पेंटागन ने ईरान को बर्बाद करने के ट्रंप के दावों के विपरीत रिपोर्ट दी है। उसका कहना है कि ईरान के पास अभी भी हजारों बैलिस्टिक मिसाइलें और लॉन्चर मौजूद हैं। जबकि अमेरिका के थाड, पैट्रियट और टोमाहॉक मिसाइलों के भंडार में तेजी से कमी आई है।
ईरान में खुर्रमशहर मिसाइल 4 का प्रदर्शन
ईरान के साथ हालिया सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिकी रक्षा विभाग की खुफिया एजेंसी ने एक महत्वपूर्ण मूल्यांकन में कहा है कि ईरान अभी भी महत्वपूर्ण सैन्य क्षमताएं बनाए रखे हुए है। खासकर बैलिस्टिक मिसाइल और लॉन्चरों के क्षेत्र में वो मज़बूत स्थिति में है। इसी बीच ईरान ने देशभर में सरकार समर्थक रैलियों में अपनी बद्र और खोर्रमशहर-4 बैलिस्टिक मिसाइलों का प्रदर्शन किया है। दूसरी ओर, अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में चेतावनी दी गई है कि ईरान के खिलाफ ऑपरेशन में मिसाइलों के भारी इस्तेमाल से अमेरिकी स्टॉकपाइल काफी कम हो गया है, जिससे भविष्य के किसी भी बड़े संघर्ष में खतरा पैदा हो सकता है। दूसरी तरफ राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के पहले ही बर्बाद होने के दावे कर रहे हैं।
पेंटागन की खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इसराइल के हमलों के बावजूद ईरान के पास अभी भी हजारों मिसाइलें और एक-तरफा हमले वाले ड्रोन बचे हुए हैं। हालिया आकलनों में कहा गया है कि ईरान के मिसाइल लॉन्चरों का लगभग आधा हिस्सा बरकरार है और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता अभी भी क्षेत्रीय खतरा बनी हुई है। ईरान ने अपने मिसाइलों और लॉन्चरों को छिपाकर और बिखेरकर रखा है, जिससे उन्हें पूरी तरह नष्ट करना मुश्किल हो गया है।
ईरान ने मंगलवार (21 अप्रैल) की रात को देशव्यापी रैलियों में अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया। तेहरान के एक प्रमुख चौक में बद्र बैलिस्टिक मिसाइल को दिखाया गया, जबकि दूसरे स्थान पर खोर्रमशहर-4 बैलिस्टिक मिसाइल का प्रदर्शन किया गया। एक मिसाइल पर लगे फोटो में संभावित लक्ष्य के रूप में कतर स्थित रासगैस (RasGas) कंपनी को चिह्नित किया गया था। इसी तरह शिराज, तबरेज और जंजान जैसे शहरों में भी हथियारों का सार्वजनिक प्रदर्शन हुआ।
ईरान में सरकार समर्थक रैलियां 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध के बाद से रोजाना हो रही हैं। रैलियों में लोग ईरानी झंडे लहराते हैं और 'डेथ टू अमेरिका' के नारे लगाते हैं। तेहरान में प्रदर्शनकारियों ने मेजर जनरल माजिद मुसावी की तारीफ की और उन्हें तेल अवीव पर हमला करने की अपील की। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी चेतावनी जारी की है कि अगर खाड़ी पड़ोसी देश अमेरिका या उसके सहयोगियों को ईरान पर हमला करने के लिए अपनी भूमि और सुविधाओं का इस्तेमाल करने देंगे, तो पूरे मध्य पूर्व में तेल उत्पादन रुक जाएगा। माजिद मुसावी ने फार्स न्यूज एजेंसी को बताया, “पड़ोसियों को पता होना चाहिए कि अगर उनके रणनीतिक क्षेत्र और सुविधाओं का इस्तेमाल दुश्मनों के लिए किया गया, तो मध्य पूर्व में तेल उत्पादन को अलविदा कह दें।”
हथियारों की कमी पर अमेरिका चिंतित
दूसरी तरफ, अमेरिकी सैन्य स्टॉकपाइल पर गंभीर चिंता जताई जा रही है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के खिलाफ सात हफ्तों के युद्ध में अमेरिकी सेना ने अपनी महत्वपूर्ण मिसाइलों का बड़ा हिस्सा खर्च कर दिया है। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के विश्लेषण के अनुसार:
- प्रिसीजन स्ट्राइक मिसाइलों का कम से कम 45% खर्च।
- THAAD मिसाइलों (बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने वाली) का कम से कम 50% खर्च।
- पैट्रियट एयर डिफेंस इंटरसेप्टर मिसाइलों का लगभग 50% खर्च हो चुका।
- टॉमहॉक मिसाइलों का करीब 30%
- लंबी दूरी की जॉइंट एयर-टू-सर्फेस स्टैंडऑफ मिसाइलों का 20% से ज्यादा
- SM-3 तथा SM-6 मिसाइलों का करीब 20% इस्तेमाल
CSIS के विशेषज्ञ मार्क कैनसियन ने कहा, “उच्च खपत ने पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती कमजोरी का एक खिड़की खोल दी है। इन स्टॉक को फिर से भरने में एक से चार साल लगेंगे और उन्हें जरूरी स्तर तक बढ़ाने में और कई साल।” रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि वर्तमान स्टॉक चीन जैसी निकट शक्ति के खिलाफ पर्याप्त नहीं है और दोबार तैयार करने में तीन से पांच साल लग सकते हैं।
ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में मिसाइल उत्पादन बढ़ाने के लिए ठेके दिए हैं, लेकिन डिलीवरी में समय लगेगा। पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने कहा कि अमेरिकी सेना के पास राष्ट्रपति के निर्देश पर कार्रवाई करने के लिए सब कुछ उपलब्ध है। हालांकि, ट्रंप के दावों के विपरीत विशेषज्ञों का कहना है कि स्टॉकपाइल में कमी एक वास्तविक चुनौती है।
यह स्थिति ईरान के साथ संघर्ष के बाद उभरी है, जहां अमेरिका ने ईरान की एयर डिफेंस, मिसाइल साइटों और अन्य ठिकानों पर हमले किए। ईरान ने भी बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों से जवाब दिया, जिससे दोनों तरफ संसाधनों की भारी खपत हुई।
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान की मिसाइल क्षमता अभी भी क्षेत्रीय स्तर पर खतरा बनी हुई है, जबकि अमेरिका को अपने स्टॉकपाइल को जल्दी से जल्दी मजबूत करने की जरूरत है ताकि कोई नया संघर्ष सामने आए तो तैयार रह सके।