बिहार पुलिस की एक टीम ने शुक्रवार को पटना में पुर्णिया के निर्दलीय सांसद राजेश रंजन, जिन्हें पप्पू यादव के नाम से जाना जाता है, को 30 साल से अधिक पुराने जालसाजी के एक मामले में गिरफ्तार कर लिया। पप्पू यादव ने दावा किया कि उन्हें गिरफ्तार करने आए पुलिसकर्मी, जिनमें से कुछ सिविल ड्रेस में थे, ने उनके साथ "बुरा व्यवहार" किया।
यादव ने कहा कि उन्हें निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि उन्होंने बिहार में नीतीश कुमार सरकार की आलोचना की थी। खासकर राज्य में हाल ही में एक NEET अभ्यर्थी की मौत के मामले पर। पप्पू यादव नीट का मामला लगातार उठा रहे थे। इसके अलावा वो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्र सरकार की नीतियों के मुखर आलोचक हैं।
शुरुआत में, जब पुलिस टीम 1995 के मामले में उन्हें गिरफ्तार करने उनके निवास पर पहुंची, तो यादव उनके साथ जाने से इनकार कर दिया और कहा कि वे शनिवार को अदालत में पेश होंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि पुलिस के पास संपत्ति जब्त करने का वारंट था, लेकिन गिरफ्तारी का नहीं। हालांकि, बाद में बड़े ड्रामे के बीच उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

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पप्पू यादव के खिलाफ क्या है मामला?

पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा के अनुसार, यादव के खिलाफ वारंट एमपी/एमएलए कोर्ट द्वारा जारी किया गया था, जो 1995 में दर्ज एक मामले से जुड़ा है जिसमें आईपीसी की धारा 467 (दस्तावेजों की जालसाजी) लगाई गई है। "पुलिस टीम उनके घर गई है ताकि उन्हें कल अदालत में पेश किया जा सके।" 
पटना एसपी सिटी भानु प्रताप सिंह ने कहा कि यादव के खिलाफ 1995 से ट्रायल कोर्ट में मामला चल रहा है और वारंट जारी होने के बाद उन्हें अदालत में पेश होना था लेकिन उन्होंने पालन नहीं किया। उनकी गिरफ्तारी गैर-अनुपालन के लिए सुनिश्चित की गई है, और आगे की कार्रवाई होगी। कानून के अनुसार, आगे की प्रक्रिया से पहले मेडिकल जांच के बाद मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट प्राप्त किया जाएगा।

इस बीच पप्पू यादव को डॉक्टरी जांच के लिए आईजीआईएमएस (इंदिरा गांधी आयुर्वेद संस्थान) अस्पताल से पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भेज दिया गया है। पुलिस ने उन्हें शनिवार को अदालत में पेश कर सकती है।