अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर से तब बढ़ गया जब दोनों देशों की सेनाओं ने एक दूसरे देशों के ठिकानों पर हमले किए। अमेरिका ने ईरान पर यह कहकर हमला किया कि ईरान ने हार्मुज में एक व्यापारिक कार्गो जहाज पर हमला किया था। हमले के तुरंत बाद ईरानी सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी ने इलाके में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमला किया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अमेरिका के हमले का जवाब ज़रूर दिया जाएगा। यह दोनों देशों के बीच स्विट्जरलैंड में हुए समझौते के बाद पहला सीधा सैन्य टकराव है।

कार्गो शिप पर हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दे दिया था कि अमेरिका जवाब देगा। जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या अमेरिका बदला लेगा, तो ट्रंप ने कहा था, 'आपको जल्द ही पता चल जाएगा।' इसके तुरंत बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने घोषणा की कि अमेरिकी सेना ने ईरान के अंदर सटीक हमले किए। अमेरिकी विमानों ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्रों तथा तटीय रडार साइटों को निशाना बनाया। ईरान पर आरोप है कि उसने 25 जून को सिंगापुर के झंडे वाला जहाज एम-वी इवर लवली पर एक तरफा हमला करने वाला ड्रोन दागा। यह जहाज हार्मुज से बाहर निकलते हुए ओमान के तट के पास था।
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अमेरिकी सेना ने क्या कहा?

अमेरिकी सेना सेंटकॉम ने इसे ईरान की 'बिना वजह की आक्रामकता' बताया। बयान में कहा गया, 'ईरानी बलों द्वारा व्यापारिक जहाजों पर हमला युद्धविराम समझौते का साफ उल्लंघन है।' अमेरिका ने कहा है कि वह दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक पर नौवहन की आज़ादी बनाए रखने के लिए सतर्क है। सेंटकॉम ने आगे कहा कि अमेरिकी सेना हार्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करेगी।

ट्रंप ने पहले भी ईरान पर कई एकतरफा हमलों का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि एक ड्रोन ने कार्गो जहाज के ऊपरी हिस्से को नुकसान पहुंचाया, लेकिन जहाज अपनी यात्रा जारी रखने में सफल रहा। 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे 'मूर्खतापूर्ण उल्लंघन' बताया और चेतावनी दी कि ईरान को इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

जेडी वेंस की चेतावनी

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक्स पर लिखा, 'ईरान ने युद्धविराम समझौता किया था। हमने इसका सम्मान किया। अगर उन्हें एमओयू को लेकर कोई समस्या है तो फोन उठाकर बात करें। लेकिन हिंसा का जवाब हिंसा से दिया जाएगा।'

ईरान का पलटवार

अमेरिकी हमलों के कुछ ही समय बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किए। ईरान ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि उसके खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई हुई तो उसका करारा जवाब दिया जाएगा। हालाँकि अभी तक यह साफ़ नहीं हुआ है कि किन अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया और कितना नुकसान हुआ।

ईरानी मीडिया के अनुसार ईरान ने कहा है कि उसने दिन में पहले उल्लंघन करने वाले जहाजों की ओर चेतावनी के तौर पर गोलीबारी की थी।

होर्मुज फिर बना चिंता का केंद्र

ताजा घटनाक्रम के बाद दुनिया की नजर फिर से होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिक गई है। यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और एलएनजी की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। यदि यहां तनाव बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल की कीमतों और समुद्री व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है।

ईरान ने खाड़ी देशों को भी दी चेतावनी

ईरान ने खाड़ी देशों को भी अमेरिका का साथ न देने की चेतावनी दी है। ईरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और संचालन में एक तटीय देश होने के नाते उसकी अहम भूमिका है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने कहा कि इस जलमार्ग से सुरक्षित आवाजाही तभी संभव है जब ईरान की भूमिका को स्वीकार किया जाए।

विदेशी जहाजों को भी रोका

ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक शुक्रवार को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने होर्मुज से गुजरने की कोशिश कर रहे तीन विदेशी तेल टैंकरों को भी चेतावनी देकर रोक दिया। हालांकि ईरान ने इन जहाजों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है।
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इसराइल-लेबनान में समझौता

अमेरिका-ईरान में बढ़ते इस सैन्य तनाव के बीच पश्चिम एशिया से एक सकारात्मक खबर भी सामने आई। अमेरिका की मध्यस्थता में इसराइल और लेबनान के बीच एक प्रारंभिक समझौता हुआ है, जिसका उद्देश्य इसराइल और हिज़्बुल्लाह के बीच लंबे समय से चल रही हिंसा को ख़त्म करना है। इस प्रस्ताव में हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण और दक्षिणी लेबनान से इसराइली सेना की चरणबद्ध वापसी का प्रावधान है। हालांकि हिज़्बुल्लाह ने इस समझौते को पहले ही खारिज कर दिया है।

बहरहाल, अमेरिका और ईरान के बीच यह नया सैन्य टकराव ऐसे समय में हुआ है जब दोनों देशों ने हाल ही में युद्धविराम समझौते के जरिए तनाव कम करने की कोशिश की थी।

अब दोनों देशों के बीच फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू होने से पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ने और वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। दुनिया की निगाहें अब इस बात पर हैं कि आने वाले दिनों में यह टकराव सीमित रहेगा या किसी बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप लेगा।