हिमंता बिस्वा सरमा ने अब तो 'हेट स्पीच' की सारे हदें पार कर दीं। असम बीजेपी ने एक एआई वीडियो पोस्ट किया, जिसमें असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को टोपी पहने दो आदमियों पर राइफल से निशाना लगाते दिखाया गया था। इस वीडियो में एक व्यक्ति कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई जैसा दिख रहा था। ये 'हेट स्पीच' की किस श्रेणी में आता है, यह इससे ही समझा जा सकता है कि बीजेपी को इस पोस्ट को हटाना पड़ा। सोशल मीडिया पर भारी विरोध के बाद बीजेपी ने यह पोस्ट अपने एक्स अकाउंट से हटा लिया।

यह घटना 7 फरवरी 2026 को हुई। वीडियो का कैप्शन था 'पॉइंट ब्लैंक शॉट'। वीडियो में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को एयर राइफल चलाते हुए दिखाया गया है। उसके साथ एआई से बने चित्र लगाए गए हैं, जिसमें स्कलकैप और दाढ़ी वाले दो आदमी दिख रहे हैं। गोलियाँ उन पर लगती दिखाई गई हैं। वीडियो के अंत में सरमा को काउबॉय जैसे कपड़ों में बंदूक़ लिए दिखाया गया है। उस पर 'बांग्लादेशियों पर कोई दया नहीं', 'तुम पाकिस्तान क्यों नहीं गए?', 'विदेशी-मुक्त असम' और 'कोई माफी नहीं' जैसे नारे लिखे थे।

यह नरसंहार का आह्वान: कांग्रेस

कांग्रेस ने इस वीडियो की कड़ी निंदा की। कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि यह वीडियो अल्पसंख्यकों की 'पॉइंट-ब्लैंक हत्या' को बढ़ावा देता है। उन्होंने इसे नरसंहार का आह्वान बताया। कांग्रेस ने कहा कि यह फासीवादी सोच दिखाता है, जो दशकों से नफरत फैला रही है।

कांग्रेस की पोस्ट में आगे कहा गया, 'यह इस फासीवादी सरकार के असली चेहरे की झलक है, जिसने दशकों से इस नफ़रत को पाला है और पिछले 11 सालों में इसे नॉर्मल बनाने की कोशिश की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, समाज में नफ़रत और ज़हर फैलाने के इस काम के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।'
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि वीडियो हटाना काफी नहीं है। यह मुसलमानों पर हमला है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि वे 'सबका साथ, सबका विकास' की बात करते हैं, लेकिन उनके पसंदीदा नेता हिमंता सरमा ऐसा वीडियो कैसे पोस्ट करवा सकते हैं?

टीएमसी का भी हमला

टीएमसी ने इसे नरसंहार और सामूहिक हत्या का ग्रीन सिग्नल कहा। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने भारत की राजनीति को गटर में ले आया है। संविधान की धर्मनिरपेक्षता को कुचल दिया गया है। सीपीआई(एम) ने इसे जातीय सफाया और नरसंहार का खुला आह्वान बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री को जेल भेजने और सुप्रीम कोर्ट से तुरंत कार्रवाई की मांग की।

बीजेपी का रुख

बीजेपी असम के प्रवक्ता रंजीब कुमार सरमा ने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा, 'कोई कमेंट नहीं। पोस्ट हटा दिया गया है, कुछ कहने को नहीं है।' सोशल मीडिया कन्वीनर बिस्वजीत खौंड ने भी कोई टिप्पणी नहीं की। असम बीजेपी के एक्स हैंडल पर 2 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं।

पहले भी ऐसा हुआ

सितंबर 2025 में भी असम बीजेपी ने एक एआई वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें 'बीजेपी के बिना असम' दिखाया गया था। उसमें टोपी वाले लोग बीफ बेचते, चाय बागान, एयरपोर्ट, स्टेडियम में दिखाए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने उस पर नोटिस जारी किया था। तब खौंड ने कहा था कि उनका कंटेंट लोगों की भावनाओं के अनुसार होता है। ट्विटर पर वे ज्यादा आक्रामक रहते हैं।

