स्विट्जरलैंड में शांति वार्ता के बीच अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान पर लगे तेल प्रतिबंधों में 60 दिनों की अस्थायी ढील दी है। इधर, जेडी वेंस के उस दावे को ईरान ने खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि तेहरान IAEA परमाणु निरीक्षण पर सहमत हो गया है।
स्विट्ज़रलैंड में शांति वार्ता के बीच अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हटा दिया है। अब ईरान 60 दिनों तक अपना तेल दुनिया के ज़्यादातर देशों को बेच और पहुँचा सकता है। यह फ़ैसला स्विट्जरलैंड में हुई पहले दिन की उच्च-स्तरीय बातचीत के बाद लिया गया है। इस बातचीत को 'सकारात्मक प्रगति' बताया गया है।
ईरानी तेल पर अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने यह छूट दी है। इसके तहत ईरान 21 अगस्त तक अपना क्रूड ऑयल, पेट्रोकेमिकल्स और पेट्रोलियम उत्पाद बेच सकता है। यह 17 जून को वाशिंगटन और तेहरान के बीच साइन किए गए 60 दिन के समझौते यानी MoU का हिस्सा है। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने एक्स पर लिखा, 'स्विट्जरलैंड में चल रही बातचीत के अनुसार ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में मुफ्त और खुला आवागमन सुनिश्चित करने और IAEA के निरीक्षकों को देश में आने की अनुमति देने का वादा किया है।' इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ईरानी तेल पर से अस्थायी रूप से प्रतिबंध हटाया जा रहा है।
ईरानी तेल पर छूट में क्या शामिल?
अमेरिका द्वारा दी गई इस छूट के तहत ईरानी तेल को लगभग हर देश में बेचा जा सकता है, सिवाय उत्तर कोरिया, क्यूबा और क्रिमिया के। भुगतान अमेरिकी डॉलर में किया जा सकता है। अगर जरूरी हुआ तो अमेरिका खुद भी ईरानी तेल खरीद सकता है। बता दें कि 1979 के बाद से अमेरिका ने ईरानी तेल नहीं खरीदा है।
भारत के लिए क्या मायने है?
ईरान के तेल से प्रतिबंध को हटाना भारत के लिए बेहद अहम है क्योंकि भारत ईरानी तेल का बड़ा खरीदार रहा है। 2009 में भारत के कुल क्रूड आयात का 14% तेल ईरान से आता था और तब वह भारत के लिए दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर था। लेकिन 2019 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त प्रतिबंध लगा दिए थे। इसके बाद भारत ने ईरानी तेल खरीदना पूरी तरह बंद कर दिया था।
इसके बाद भारत ने रूस से तेल की खरीद बढ़ा दी। बाद में अमेरिका द्वारा रूसी तेल पर प्रतिबंध लगा दिया गया। लेकिन मध्य पूर्व में मौजूदा तनाव के दौरान जब होर्मुज को बंद कर दिया गया तो रूसी तेल खरीद पर से प्रतिबंध हटा और फिर भारत अब रूस से रिकॉर्ड मात्रा में तेल खरीद रहा है। जून में ही भारत ने मॉस्को से 2.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल आयात किया, जो कुल आयात का करीब 54% है।
अब दुनिया भर में सप्लाई की कमी और कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण ईरानी तेल पर 60 दिन की यह छूट भारत के लिए अच्छी खबर हो सकती है।
क्या भारत फिर से ईरानी तेल खरीदेगा?
जानकारों का मानना है कि सस्ता और उपलब्ध ईरानी क्रूड मिलने से भारत को काफी फायदा होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि दूरी ज़्यादा होने से रूस से तेल की ढुलाई महंगी पड़ती है। ईरान से तेल की ढुलाई काफी सस्ती होगी। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग स्रोतों पर निर्भर रहना चाहता है। 60 दिन का यह समय भारत को नए सौदे करने और सप्लाई चेन तैयार करने का मौका दे सकता है।
परमाणु जाँच पर ईरान ने नकारा अमेरिका का दावा
ईरानी तेल पर प्रतिबंध हटाए जाने के बावजूद स्विट्जरलैंड वार्ता के बाद परमाणु जाँच पर अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस दावे को ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि तेहरान IAEA परमाणु निरीक्षकों को अनुमति देने पर सहमत हो गया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोमवार को कहा कि बातचीत 'बहुत अच्छी' रही। उन्होंने चार मुख्य बिंदु बताए-
- होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रखना
- क्षेत्रीय संघर्ष रोकने के लिए तंत्र बनाना
- IAEA निरीक्षक ईरान में भेजना
- आगे तकनीकी बातचीत जारी रखना
ट्रंप ने भी कहा कि ईरान 'न्यूक्लियर ऑनेस्टी' सुनिश्चित करने के लिए बड़े हथियार निरीक्षणों के लिए राजी होगा। लेकिन ईरान ने IAEA निरीक्षकों वाले दावे से इनकार कर दिया। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि IAEA के साथ सहयोग संसद के कानून और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के फैसलों के अनुसार ही होगा।
डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी स्पीकर गालिबाफ़
सीएनएन ने सरकारी इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज़ एजेंसी यानी IRNA के हवाले से बताया कि ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि IAEA के साथ ईरान का कामकाज 'सेफगार्ड समझौतों के तहत ईरान के ऑब्लिगेशन के अनुसार' और 'संसद द्वारा पारित प्रस्तावों और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के फैसलों के मुताबिक' आगे बढ़ेगा।
बता दें कि पिछले साल ईरान की संसद द्वारा बनाए गए एक कानून ने IAEA के साथ सहयोग को सीमित कर दिया था और नियमित निरीक्षण रोक दिए थे। हालाँकि, IRNA के हवाले से कहा गया है कि यूएन की परमाणु निगरानी संस्था के साथ संबंध कभी पूरी तरह से नहीं टूटे। यह कानून अभी भी IAEA निरीक्षकों को बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र सहित 'सक्रिय परमाणु साइटों' तक पहुँचने की अनुमति देता है, लेकिन ऐसा अलग-अलग मामलों की मेरिट के आधार पर तय होगा।
बहरहाल, ईरानी तेल पर प्रतिबंधों में यह 60 दिन की छूट अस्थायी है। यदि बातचीत आगे बढ़ी और ईरान ने अपने वादों को पूरा किया तो प्रतिबंधों में और ढील मिल सकती है। लेकिन अगर बात नहीं बनी तो पुराने सख्त प्रतिबंध वापस लग सकते हैं।
अभी के लिए अमेरिका का यह फैसला ईरान की अर्थव्यवस्था को कुछ राहत देगा और भारत जैसे देशों को सस्ता तेल खरीदने का विकल्प देगा।