारा तेहरान की पूर्व-शर्तों को मान्यता दिए बिना कोई औपचारिक वार्ता नहीं होगी।
यह यात्रा क्षेत्रीय कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि पाकिस्तान दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। आगे की वार्ताओं पर नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों का समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।