यह वीडियो असम में मुस्लिम समुदाय, खासकर बांग्लादेशी मूल के लोगों के खिलाफ चल रही बहस के बीच आया है। मुख्यमंत्री हिमंता सरमा पहले भी 'घुसपैठियों' के खिलाफ बोलते रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि यह समाज में नफरत फैलाने और ध्रुवीकरण करने की कोशिश है।

हिमंता बिस्वा सरमा

'मियां को परेशान करें, रिक्शा किराया 5 रुपये हो तो 4 दें'

हिमंता बिस्वा सरमा ने हाल ही में महात्मा गाँधी के 'असहयोग' और 'सिविल डिसओबिडियंस' यानी नागरिक अवज्ञा के सहारे मियाँ को बाहर निकालने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि इनके सहारे से ऐसा माहौल बनाया जाए जिसमें वे असम में रह न सकें। उनका ताज़ा बयान तब आया है जब उनकी मियां वाले बयान पर चौतरफ़ा आलोचना हो रही है।

उन्होंने शिवसागर जिले में पिछले बुधवार को एक कार्यक्रम के दौरान कहा था, 'हर रोज हम 20-30 लोगों को बाहर भेजते हैं। लेकिन हम उन्हें लाइन में खड़ा करके ट्रेन में बिठाकर बांग्लादेश नहीं भेज सकते। इसके बजाय ऐसा इंतजाम होना चाहिए कि वे खुद चले जाएं। हमने 1.5 लाख बीघा जमीन से बेदखली की है। उन्हें जमीन नहीं मिलेगी तो वे असम छोड़कर चले जाएंगे।'

अदालत में जाने की ज़रूरत नहीं: सीएम

मुख्यमंत्री ने कहा, 'मेरा विचार है कि ऐसा माहौल बनाया जाए जिसमें वे असम में रह न सकें। उन्हें जमीन मत दो, वाहन मत दो, रिक्शा मत दो, ठेला मत दो। फिर बांग्लादेशी खुद चले जाएंगे। हर रोज 20-25 लोग बांग्लादेश भेजे जा रहे हैं, किसी में अदालत जाने की हिम्मत नहीं है।'
हिमंता ने इसे महात्मा गांधी की नॉन-कोऑपरेशन और सिविल डिसओबिडियंस से जोड़ा। उन्होंने कहा, 'महात्मा गांधी ने हमें दो चीजें सिखाईं- असहयोग और नागरिक अवज्ञा। जब असम के लोग असहयोग और नागरिक अवज्ञा करेंगे तो वे खुद चले जाएंगे। रिक्शा में चढ़ने से पहले सोचो कि किसका रिक्शा है।' इसके साथ ही उन्होंने 'मियां' और 'मुस्लिम' में फर्क करने की बात कही। उन्होंने कहा, 'मियां वे हैं जो बांग्लादेश से अवैध रूप से आए। मुस्लिम अलग हैं। मियां के नाम पर मुस्लिमों को परेशान मत करो, मुस्लिम के नाम पर मियां को संरक्षण मत दो। बांग्लादेश से आए मियां से कोई संबंध मत रखो।' हिमंता भले ही मियां का मतलब बांग्लादेशी मुस्लिम बता रहे हैं, लेकिन आरोप है कि इसके नाम पर वह पश्चिम बंगाल के मुस्लिमों को निशाना बना रहे हैं।

बहरहाल, अभी वीडियो हटा दिया गया है, लेकिन कई लोगों ने इसे डाउनलोड कर शेयर कर दिया है। राजनीतिक हलचल तेज है और न्यायपालिका से कार्रवाई की मांग बढ़ रही है।