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पाकिस्तान: इमरान ख़ान सरकार ने जीता फ़्लोर टेस्ट, 178 वोट मिले

पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार ने फ़्लोर टेस्ट जीत लिया है। इमरान सरकार की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को लेकर सरकार के पक्ष में 178 वोट पड़े। 342 सदस्यों वाली नेशनल एसेंबली में अभी एक सीट खाली है, इसलिए बहुमत के लिए 171 वोटों की ज़रूरत थी। जीत के बाद पीटीआई के सांसदों ने इमरान की तारीफ़ में कसीदे पढ़े। 

सीनेट के चुनाव में इसलामाबाद सीट पर मिली हार के बाद से ही परेशान चल रहे पाकिस्तान के वज़ीर-ए-आज़म इमरान ख़ान को इस जीत से बड़ी राहत मिली है। विपक्षी दलों के गठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) ने फ़्लोर टेस्ट का बॉयकॉट किया था। 

इमरान की पार्टी तहरीक़-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) के पास 157 सांसद हैं और कुछ सहयोगी दलों का भी समर्थन उन्हें हासिल है। जबकि मुख्य विपक्षी दल पाकिस्तान मुसलिम लीग (नवाज़) के पास 83 और पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) के पास 55 सांसद हैं। 

पीडीएम के नेताओं ने शुक्रवार को कहा था कि सीनेट के चुनाव में इसलामाबाद सीट पर मिली जीत अपने आप में इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ अवाम का अविश्वास है। इसलामाबाद सीट पर पीटीआई के उम्मीदवार और वित्त मंत्री अब्दुल हफ़ीज़ शेख़ हार गए थे। शेख़ को साबिक (पूर्व) वज़ीर-ए-आज़म यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने मात दी है। 

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पीडीएम के मुखिया मौलाना फज़लुर रहमान ने कहा था कि विपक्ष का कोई भी सदस्य शनिवार को नेशनल एसेंबली में नहीं जाएगा। 48 सीटों के लिए हुए सीनेट के चुनाव में पीटीआई को 18, पीपीपी को 8 और पीएमएल (एन) को 5 सीटें मिली हैं। हालांकि पीटीआई को सबसे ज़्यादा सीटें मिली हैं लेकिन इसके बाद भी इसलामाबाद की हार के बाद विपक्ष ने इमरान से पद से इस्तीफ़ा देने के लिए कहा था। 

इसलामाबाद सीट पर हार मिलने के बाद इमरान ख़ान सरकार ने कहा था कि वह नेशनल एसेंबली में अविश्वास मत का सामना करेगी। चुनाव नतीजों के बाद इमरान सरकार के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा था अविश्वास मत से पता चल जाएगा कि कौन कहां खड़ा है। 

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हुंकार भर रहा पीडीएम 

पीडीएम अधिकांश विपक्षी दलों का गठबंधन है और बीते कई महीनों से इमरान सरकार के ख़िलाफ़ देश भर में रैलियां कर रहा है। इस गठबंधन में जमीअत उलेमा-ए-इसलाम के अलावा पीपीपी, पीएमएल (एन), पश्तून तहफ्फुज़ मूवमेंट, बलूचिस्तान नेशनल पार्टी (मेंगल) सहित कई सियासी जमात शामिल हैं। पीडीएम की गुजरांवाला, पेशावर, मुल्तान और लाहौर की रैलियों में काफी भीड़ जुटी थी। 

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