अमेरिका के एक फेडरल जज ने ट्रम्प की निर्वासन नीति को गैरकानूनी घोषित कर दिया है। इस फैसले से अमेरिकी इमीग्रेशन एनफोर्समेंट सिस्टम में बड़ा बदलाव आ सकता है। हाल ही में बड़े पैमाने पर दूसरे देशों को कथित अवैध अप्रवासियों को डिपोर्ट किया गया था।
अमेरिका की एक फेडरल अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की डिपोर्टेशन नीति को गैरकानूनी करार दिया है। इस नीति के तहत प्रवासियों को उनके मूल देश के बजाय “तीसरे देशों” में तेज़ी से डिपोर्ट किया जा रहा था। अदालत ने कहा कि बिना उचित नोटिस और अपील का मौका दिए ऐसे डिपोर्टेशन अमेरिकी कानून में सुनिश्चित “उचित प्रक्रिया” अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।
मैसाचुसेट्स के बोस्टन स्थित अमेरिकी जिला जज ब्रायन मर्फी ने अपने फैसले में कहा कि सरकार ने प्रवासियों को अपने निष्कासन का विरोध करने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया। नीति के तहत कुछ मामलों में प्रवासियों को ऐसे देशों में भेजा गया, जिनसे उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था और उन्हें बहुत कम समय में सूचना दी गई थी। अदालत ने माना कि यह प्रक्रिया न्यायसंगत नहीं है।
रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने कोस्टा रिका से लेकर दक्षिण सूडान जैसे देशों तक प्रवासियों को भेजने की कोशिश की थी। सरकार का तर्क था कि यदि निर्वासन के लिए वैकल्पिक देश तैयार हों तो यह कानूनी है, लेकिन जज ने कहा कि केवल कूटनीतिक आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं और प्रभावित लोगों को अपने सुरक्षा जोखिमों पर आपत्ति दर्ज करने का मौका मिलना चाहिए।
अदालत ने अपने आदेश के प्रभाव को 15 दिनों के लिए स्थगित रखा है ताकि गृह सुरक्षा विभाग (DHS) चाहें तो ऊपरी अदालत में अपील कर सके। इस फैसले से ट्रंप प्रशासन की सख्त आव्रजन नीति को बड़ा झटका माना जा रहा है और यह मामला अब संभवतः अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट तक जा सकता है।
जज मर्फी ने अपने फैसले में कहा कि निर्वासन की तीव्र प्रक्रिया हर मामले के विवरण को अस्पष्ट कर देती है, जिससे अदालतों के लिए यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि हर निर्वासन कानूनी है या नहीं। मर्फी ने लिखा, "वास्तविकता यह है कि किसी भी व्यक्ति के दावे की वैधता किसी को नहीं पता क्योंकि (प्रशासनिक अधिकारी) मूल तथ्य को छिपा रहे हैं।"
पिछले साल भी जज मर्फी ने तीसरे देशों में निर्वासित किए जा रहे प्रवासियों के उचित कानूनी प्रक्रिया अधिकारों की रक्षा करने की कोशिश के आदेश जारी किए थे। लेकिन यूएस सुप्रीम कोर्ट ने उन पर रोक लगा दिया था। जज मर्फी के आदेश उस मामले के अंतर्गत आए थे जिसमें ट्रंप प्रशासन ने दक्षिण सूडान में मानवाधिकार स्थितियों को लेकर चिंताओं के बावजूद आठ पुरुषों को वहां भेजने का प्रयास किया था।
बुधवार का यह फैसला उन अप्रवासियों द्वारा दायर एक सामूहिक मुकदमे से जुड़ा है, जिन्हें इसी तरह उन देशों में निर्वासित किए जाने का सामना करना पड़ रहा है जिनसे उनका कोई संबंध नहीं है। मुकदमे के पक्षधर वकील, नेशनल इमिग्रेशन लिटिगेशन एलायंस की ट्रिना रियलमुटो ने मर्फी के इस नए फैसले की सराहना की। रियलमुटो ने एक बयान में कहा, "सरकार की नीति के तहत, लोगों को जबरन उन देशों में वापस भेजा जा रहा है जहां अमेरिकी आव्रजन जजों ने पाया है कि उन्हें सताया या प्रताड़ित किया जाएगा।"
रियल्मुटो ने कहा कि यह फैसला ट्रंप नीति की संवैधानिकता के बारे में एक "मजबूत बयान" है।