असम चुनाव से ठीक पहले इस्तीफ़ा देने वाले भूपेन कुमार बोरा ने कुछ घंटे बाद ही इसे वापस ले लिया। तो क्या उन्होंने पार्टी पर दबाव बनाने के लिए यह क़दम उठाया था या फिर कुछ और वजह थी?
असम कांग्रेस के नेता भूपेन कुमार बोरा ने सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को अपना इस्तीफा देने के कुछ घंटों बाद ही उन्होंने इसे वापस ले लिया। मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि कांग्रेस नेता गौरव गोगोई, भंवर जितेंद्र सिंह और प्रद्युत बोरदोलोई, रायजोर डोल के चीफ अखिल गोगोई के साथ भूपेन बोरा से बातचीत करने और उन्हें पार्टी में बने रहने के लिए मनाने के लिए गुवाहाटी में उनके घर गए।
भूपेन बोरा ने सुबह 8 बजे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को अपना इस्तीफा भेजा था। उन्होंने कहा था, 'यह आत्म-सम्मान का सवाल है। मैंने पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को पार्टी के चलाए जाने के तौर-तरीक़ों पर अपनी चिंताएं बताई हैं।' उन्होंने एक उदाहरण दिया और कहा था कि पिछले शुक्रवार को माजुली में कांग्रेस की रैली थी, जिसमें गौरव गोगोई, देवब्रत सैकिया और राकिबुल हुसैन साथ थे। लेकिन पार्टी ने फैसला नहीं लिया कि कौन जाए, कौन न जाए। बोरा ने कहा था, 'अगर पार्टी इतने छोटे फैसले नहीं ले पाती, तो पार्टी का भविष्य क्या होगा?' कांग्रेस ने सुबह कहा था कि उनका इस्तीफ़ा अभी मंजूर नहीं हुआ और पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व अब उन्हें मनाने की कोशिश कर रहा है। इस बीच बीजेपी नेता और राज्य के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने बोरा को एक तरह से बीजेपी में शामिल होने का संकेत दिया था।
बोरा ने इस्तीफा देने के दौरान कहा था कि उन्हें पार्टी में अनदेखा किया जा रहा है और उनको सही जगह नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा था कि उन्होंने 32 साल कांग्रेस में रहकर सेवा की है, लेकिन अब आत्म-सम्मान बचाने के लिए इस्तीफा दिया। उन्होंने यह भी कहा था, 'मैं कुछ छिपाकर नहीं करूंगा। जल्द ही मीडिया से पूरी बात करूंगा।'
कांग्रेस ने क्या कहा?
कांग्रेस की दिल्ली लीडरशिप ने इस्तीफा स्वीकार नहीं किया था। पार्टी सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्टों में कहा गया था कि वे हर संभव कोशिश कर रहे हैं कि भूपेन बोरा इस्तीफा वापस लें। असम के लिए कांग्रेस प्रभारी जितेंद्र सिंह गौरव गोगोई और भूपेन बोरा से मिल रहे हैं। एक वरिष्ठ नेता ने कहा था कि राजनीति में बातचीत से इस्तीफे वापस हो जाते हैं। हम उन्हें कांग्रेस परिवार में रखने की पूरी कोशिश करेंगे।
भूपेन बोरा कौन हैं?
55 साल के भूपेन बोरा 1994 से कांग्रेस में जुड़े। वह 2006-2016 तक बिहपुरिया सीट से दो बार विधायक रहे हैं। असम प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष के तौर पर 2021 से जून 2025 तक रहे। इसके बाद गौरव गोगोई अध्यक्ष बने हैं।
बोरा के अध्यक्ष रहते असम कांग्रेस को कई हार मिलीं। कई नेता और कार्यकर्ता पार्टी छोड़ गए।
बोरा का मुख्य काम था भाजपा विरोधी क्षेत्रीय गठबंधन बनाना। इसमें राइजोर डॉल, असम जतियो परिषद, सीपीआई, सीपीआई(एम) और ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस जैसे दल शामिल थे। 2024 लोकसभा चुनाव में यह गठबंधन सफल रहा, लेकिन उप-चुनाव में सीट बंटवारे पर समस्या आई। अन्य दल कांग्रेस पर आरोप लगाते हैं कि केंद्रीय लीडरशिप उन्हें जगह नहीं देती।
हाल ही में गौरव गोगोई अध्यक्ष हैं, लेकिन बोरा का इन पार्टियों से अच्छा रिश्ता है। इसलिए पिछले हफ्ते उन्हें गठबंधन की बातचीत आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई। लेकिन कुछ दिनों में ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया। लगता है उन्हें सीमित भूमिका मिलने से नाराजगी हुई।
हिमंता का ऑफ़र का संकेत
जैसे ही बोरा के इस्तीफ़े की ख़बर फैलने लगी थी, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने उन्हें 'असम कांग्रेस पार्टी का आखिरी हिंदू नेता' बताते हुए कहा था कि वह मंगलवार शाम को उनके घर जाएंगे। सरमा ने कहा, 'तीन साल पहले, हम भूपेन बोरा का स्वागत करने और उन्हें एक सुरक्षित सीट देने के लिए तैयार थे।'
सरमा ने आगे दावा किया था कि जब से उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा असम कांग्रेस चीफ गौरव गोगोई के पाकिस्तान से लिंक हैं, तब से जमीनी स्तर के 'हिंदू कांग्रेस नेताओं' की एक लहर उनके साथ जुड़ने लगी है। उन्होंने यह भी अनुमान लगाया कि अगले दो हफ़्ते में लगभग पांच और विधायक पार्टी बदल लेंगे।हिमंता ने दावा किया था, 'असम में कांग्रेस की स्थिति बेहद ख़राब है। उम्मीदवारों के चयन के लिए तीन ऑब्जर्वर यहां आए हैं। उन्हें माइनॉरिटी कम्युनिटी का एक विधायक सौंपा गया है। स्थिति वाक़ई बहुत ख़राब है। असम में कांग्रेस के कई जिला ऑफिसों में, मीटिंग एक खास कम्युनिटी की धार्मिक प्रार्थना से शुरू होती हैं। असम में कांग्रेस तेजी से बदल रही है। लोग इसे नोटिस कर रहे हैं। भूपेन बोरा का इस्तीफा एक सांकेतिक संदेश है कि कांग्रेस ने अपना आखिरी हिंदू नेता खो दिया है।'
बोरा के इस्तीफे की ख़बरों के बीच, असम के कई विपक्षी नेता उनके घर पहुंच गए हैं। पत्रकारों से बातचीत में बोरा ने कहा कि रायजोर पार्टी के अखिल गोगोई समेत कई नेताओं ने उनसे संपर्क किया है।
असम में 126 सीटों पर चुनाव होने हैं। कांग्रेस विपक्षी गठबंधन बनाकर भाजपा को चुनौती देना चाहती है। असम में पार्टी पहले से कमजोर है। बोरा के जाने से संगठन और गठबंधन पर असर पड़ सकता था। वे क्षेत्रीय दलों से अच्छे संपर्क रखते हैं। यह घटना असम की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकती थी। लेकिन फिलहाल, कांग्रेस ने स्थिति को संभाल लिया है, ऐसा लगता है।