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अयोध्या पर फ़ैसला: मोदी ने कहा, पूरे देश ने निर्णय को स्वीकार किया

अयोध्या विवाद पर आये सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा है कि पूरे देश की यह इच्छा थी कि पूरे मामले की अदालत में हर रोज सुनवाई हो और आज इस पर निर्णय आ चुका है। प्रधानमंत्री ने कहा, दुनिया ने जान लिया है कि भारत का लोकतंत्र कितना मजबूत है। मोदी ने कहा कि लोगों ने कोर्ट के फ़ैसले को स्वीकार किया है। 

सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद अहम फैसले में अयोध्या की विवादित ज़मीन राम लला विराजमान को देने का निर्णय सुनाया है। इसके साथ ही मुसलमानों को मसजिद बनाने के लिए 5 एकड़ ज़मीन अलग से दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा है कि मंदिर बनाने के लिए तीन महीने के अंदर एक ट्रस्ट बनाया जाएगा, जिसमें निर्मोही अखाड़े का भी प्रतिनिधित्व होगा।  

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मोदी ने कहा, ‘हमें अदालत के फ़ैसले से सीख लेनी चाहिए कि भले ही कुछ समय लगे लेकिन धैर्य बनाकर रखना ही सर्वोत्तम है। इस विवाद का भले ही कई पीढ़ियों पर असर पड़ा हो लेकिन अब नई पीढ़ी न्यू इंडिया के निर्माण में जुटेगी। हमें सबको साथ लेते हुए और सबका विश्वास हासिल करते हुए आगे ही बढ़ते जाना है।’ 

प्रधानमंत्री ने कहा कि हर परिस्थिति में हमारा अपनी न्यायिक प्रणाली पर विश्वास अडिग रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के नागरिक के तौर पर हमारी यह जिम्मेदारी बनती है कि हम नियम-कायदों का पालन करें और अपने दायित्वों को समझें। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी हम सबकी है। 

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘दशकों तक चली न्याय प्रक्रिया का अब समापन हो गया है। आज का दिन हमें जुड़कर जीने का संदेश देता है। अब किसी के दिल में कटुता के लिये कोई जगह नहीं होनी चाहिए।’ मोदी ने कहा कि कोर्ट का फ़ैसला नया सवेरा लेकर आएगा। प्रधानमंत्री ने ईद की शुभकामनाएँ भी दीं।

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अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा कि हिन्दू पक्ष यह साबित करने में कामयाब रहा कि बाहरी आंगन पर उसका कब्जा बहुत पहले से रहा है। दूसरी ओर, मुसलिम पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि आंगन पर सिर्फ़ उसका ही कब्जा था।

 

सर्वोच्च अदालत ने कहा कि इस मामले में 2010 में दिया गया इलाहाबाद हाई कोर्ट का फ़ैसला तर्क से परे था। अदालत ने ज़ोर देकर कहा कि इसका कोई तर्क नहीं हो सकता कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड और निर्मोही अखाड़ा के मामले को खारिज करने के बाद उन्हें ज़मीन में हिस्सा भी दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि पूरी ज़मीन को एक ही माना जाना चाहिए। बता दें कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विवादित ज़मीन को तीन पक्षकारों में बाँट दिया था। 

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