ईरान के साथ युद्ध के बीच अमेरिका ने परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम आईसीबीएम मिसाइल का परीक्षण क्यों किया? इस कदम के पीछे क्या रणनीतिक संदेश है और इसका मध्य पूर्व संकट पर क्या असर पड़ सकता है?
मध्य पूर्व में ईरान के साथ चल रहे बड़े युद्ध के बीच अमेरिका ने अपनी सबसे ख़तरनाक परमाणु हथियार ले जाने वाली मिसाइल का टेस्ट किया है। इसे 'डूम्सडे मिसाइल' कहा जाता है। यह मिनटमैन III इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल यानी आईसीबीएम है, जो हिरोशिमा पर गिराए गए एटम बम से 20 गुना ज़्यादा ताक़तवर परमाणु वारहेड ले जा सकती है।
अमेरिकी एयर फोर्स ग्लोबल स्ट्राइक कमांड ने कैलिफोर्निया के वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से इस मिसाइल को मंगलवार रात को लॉन्च किया। यह मिसाइल अनआर्म्ड बिना हथियार वाली थी, यानी इसमें असली परमाणु बम नहीं था। इसमें दो टेस्ट री-एंट्री व्हीकल थे। मिसाइल हजारों मील की दूरी तय करके प्रशांत महासागर में मार्शल आइलैंड्स के पास अपने लक्ष्य पर पहुंची।
अमेरिकी स्पेस फोर्स ने कहा कि यह टेस्ट जीटी-255 नाम से था। यह सालों से चल रहे रूटीन प्रोग्राम का हिस्सा है। इसमें दशकों में 300 से ज़्यादा ऐसे टेस्ट हो चुके हैं। इसका मकसद मिसाइल सिस्टम की विश्वसनीयता, सटीकता और तैयारियों की जांच करना है। कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल कैरी रे ने कहा, "यह टेस्ट हमें मिसाइल के अलग-अलग हिस्सों की जांच करने में मदद करता है। इससे हमारी पूरी आईसीबीएम फ्लीट बेहतर होती है और हमारा न्यूक्लियर ट्रायड यानी तीन तरह के परमाणु हथियारों का सिस्टम मज़बूत रहता है।'
अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि यह टेस्ट दुनिया की मौजूदा घटनाओं से जुड़ा नहीं है। यह पहले से प्लान किया गया था। लेकिन युद्ध के समय यह टेस्ट होने से दुनिया में चिंता बढ़ गई है।
'डूम्सडे मिसाइल' नाम क्यों पड़ा?
मिनटमैन III अमेरिका के सबसे मजबूत हथियारों में से एक है। यह जमीन से लॉन्च होती है और 6000 मील यानी क़रीब 9600 किलोमीटर से ज्यादा दूर तक जा सकती है। यह 15000 मील प्रति घंटा से ज्यादा स्पीड से उड़ती है, यानी महाद्वीपों को मिनटों में पार कर सकती है।
यह सॉलिड फ्यूल पर चलती है, इसलिए इसे अंडरग्राउंड साइलो से कुछ मिनटों में लॉन्च किया जा सकता है। एक मिसाइल में कई मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल लग सकते हैं, यानी एक ही मिसाइल से कई जगहों पर हमला हो सकता है। इसलिए इसे 'डूम्सडे' कहा जाता है, क्योंकि यह बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकती है। यह अमेरिका के न्यूक्लियर ट्रायड का जमीन वाला हिस्सा है, जो किसी हमले पर तुरंत जवाब देने के लिए तैयार रहता है।ईरान युद्ध: छठे दिन भी मिसाइल हमले जारी
युद्ध अब छठे दिन में है। ईरान ने गुरुवार को इसराइल पर मिसाइलों की नई बौछार की। लाखों लोग बम शेल्टर में भागे और बड़े शहरों में सायरन बजने लगे। अमेरिका में सीनेट ने एक प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिसमें ट्रंप सरकार के ईरान पर हवाई हमलों को रोकने और कांग्रेस की मंजूरी लेने की मांग थी। वोट 53-47 से गिरा, ज्यादातर पार्टी लाइन पर। इससे ट्रंप को युद्ध जारी रखने की शक्ति मिली।
अमेरिका और इसराइल ईरान के सैन्य ठिकानों, मिसाइल साइटों पर लगातार हमले कर रहे हैं। ईरान जवाब में इसराइल और अमेरिकी ठिकानों पर हमले कर रहा है। युद्ध लेबनान तक फैल गया है, जहां हिजबुल्लाह सक्रिय है। तेल की क़ीमतें बहुत बढ़ गई हैं, शेयर बाजार गिर रहे हैं। दुनिया भर में डर है कि यह युद्ध और बड़ा न हो जाए।
बहरहाल, यह टेस्ट अमेरिका की ताक़त दिखाता है कि वह किसी भी स्थिति में तैयार है। लेकिन युद्ध रोकने की कोशिशें अभी कामयाब नहीं हुई हैं। स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है।