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क्या जगनमोहन रेड्डी जस्टिस रमन्ना पर दबाव डालने की कोशिश कर रहे हैं?

क्या आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी अपने ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामलों को प्रभावित करने और जस्टिस एन. वी. रमन्ना पर दबाव डालने के लिए उन पर तरह-तरह के आरोप लगा रहे हैं? क्या वह जज को निशाने पर इसलिए ले रहे हैं कि वह उनके ख़िलाफ़ कोई फ़ैसला न दें? क्या इस तरह रेड्डी न सिर्फ न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि जज को ब्लैकमेल करने की कोशिश भी कर रहे हैं?
हम आपको बता दें कि जगनमोहन रेड्डी ने मुख्य न्यायधीश एस. ए. बोबडे को एक चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में जस्टिस रमन्ना पर गंभीर आरोप लगाये गए हैं। जस्टिस रमन्ना अगले मुख्य न्यायधीश होंगे। 6 अक्टूबर को लिखी इस चिठ्ठी को 9 अक्टूबर को सार्वजनिक कर दिया गया। इस चिट्ठी में कहा गया है कि जस्टिस रमन्ना की दो बेटियों के नाम अमरावती भूमि घोटाले में हैं और इसलिए वह इससे जुड़े मामले में न्याय प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं, इससे जुड़े और दूसरे कई और मामले भी कुछ ख़ास जजों के पास ही भेजे जा रहे हैं।
जगनमोहन रेड्डी ने लिखा था, “जब वाईएसआर कांग्रेस पार्टी मई 2019 में सत्ता में आई और 24 जून 2019 को चंद्रबाबू नायडू के समय दिए गए सभी ठेकों की जाँच का आदेश दिया गया, उस समय से ही जस्टिस एन. वी. रमन्ना  न्याय प्रशासन को प्रभावित कर रहे हैं।”
इस चिठ्टी को लिखने और उसे सार्वजनिक करने से  कई तरह के सवाल उठते है कि आखिर जगनमोहन रेड्डी की मंशा क्या है? क्या इस चिट्ठी और उनके खिलाफ चल रहे मामलों के बीच कोई संबंध है?

क्या है मामला?

दरअसल, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री पर आय से अधिक संपत्ति रखने के मामलों में मुक़दमे चल रहे हैं। उन्होंने 11 याचिकाएँ दायर कर रखी हैं और कहा है कि उन्हें निजी तौर पर अदालत में पेश होने से छूट दी जाए। वह खुद 7 अक्टूबर को अदालत में पेश हुए थे। जगनमोहन रेड्डी के प्रधान सलाहकार अजेय कोल्लम ने बोबडे को लिखी चिट्ठी 9 अक्टूबर को सार्वजनिक कर दी। यह शनिवार को हुआ था। रविवार को यह ख़बर प्रमुखता से छपी और सोमवार को इस पर सुनवाई हो रही है। 

जगनमोहन पर आरोप

आय से अधिक संपत्ति के मामलों के अलावा एनफोर्समेंट डायरेक्ट्रेट ने भी मनी लांडरिंग के मामले में पाँच केस जगनमोहन के खिलाफ कर रखे हैं।

इन सारे मामलों की शुरुआत 2011 में हुयी जब उनके पिता वाई. एस. राजशेखर रेड्डी (उस वक्त संयुक्त आँध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री) की अकस्मात् मौत के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ी और वाईएसआर कांग्रेस नाम से नई पार्टी बनायी। तब उनके ऊपर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाये गये थे। कांग्रेस विधायक शंकर राव की याचिका पर आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने 10 अगस्त 2011 को सीबीआई को निर्देश दिया था कि वह रेड्डी पर लगे भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जाँच करे।

सीबीआई के एंटी- करप्शन ब्यूरो ने 17 अगस्त 2011 को रेड्डी के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की थी। उनके ख़िलाफ़ आपराधिक साजिश रचने, धोखाधड़ी करने, जालसाजी करने, फ़र्जी काग़ज़ात का इस्तेमाल करने और दूसरे मामलों से जुड़ी धाराएं लगाई गई गई थीं।

सीबीआई ने 68 पेजों की अपनी रिपोर्ट 31 मार्च, 2012 को सौंपी थी। इसमें रेड्डी को मुख्य अभियुक्त बनाया गया था।

जगनमोहन पर 31 मामले

जगनमोहन रेड्डी पर कुल मिला कर 31 मामले चल रहे हैं। उन्होंने विधानसभा चुनाव का पर्चा भरते समय खुद यह जानकारी दी थी। ये मामले ईडी और सीबीआई ने लगाए हैं और इनसे जुड़ी एफ़आईआर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के अलग-अलग थानों में दर्ज कराई गई थीं। रेड्डी पर भारतीय दंड संहिता के तहत 20 तरह के आरोप लगाए गए थे। 

जगनमोहन रेड्डी पर ख़तरनाक हथियार रखने, दंगा करने, किसी को चोट पहुँचाने या हत्या करने की तैयारी करने के भी आरोप लगाए गए थे। उन पर किसी को ज़बरन बंदी बनाए रखने, डराने-धमकाने, हमला करने, सार्वजनिक संपत्ति को नु़क़सान पहुँचाने और सरकारी कर्मचारी को अपना काम करने से रोकने के आरोप भी हैं। 

जगनमोहन रेड्डी पर यह आरोप भी है कि जब उनके पिता वाई. एस. राजशेखर रेड्डी आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, उन्हें प्रभावित कर निजी कंपनियों को सस्ते में खनन के अधिकार दिलवाए और इसके बदले उनसे फ़ायदे लिए थे। सीबीआई की जाँच और उसकी रिपोर्ट के आधार पर इनफ़ोर्समेंट डाइरेक्टरेट ने जगनमोहन रेड्डी पर 5 मुकदमे कर दिए।

मामला सुप्रीम कोर्ट में

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस साल 17 जनवरी को सीबीआई की विशेष अदालत में याचिका दायर कर कहा कि जबतक सीबीआई के दूसरे मामलों में सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, मनी लॉन्डरिंग का मामले की सुनवाई पर रोक लगा दी जाए। अदालत ने इसे खारिज कर दिया। 

अश्विनी उपाध्याय नामक वकील ने 2016 में सभी सजा पाए विधायकों पर प्रतिबंध लगाने की एक याचिका दायर की थी। इसकी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में रंजन गोगोई ने की थी। उन्होंने ही इस तरह के मामलों में विशेष अदालत के गठन का आदेश दिया था। इसके बाद ही पूरे देश में इस तरह के 12 अदालतों की स्थापना हुई थी। 
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एन. वी. रमन्ना की खंडपीठ के पास यह मामला 4 मार्च 2020 को गया। उन्होंने 5 मार्च को आदेश दिया कि विधायकों से जुड़े सभी लंबित मामलों का विवरण उन्हें दिया जाए। 
जस्टिस रमना ने 16 सितंबर को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट से कहा कि वह विशेष बेंच का गठन करे और सुनवाई में हो रही प्रगति की जानकारी उन्हें देती रहे। 
जगनमोहन रेड्डी को चंचलगुड़ा जेल में 16 महीने बिताने पड़े थे। उन्हें सीबीआई ने 27 मई 2012 को गिरफ़्तार किया था। वे 24 सितंबर 2013 को जेल से रिहा हुए थे। 
सवाल घूम कर वहीं पहुँचता है कि जगनमोहन रेड्डी ने मुख्य न्यायाधीश को चिट्ठी लिखने का यह समय क्यों चुना?
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