यदि बड़ी संख्या में लोग बागी होकर पार्टी के खिलाफ निर्दलीय या किसी पार्टी में शामिल होकर चुनाव लड़ते हैं तो वह ध्रुवीकरण क्या सिरे नहीं चढ़ पाएगा जिसकी बीजेपी इस बार उम्मीद कर रही थी?
वैसे पार्टी अपने मूल जनाधार से भी पकड़ खो रही है यह पिछले कुछ दिनों से साफ़ दिख रहा है। पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए पंजाबी भाषी लोग हरियाणा में हमेशा से पार्टी का बड़ा जनाधार रहे हैं। हरियाणा से आने वाली तमाम रिपोर्ट बता रही हैं कि पिछले दस साल में इस वर्ग का भी बीजेपी से मोहभंग हो गया है।