बस्ती रेलवे स्टेशन के फोटो का प्रतीकात्मक प्रयोग किया गया है।
अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनावों को देखते हुएसांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति चरम पर है। इस योजना में सबसे सनसनीखेज हथियार है लव जेहाद, सामूहिक धर्मांतरण और देह व्यापार। इन हथियारों से खेलने में सांप्रदायिक संगठनों ने महारत हासिल कर ली है और तथाकथित सबसे तेज चैनलों और राष्ट्रीय मीडियाने इसी को अपना धर्म समझ लिया है। ताजा उदाहरण है लगभग साढ़े चार दशकों से देश के तमाम प्रतिष्ठित अखबारों, चैनलों और समाचार एजेंसियों से जुड़े पूर्वी उत्तरप्रदेश के बस्ती जनपद के प्रतिष्ठित पत्रकार मजहर आजाद के परिवार पर लव जेहाद,धर्मांतरण करवाने और देह व्यापार में शामिल होने का आरोप लगाकर जिले के माहौल को बिगाड़ने की कोशिश का।
बस्ती जनपद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर से सटा है। इसके बावजूद भारतीय जनता पार्टी को यहां अपेक्षित राजनीतिक कामयाबी हासिल नहीं हुई। इस जिले से लोकसभा के लिए 2024 में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी राम प्रसाद चौधरी चुने गए और जिले की पांच विधानसभा सीटों में से चार विधानसभा सीटों पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है। बस्ती सदर, महादेवा, रामनगर और कप्तानगंज सीटों पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है। इनके विधायक हैं महेंद्र यादव, दूधराम, राजेंद्र चौधरी और कवींद्रचौधरी। महज हर्रैया विधानसभा सीट भाजपा के खाते में आई थी जहां से अजय सिंह दोबारा अपनी सीट बरकरार रख सके हैं। ऐसे में भाजपा और उसके अनुषांगिक संगठनों की कोशिश है कि किसी तरह से ध्रुवीकरण तेज करके आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी सीटों की संख्या बढ़ाई जाए।
पत्रकार मजहर आजाद ने पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश को भेजे अपने ज्ञापन में कहा है कि बस्ती जिले में विश्व हिंदू महासंघ नाम का एक संगठन सक्रिय है जिसका जिला अध्यक्ष अखिलेश सिंह अल्पसंख्यक समुदाय विशेषकर चिकवा बिरादरी के लोगों को डराने धमकाने उनसे गाली गलौज करने और उनसे वसूली का काम करता है। वह उनसे लाइसेंस मांगता है, आधार कार्ड मांगता है और न दिखाने पर वसूली करता है। इस बात के तमाम वीडियो भी उपलब्ध हैं जिसमें वह भगवा रंग के कपड़े पहने लोगों का जुलूस निकालकर अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को गालियां दे रहा है और धमका रहा है। उसने एक महिला का सहारा लेकर उनके बेटे अजफरूल हक उर्फ ‘प्रिंस’ के विरुद्ध बलात्कार, भयादोहन, लव जेहाद, धर्मांतरण और देह व्यापार कराने का आरोप लगाकर उसमें पूरे परिवार पर आपराधिक कानून की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। प्रिंस को मुंबई से गिरफ्तार कर बस्ती लाया गया और स्थानीय यूट्यूब चैनलों और कुछ कथित रूप से देश के सबसे तेज चैनलों के माध्यम से उसे लव जेहाद, धर्मांतरण और देह व्यापार का अंतरराष्ट्रीय गिरोह का सरगना बना दिया गया।
असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी आल इंडिया मजलिसे इत्तेहादुल मुसलमीन (एआईएमआईएम) के जिला अध्यक्ष एजाज खान का आरोप है कि अजफरूल हक उर्फ प्रिंस मजलूमों के हक में लड़ता है इसलिए उसे निशाना बनाया गया है। दरअसल विश्व हिंदू महासंघ के जिलाध्यक्ष और प्रिंस के बीच जुबानी जंग के कारण जिले का माहौल बिगड़ा है। उनका कहना है कि कोई मीट की दुकान बंद करा रहा है तो कोई बिरयानी की। उन्होंने पिछले साल 29 दिसंबर को पुलिस अधीक्षक अभिनंदन सिंह को ज्ञापन देकर मांग की थी कि बिरयानी और मीट की दुकानों को जबरन बंद करवाने, फेसबुक लाइव के माध्यम से धमकी देने और धार्मिक आधार पर गाली गलौज करने वालों पर मुकदमा दर्ज किया जाए। एजाज खान का कहना है कि प्रिंस 25 दिसंबर को एआईएमआईएम में शामिल हुए और 27 को उन पर मुकदमा दर्ज करा दिया गया। लेकिन प्रिंस के समर्थन में भारत मुक्ति मोर्चा के प्रदर्शन, एआईएमआईएम के प्रदर्शन के बावजूद अभी तक अखिलेश सिंह पर मुकदमा दर्ज नहीं हुआ।
इस बीच शहर के दक्खिन दरवाजा के पास एक ओर विश्व हिंदू महासंघ और दूसरी ओर एआईएमआईएम के जवाबी प्रदर्शन होते रहे। इससे शहर के माहौल में जहर घुलता गया और तनावपूर्ण स्थिति बनती गई। हालांकि जिला प्रशासन ने बार बार आश्वस्त किया है कि किसी को कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। एएसपी श्यामकांत ने भी इस तरह का भरोसा दिलाया था। अपर जिला मजिस्ट्रेट प्रतिपाल सिंह चौहान ने 29 दिसंबर 2025 को एक आदेश जारी करके कहा है कि कोई व्यक्ति धार्मिक भावनाओं को भड़काने का काम नहीं करेगा। कोई व्यक्ति धार्मिक स्थलों की पवित्रता भंग नहीं करेगा, न कोई अफवाह फैलाएगा और न ही कोई किसी को उकसाएगा। न ही कोई हथियार लेकर चलेगा। यह आदेश शहरमें अगले दस मार्च 2026 तक प्रभावी है। फिर भी शहर में तनावपूर्ण स्थितियां पैदाकरने की कोशिशें जारी हैं।
आग में घी डालने का काम स्थानीय यूट्यूब और राष्ट्रीय चैनल कर रहे हैं। एकपक्षपाती और सांप्रदायिक राष्ट्रीय चैनल ने अपने सनसनीखेज न्यूज बुलेटिन में कहा है कि बस्ती से लव जेहाद का बड़ा मामला सामने आया है। कुख्यात हिस्ट्रीशीटर ‘प्रिंस’ ने 300 से ज्यादा लड़कियों का शोषण किया। चैनल की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह मामला सिर्फ धर्मांतरण तक सीमित नहीं है। यह जिस्म फरोशी के अंतरराष्ट्रीय धंधे तक फैला हुआ है। अभी इस मामले में सिर्फ एक आरोपी गिरफ्तार है। लेकिन इसकी जड़ें भारत से नेपाल तक फैली हैं। एक एक कर महिलाएं सामने आ रही हैं। शुरुआत में एक महिला सामने आई है। एक महिला मुंबई में है। सैकड़ों ऐसी महिलाएं हैं। जो इनके ट्रैप में हैं। यह रैकेट बस्ती से चलता था। पुलिस इस सिंडीकेट का पता लगाने में जुटी है।
