असम के पश्चिम कार्बी आंग्लोंग जिले के खेरौनी इलाके में मंगलवार शाम को फिर से हिंसा भड़क उठी। प्रदर्शनकारियों ने बाजार में दुकानें जलाईं, पुलिस पर पत्थर और तीरों से हमला किया। इससे कई लोग और पुलिसकर्मी घायल हो गए। स्थिति को देखते हुए कार्बी आंग्लोंग और पश्चिम कार्बी आंग्लोंग जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएँ तुरंत बंद कर दी गईं। सरकार को डर है कि सोशल मीडिया पर अफवाहें और भड़काऊ संदेश फैलने से हालात और बिगड़ सकते हैं।

यह हिंसा सोमवार से चल रही है। सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने कार्बी आंग्लोंग ऑटोनॉमस काउंसिल यानी केएएसी के चीफ एग्जीक्यूटिव मेंबर और बीजेपी नेता तुलिराम रोंगहांग के पैतृक घर को आग लगा दी थी। इसके अलावा खेरौनी बाजार में करीब 15 दुकानें और कुछ मोटरसाइकिलें जला दी गईं। मंगलवार को मंत्री रानोज पेगू के इलाके से चले जाने के बाद भीड़ फिर उग्र हो गई और बाजार में तोड़फोड़ शुरू कर दी।
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पुलिस पर हमला, 38 से ज्यादा घायल

असम के डीजीपी हरमीत सिंह खुद मौके पर मौजूद हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने पत्रकारों से कहा, 'मैं खुद भीड़ से बात करने गया था। लेकिन अब वे दो तरफ से पुलिस पर हमला कर रहे हैं। करीब 38 पुलिसकर्मी घायल हो चुके हैं, जिनमें आईपीएस अधिकारी भी शामिल हैं। कल उन्होंने वादा किया था कि दुकानें नहीं जलाएंगे, लेकिन दुकानों से गैस सिलिंडर निकालकर फोड़े। तीर और पत्थरों से हमला कर रहे हैं। इस तरह कोई हल नहीं निकलेगा।'

पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। मंगलवार को भी कई लोग घायल हुए। अतिरिक्त फोर्स, सीआरपीएफ़ और कमांडो तैनात किए गए हैं।

हिंसा की वजह क्या है?

यह विवाद आदिवासी इलाकों में जमीन कब्जे को लेकर है। कार्बी आंग्लोंग और पश्चिम कार्बी आंग्लोंग आदिवासी बहुल पहाड़ी जिले हैं, जो कार्बी आंग्लोंग ऑटोनॉमस काउंसिल के अंतर्गत आते हैं। यहां विलेज ग्रेजिंग रिजर्व यानी वीजीआर और प्रोफेशनल ग्रेजिंग रिजर्व यानी पीजीआर नाम की सरकारी जमीनें हैं, जो पशुओं के चरने के लिए हैं। कार्बी आदिवासी संगठनों का लंबे समय से दावा है कि इन जमीनों पर बिहारी, नेपाली और अन्य गैर-आदिवासी परिवारों ने अवैध कब्जा कर लिया है।
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गुवाहाटी हाईकोर्ट में एक याचिका की वजह से पिछले साल बेदखली प्रक्रिया रुक गई थी, जिससे आदिवासी संगठन नाराज़ हैं। पिछले दो हफ्तों से नौ लोग पश्चिम कार्बी आंग्लोंग के फेलांगपी में अनशन पर बैठे थे। वे इन कब्जा करने वालों को हटाने की मांग कर रहे थे। सोमवार को पुलिस ने अनशन करने वालों को गुवाहाटी ले जाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस के अनुसार अफवाह फैल गई कि उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि उनको स्वास्थ्य जाँच के लिए ले जाया गया था। इससे गुस्सा भड़क उठा और हिंसा शुरू हो गई।

मंत्री के लौटते ही हिंसा

मंगलवार को कैबिनेट मंत्री रानोज पेगू खेरौनी पहुंचे। उन्होंने कार्बी समुदाय के लोगों से मिलकर अनशन खत्म करने की अपील की। मंत्री ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने उनकी बात मान ली और अनशन को वापस लेने की घोषणा कर दी थी। पेगू ने कहा, 'मैंने खेरौनी फेलांगपी में कार्बी समुदाय के सदस्यों से मुलाकात की। वे वीजीआर, पीजीआर में कब्जा हटाने की मांग कर रहे थे। मेरी अपील पर उन्होंने अनशन को खत्म कर दिया और त्रिपक्षीय बातचीत के लिए राजी हो गए। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा 26 दिसंबर को इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इसमें काउंसिल और सरकार दोनों शामिल होंगे।' लेकिन मंत्री के लौटने के बाद फिर हिंसा शुरू हो गई।
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सरकार ने क्या क़दम उठाए?

  • दोनों जिलों में धारा 163 लगाई गई, जिससे पाँच या ज्यादा लोगों के जमावड़े पर रोक लग गई।
  • कार्बी आंग्लोंग में शाम 5 बजे से सुबह 6 बजे तक नाइट कर्फ्यू।
  • इंटरनेट बंद करके अफवाहें रोकने की कोशिश।
  • स्थिति को संभालने के लिए डीजीपी और मंत्री मौके पर पहुँचे। 
  • मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि स्थिति संवेदनशील है, लेकिन जल्द हल निकलेगा।
यह मामला आदिवासी अधिकारों, जमीन विवाद और समुदायों के बीच तनाव को दिखाता है। 26 दिसंबर की बैठक से उम्मीद है कि शांति बहाल होगी, लेकिन फिलहाल इलाका तनावपूर्ण है।