हिमंता बिस्वा सरमा अब 'मियां' के ख़िलाफ़ कथित नफ़रती भाषण में एक और क़दम आगे बढ़ गए हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी के 'असहयोग' और 'सिविल डिसओबिडियंस' यानी नागरिक अवज्ञा के सहारे मियाँ को बाहर निकालने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि इनके सहारे से ऐसा माहौल बनाया जाए जिसमें वे असम में रह न सकें। उनका ताज़ा बयान तब आया है जब उनकी मियां वाले बयान पर चौतरफ़ा आलोचना हो रही है। दूसरी तरफ़ सीएम के कथित नफ़रती भाषण के ख़िलाफ़ 43 नागरिकों के एक समूह ने गुवाहाटी हाई कोर्ट से अपील की है कि वह असम के मुख्यमंत्री के हेट स्पीच और संवैधानिक गलत कामों के बार-बार होने वाले मामलों पर खुद संज्ञान ले।

नागरिकों के समूह ने हाई कोर्ट से क्या-क्या अपील की है, यह जानने से पहले यह जान लें कि असम के मुख्यमंत्री हिमंता ने ताज़ा बयान क्या दिया है। उन्होंने शिवसागर जिले में बुधवार को एक कार्यक्रम के दौरान कहा, 'हर रोज हम 20-30 लोगों को बाहर भेजते हैं। लेकिन हम उन्हें लाइन में खड़ा करके ट्रेन में बिठाकर बांग्लादेश नहीं भेज सकते। इसके बजाय ऐसा इंतजाम होना चाहिए कि वे खुद चले जाएं। हमने 1.5 लाख बीघा जमीन से बेदखली की है। उन्हें जमीन नहीं मिलेगी तो वे असम छोड़कर चले जाएंगे।'

अदालत में जाने की ज़रूरत नहीं: सीएम

उन्होंने आगे कहा, 'मेरा विचार है कि ऐसा माहौल बनाया जाए जिसमें वे असम में रह न सकें। उन्हें जमीन मत दो, वाहन मत दो, रिक्शा मत दो, ठेला मत दो। फिर बांग्लादेशी खुद चले जाएंगे। हर रोज 20-25 लोग बांग्लादेश भेजे जा रहे हैं, किसी में अदालत जाने की हिम्मत नहीं है।'

हिमंता ने इसे महात्मा गांधी की नॉन-कोऑपरेशन और सिविल डिसओबिडियंस से जोड़ा। उन्होंने कहा, 'महात्मा गांधी ने हमें दो चीजें सिखाईं- असहयोग और नागरिक अवज्ञा। जब असम के लोग असहयोग और नागरिक अवज्ञा करेंगे तो वे खुद चले जाएंगे। रिक्शा में चढ़ने से पहले सोचो कि किसका रिक्शा है।' इसके साथ ही उन्होंने 'मियां' और 'मुस्लिम' में फर्क करने की बात कही। उन्होंने कहा, 'मियां वे हैं जो बांग्लादेश से अवैध रूप से आए। मुस्लिम अलग हैं। मियां के नाम पर मुस्लिमों को परेशान मत करो, मुस्लिम के नाम पर मियां को संरक्षण मत दो। बांग्लादेश से आए मियां से कोई संबंध मत रखो।' 

हिमंता भले ही मियां का मतलब बांग्लादेशी मुस्लिम बता रहे हैं, लेकिन आरोप है कि इसके नाम पर वह पश्चिम बंगाल के मुस्लिमों को निशाना बना रहे हैं।

गुवाहाटी हाईकोर्ट से अपील

43 नागरिकों के एक समूह ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को ज्ञापन दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री के बार-बार 'हेट स्पीच' और संवैधानिक रूप से ग़लत करने पर स्वत: संज्ञान लेने की मांग की।

इस समूह में प्रोफेसर हिरेन गोहैन, पूर्व डीजीपी हरेकृष्ण डेका, पूर्व आर्कबिशप थॉमस मेनमपराम्पिल, सांसद अजित कुमार भुइयां और पर्यावरण वैज्ञानिक दुलाल चंद्र गोस्वामी शामिल हैं। ज्ञापन में कहा गया कि मुख्यमंत्री के बयान बंगाली मूल के मुस्लिम समुदाय यानी मियां को निशाना बनाते हैं। ये बयान राजनीतिक से आगे बढ़कर अपमान, सामूहिक कलंक और राज्य समर्थित उत्पीड़न की धमकी देते हैं।
उन्होंने एक हालिया बयान का जिक्र किया जिसमें कथित तौर पर लोगों से कहा गया कि उन्हें कम पैसे दें, ताकि वे परेशान हों। इन नागरिकों का कहना है कि यह आर्थिक भेदभाव और सामाजिक अपमान को बढ़ावा देता है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 यानी जीवन और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन है। वे चुनावी रोल्स की स्पेशल रिवीजन में हस्तक्षेप का भी आरोप लगाते हैं। मुख्यमंत्री ने पार्टी कार्यकर्ताओं को मियां के नाम पर आपत्ति दर्ज करने को कहा। यह निष्पक्ष प्रक्रिया को प्रभावित करता है।

सीएम पर 'जमीन हड़पने' का आरोप

कांग्रेस ने बुधवार को ही मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और उनके परिवार पर राज्य में जमीन हड़पने का आरोप लगाते हुए अभियान शुरू किया। अभियान का नाम "Who is HBS?" रखा गया।

असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई, पूर्व छत्तीसगढ़ सीएम भूपेश बघेल, कांग्रेस महासचिव जितेंद्र सिंह और विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने वीडियो और पैंफलेट जारी किए। गौरव गोगोई ने कहा कि हिमंता के समय असम की राजनीति में बदतमीजी और घमंड आ गया है, परिवार का बिजनेस और जमीन हड़पने का काम हो रहा है, वे देश के सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री हैं।
उन्होंने दावा किया कि जांच में पता चला है कि परिवार के नाम पर 12000 बीघा जमीन नियम तोड़कर हड़पी गई है। पार्टी ने 'Who is HBS' नाम से वेबसाइट लॉन्च की, जहां लोग जानकारी, वीडियो या शिकायत दे सकते हैं। लेकिन वेबसाइट ठीक से काम नहीं कर रही थी, जिसे कांग्रेस ने हैकिंग की कोशिश बताया।

कांग्रेस के इन आरोपों पर हिमंता ने तुरंत जवाब दिया और कहा, 'ये आरोप झूठे, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक हैं। 9 फरवरी को गौरव गोगोई, जितेंद्र सिंह अलवर, भूपेश बघेल और देबब्रत सैकिया के खिलाफ सिविल और क्रिमिनल मानहानि का केस दायर करूंगा। हिट एंड रन राजनीति का दौर खत्म हो गया। अगर सबूत हैं तो अदालत में साबित करें। गांधी परिवार के गुलामों की राजनीतिक नाटकबाजी से डरने वाला नहीं हूं।'

बहरहाल, ये विवाद असम में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक तापमान बढ़ा रहे हैं।