लेकिन पुलिस अधीक्षक अभिनंदन सिंह, जिनका अब तबादला हो चुका है, ने अपने एक वीडियो में कहा है कि पुलिस विभाग को एक महिला से शिकायत मिली थी कि ‘प्रिंस’ नाम के एक व्यक्ति ने उनका शारीरिक शोषण किया। इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया और प्रिंस की मुंबई से गिरफ्तारी की गई। इस मामले में जैसे जैसे जांच बढ़ेगी वैसे नए तथ्य सामने आ सकते हैं। लेकिन अभी तक एक महिला के अलावा कोई और महिला सामने नहीं आई है जिसने लव जेहाद या देव व्यापार या धर्मांतरण का आरोप लगाया हो। पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्रिंस पर पहले भी आपराधिक मामले दर्ज हैं लेकिन उनमें इस तरह के आरोप नहीं हैं जो अभी लगाए जा रहे हैं। हालांकि पीड़िता ने पहले भी उस पर छेड़खानी का आरोप लगाया था। पुलिस ने राष्ट्रीय चैनल को सनसनीखेज खबर दिखाने के विरुद्ध नोटिस भी जारी किया है।
इस बीच इलाहाबाद हाई कोर्ट की जस्टिस अजय भनौत और जस्टिस सक्सेना की पीठ ने प्रिंस के अलावा परिवार के बाकी सदस्यों की गिरफ्तारी पर चार हफ्ते तक रोक लगा दी है। पत्रकार मजहर आजाद इस मामले को लेकर संविधान के अनुच्छेद 226 के तहतहाई कोर्ट गए थे। उनका कहना था कि यह दो व्यक्तियों के संबंधों के टूटने का मामला था जिसे इतना बड़ा मुद्दा बना दिया गया।
बस्ती जिले के बिगड़ते माहौल पर चिंता जताते हुए हिंदी के प्रसिद्ध कवि अष्टभुजा शुक्ल ने इस मामले के सामाजिक प्रभाव को खतरनाक बताते हुए कहा है कि मीडिया माहौल बिगाड़ रहा है। वह किसी भी समाचार को सामान्य नहीं रहने दे रहा। वह हर खबर को सनसनीखेज बना देता है। बस्ती की समरसता बिगड़ रही है। पहले इस जिले में ऐसे तत्व नहीं पाए जाते थे। अब तो यह सब ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच गया है। हिंदुत्व का विस्फोट नाक के ऊपर पहुंच गया है। उनका कहना था कि यह लोग कुआनो नदी की आरती करते हैं लेकिन इनका ध्यान उसकी गंदगी की ओर नहीं जाता। उन्होंने माना कि प्रिंस शरारती है और उसकी कुछ आपराधिक गतिविधियां रही हैं लेकिन लव जेहाद और धर्म परिवर्तन जैसा आरोप गलत है। बस्ती जिले में ऐसी कोई गतिविधि उनकी जानकारी में नहीं आई है।
बस्ती जिले के एक और प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ता अनिल सिंह का भी कहना है कि प्रिंस लड़ाई झगड़े जरूर करता रहा है और कभी कभी चिकवा समुदाय के लिए खड़ा भी होता रहा है लेकिन जिस तरह का आरोप मजहर आजाद के पूरे परिवार पर लगाया गया है वह यकीन के लायक नहीं है। वे स्वयं लंबे समय से पत्रकार हैं और उनका परिवार शहर में पढ़ा लिखा परिवार माना जाता है। उनकी दो बहनें शिक्षा विभाग में उच्च पदों पर रही हैं उनकी बेटियां भी पढ़ी लिखी हैं। लेकिन लव जेहाद और धर्मांतरण जैसे आरोप कभी सुनने में नहीं आए।
नाम न छापने की शर्त पर शहर के एक बौद्धिक का कहना था कि वास्तव में यह राजनीतिक ध्रुवीकरण करने का प्रयास है ताकि भारतीय जनता पार्टी की ओर हिंदू वोटों का झुकाव बढ़े और अल्पसंख्यक वोट समाजवादी पार्टी से छिटक कर ओवैसी की पार्टी की ओर जाएं। इस तरह भाजपा बस्ती सदर की सीट सपा से छीन ले। लेकिन इस ध्रुवीकरण की कीमत आमतौर पर शांत रहने वाला बस्ती शहर झेल रहा है।