क्या जनता को हक है कि वो अपने पीएम की डिग्री देख सके? अगर पीएम की डिग्री फर्जी हो तो क्या कार्रवाई होगी? हाल में पीएम मोदी की डिग्री पर मचे बवाल से ऐसे ही सवाल उठ रहे हैं।
इन सवालों को जानने से पहले यह जान लें कि आख़िर विवाद क्या है। क्या आपको याद है जब बीजेपी ने खुद अपने एक्स हैंडल पर पीएम मोदी की डिग्रियाँ 9 मई 2016 को शेयर की थीं! लेकिन मोदी की इन डिग्रीयों पर लगातार विवाद उठते रहे हैं कि पीएम मोदी की ये डिग्रियां असली है या फर्जी। वैसे, ADR यानी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के मुताबिक पीएम मोदी पोस्ट ग्रैजुएट हैं।
क्या पीएम की डिग्री आम लोगों को देखने का अधिकार नहीं?
लेकिन विपक्ष का आरोप है कि पीएम की शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी जितनी भी जानकारी सोशल मीडिया या इंटरनेट पर दिखती हैं वो सब फर्ज़ी हैं। इसलिए बार बार विपक्ष पीएम की असली डिग्री की मांग करता है। ये मुद्दा अभी हाल में तब फिर सुर्खियों में आ गया जब दिल्ली हाई कोर्ट ने पीएम मोदी की डिग्री सार्वजनिक करने के बारे में दाखिल याचिका खारिज कर दी। दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि किसी व्यक्ति की मार्कशीट डिग्री या उसने किस ज्ञेणी में कोई परीक्षा पास की है ये सब उसका निजी मामला है। इसलिए आरटीआई के ज़रिए उसे किसी तीसरे पक्ष को नहीं बताया जा सकता।
हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर उम्मीदवारों की डिग्री से जुड़ा सुप्रीम कोर्ट का 2016 का एक और फैसला सुर्खियों में आ गया। इस फैसले में कहा गया था कि वोटरों को अपने उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता जानने का पूरा अधिकार है। हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को लेकर लोग सवाल उठा रहे हैं कि दोनों फैसलों में ऐसा विरोधाभास क्यों?
सुप्रीम कोर्ट का 2016 का फैसला
बात 2012 की है। मणिपुर के काकचिंग सीट से पृथ्वीराज नाम के नेता ने चुनाव लड़ा और जीत भी गए। लेकिन बाद में किसी ने उनके खिलाफ शिकायत कर दी कि पृथ्वीराज ने अपने नामांकन पत्र में झूठ बोलकर एमबीए की डिग्री दिखाई। जब मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा तो साफ हो गया कि पृथ्वीराज ने एमबीए की फर्जी डिग्री दिखाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीर मुद्दा माना और कहा– ऐसा झूठ सिर्फ वोटरों का भरोसा नहीं तोड़ता, बल्कि देश के लोकतंत्र को भी नुकसान पहुंचाता है। इसलिए कोर्ट ने पृथ्वीराज का चुनाव ही रद्द कर दिया। लेकिन जब पीएम की डिग्री पर सवाल उठे और बार-बार उनकी डिग्री दिखाए जाने की मांग की गई लेकिन हर बार ये मांगें सुनी नहीं गईं।
क्या पीएम की डिग्री आम लोगों को देखने का अधिकार नहीं?
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क्या पीएम की डिग्री आम लोगों को देखने का अधिकार नहीं?
क्या पीएम की डिग्री आम लोगों को देखने का अधिकार नहीं?
क्या पीएम की डिग्री आम लोगों को देखने का अधिकार नहीं?
दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले में क्या-क्या कहा गया?
क्या पीएम की डिग्री आम लोगों को देखने का अधिकार नहीं?
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साफ़ जाहिर है कि सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला वोटर के अधिकार पर आधारित था जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट ने माना कि एक वोटर को वोट देने का फैसला करने के पहले ये जानने का पूरा अधिकार है कि जो उम्मीदवार चुनाव में खड़े हुए हैं वे कौन हैं, क्या करते हैं, कितनी संपत्ति के मालिक हैं और उनकी शैक्षणिक योग्यता क्या है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में इस बात को नज़रअंदाज करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि RTI के तहत किसी तीसरे व्यक्ति को किसी की शैक्षणिक योग्यता जानने की ज़रूरत नहीं है।