असम में मतदाता सूची संशोधन के दौरान बीजेपी की शिकायतों के बाद लाखों संदिग्ध वोटरों के नाम हटाए गए। बड़ी संख्या में लोगों ने दावा किया कि सही नाम को हटाने के लिए फर्जी शिकायतें दी गईं। विपक्ष ने पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
जहाँ असम में ग़लत तरीक़े से लाखों सही मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटे जाने के आरोप लग रहे हैं वहाँ मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने खुद ही यह दावा किया है कि बीजेपी कार्यकर्ताओं की शिकायतों के आधार पर लाखों संदिग्ध वोटरों के नाम हटाए गए हैं। मुख्यमंत्री का यह दावा तब आया है जब चुनाव आयोग ने राज्य के लिए अंतिम मतदाता सूची जारी की है। इसमें से क़रीब ढाई लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। राज्य में मतदाताओं के नाम काटे जाने पर विवाद हुआ है क्योंकि आरोप लग रहे हैं कि ग़लत तरीक़े से फॉर्म 7 भरकर ज़िंदा मुस्लिम मतदाताओं के नाम मृत बताकर कटवाए गए।
इन आरोपों के बीच ही असम में चुनावी मतदाता सूची की विशेष जांच पूरी हो गई है। अंतिम मतदाता सूची में कुल 2 करोड़ 49 लाख 58 हजार 139 योग्य वोटर शामिल हैं। इनमें 1 करोड़ 24 लाख 82 हजार 213 पुरुष, 1 करोड़ 24 लाख 75 हजार 583 महिलाएँ और 343 थर्ड जेंडर के वोटर हैं। असम के मुख्य चुनाव अधिकारी अनुराग गोयल ने बताया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में 2 करोड़ 52 लाख 1 हजार 624 वोटर थे। लेकिन स्पेशल रिवीजन के दौरान अंतिम सूची से 2 लाख 43 हजार 485 वोटरों के नाम हटा दिए गए।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने कहा है कि बीजेपी कार्यकर्ताओं की शिकायतों के आधार पर लाखों संदिग्ध वोटरों के नाम हटाए गए हैं। यह पहली बार हुआ है जब असम समझौते के बाद इतनी बड़ी संख्या में संदिग्ध नामों को सूची से बाहर किया गया।
'बीजेपी कार्यकर्ताओं की मेहनत से हुआ यह काम'
मुख्यमंत्री हिमंता ने कहा, 'बीजेपी कार्यकर्ताओं ने शिकायतें दर्ज कराईं और उन शिकायतों के आधार पर बहुत सारे नाम हटाए गए। असम समझौते के बाद पहली बार इतनी बड़ी संख्या में संदिग्ध वोटरों के नाम हटे हैं। यह असम में पहली बार हुआ है।' उन्होंने यह भी कहा कि कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने की कोशिशें हुईं, लेकिन वे डटे रहे। सरमा ने कहा, 'उनकी हिम्मत की वजह से हम विदेशियों के नाम हटाने में कामयाब हुए।' उन्होंने जोर देकर कहा कि असम में अवैध विदेशियों और बांग्लादेशियों के ख़िलाफ़ लड़ाई जारी रहेगी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर में और नाम हटाए जाएंगे।'मियां' मुसलमानों को निशाना बनाने का आरोप
यह बदलाव विवादों में घिर गया है। पिछले महीने मुख्यमंत्री सरमा ने खुलकर कहा था कि उन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं को 'मियां' के खिलाफ शिकायतें दर्ज करने के लिए कहा है। 'मियां' शब्द को अपमानजनक माना जाता है। सरमा ने दो हफ़्ते पहले कहा था,जो भी शिकायतें हुई हैं, वे मेरे आदेश पर हुई हैं। मैंने खुद बीजेपी वालों से कहा है कि मियांओं के खिलाफ शिकायतें देते रहो। इसमें छिपाने की कोई बात नहीं है। मैंने मीटिंग कीं, वीडियो कॉन्फ्रेंस कीं और कहा कि जहां मौका मिले, फॉर्म 7 भरकर दें। ताकि वे थोड़ा दौड़ें, परेशान हों और समझें कि असमी लोग अभी जिंदा हैं। हिमंता बिस्व सरमा
असम सीएम
उन्होंने यह भी कहा कि 'मियां' बांग्लादेश में वोट दें, असम में नहीं। मुख्यमंत्री ने कहा, 'मेरा काम मियांओं को परेशान करना है। अगर मियां परेशान नहीं होंगे तो वे दुलियाजान तक पहुंच गए हैं।' सरमा ने कहा, 'जो भी परेशान कर सकता है, करे। रिक्शा में अगर किराया 5 रुपये है तो 4 रुपये दो। तभी वे असम छोड़ेंगे। हम खुले तौर पर कह रहे हैं कि मियांओं के खिलाफ हैं। पहले लोग डरते थे, अब मैं खुद लोगों को प्रोत्साहित कर रहा हूं कि परेशान करते रहो।'
सरमा ने ध्रुवीकरण की बात भी की थी और कहा था, 'असम पहले से ध्रुवीकृत समाज है। अगर जीना है तो अगले 30 साल तक ध्रुवीकरण की राजनीति करनी पड़ेगी। लेकिन ध्रुवीकरण हिंदू-मुस्लिम का नहीं है; असमी और बांग्लादेशी का है। हम असमी मुसलमानों से नहीं लड़ते, सिर्फ बांग्लादेशी मुसलमानों से।'
एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि एसआईआर में 4-5 लाख मियां वोट कटेंगे। उन्होंने कहा था कि 'वोट चोरी क्या है? हम मियांओं के कुछ वोट चुराना चाहते हैं। मियांओं को यहां वोट देने का हक ही नहीं होना चाहिए।'
फर्जी शिकायतों का आरोप
विपक्ष का कहना है कि बड़ी संख्या में फर्जी शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें कहा गया कि लोग मर चुके हैं या जगह छोड़कर चले गए हैं। पहले से ही आशंका जताई जा रही है कि वैध वोटरों के नाम कट सकते हैं, खासकर बंगाली मूल के मुसलमानों के। मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 इस्तेमाल होता है। इसमें ग़लत जानकारी देने पर एक साल की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। कई मामले आए जहाँ ग़लत आपत्तियाँ दर्ज की गईं। यहाँ तक कि ब्लॉक लेवल ऑफिसर यानी बीएलओ को मृत बताकर नाम हटाने की कोशिश हुई। नोटिस मिलने पर कई लोगों ने खुद को ज़िंदा बताया और शिकायत करने वालों पर साजिश का आरोप लगाया।चुनाव आयोग से शिकायत
असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने सरमा को 'हिंदू जिन्ना' कहा है। उन्होंने कहा कि सरमा का बयान विभाजनकारी है और राज्य की शांति को ख़तरे में डाल रहा है। विपक्ष ने चुनाव आयोग से शिकायत की है कि यह लोकतंत्र के ख़िलाफ़ है। सोशल मीडिया पर सरमा का बयान वायरल हो गया है। कई लोगों ने इसकी निंदा की, जबकि समर्थकों ने इसे सच्चाई बताया। चुनाव आयोग ने अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया, लेकिन जांच हो सकती है।
यह बदलाव असम की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है, जहां पहले से ही ध्रुवीकरण काफी ज्यादा है। विशेष जांच से मतदाता सूची साफ हुई है, लेकिन इसमें निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। आगे एसआईआर में क्या होता है, इस पर सबकी नजरें हैं।