बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार जेडीयू में शामिल हो गए और उनकी सक्रिय राजनीति में एंट्री हो गई। तो क्या वंशवाद के विरोध का झंडा बुलंद करते रहे नीतीश कुमार अब अपने परिवार की बात आने पर झुक गए हैं?
नीतीश कुमार के बेटे निशांत जेडीयू में
परिवारवाद विरोधी झंडा बुलंद करते रहने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार रविवार औपचारिक रूप से जनता दल (यूनाइटेड) यानी जेडीयू में शामिल हो गये। नीतीश कुमार राज्यसभा जाने की तैयारी कर रहे हैं और मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने वाले हैं तो अब निशांत को राज्य का डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। निशांत के जेडीयू में शामिल होते ही नीतीश कुमार के वंशवाद को लेकर रहे रवैये पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
निशांत कुमार ने पटना में जेडीयू के प्रदेश कार्यालय में पार्टी की सदस्यता ली। जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा ने उन्हें सदस्यता दिलाई। इस मौक़े पर केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह समेत कई बड़े नेता मौजूद थे। कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका जोरदार स्वागत किया। पार्टी ने निशांत की एंट्री पर नया नारा दिया - 'युवा सोच... मजबूत संकल्प'।
सदस्यता लेने के बाद निशांत ने कहा, 'मैं सबका धन्यवाद करता हूं। आप सबने मुझ पर जो भरोसा जताया है, मैं उस पर खरा उतरने की कोशिश करूंगा। मेरे पिता ने पिछले 20 सालों में जो काम किया, उस पर मुझे, पूरे बिहार और देश को गर्व है।' उन्होंने कहा कि वे पार्टी को मजबूत करने के लिए काम करेंगे।
नीतीश जाएँगे राज्यसभा
नीतीश कुमार ने हाल ही में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया है। इससे साफ़ है कि वे मुख्यमंत्री पद छोड़ेंगे। राज्य सभा चुनाव 16 मार्च को होने वाले हैं और उसके बाद नीतीश अप्रैल के पहले हफ्ते में इस्तीफा दे सकते हैं। नीतीश ने पार्टी नेताओं से कहा है कि वे बिहार नहीं छोड़ रहे हैं। वे सरकार और पार्टी की निगरानी करते रहेंगे और 2030 तक मार्गदर्शन देते रहेंगे।
पार्टी के अंदर से कई सालों से निशांत को राजनीति में आने की मांग हो रही थी। निशांत इंजीनियरिंग ग्रेजुएट हैं और वे पहले लो प्रोफाइल रहते थे। शनिवार को उन्होंने जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं और युवा विधायकों से दो बैठकें कीं। इनमें पार्टी की भविष्य की रणनीति पर चर्चा हुई कि नीतीश राज्यसभा जाने के बाद पार्टी कैसे आगे बढ़ेगी।
डिप्टी सीएम बनेंगे?
कुछ जेडीयू विधायकों का दावा है कि निशांत को नयी सरकार में डिप्टी सीएम बनाया जाएगा। हरनौत के विधायक हरि नारायण सिंह ने कहा कि यह फैसला सर्वसम्मति से हुआ है। लेकिन दूसरे विधायकों ने इसे खारिज किया है। जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि निशांत पार्टी और बिहार के लिए नया चेहरा होंगे। उनकी सादगी, विनम्रता और शिक्षा उन्हें अलग बनाती है। नीतीश के अच्छे रिकॉर्ड से उन्हें ताकत मिलेगी।
नीतीश वंशवाद विरोधी थे तो अब क्या हुआ?
नीतीश कुमार वंशवाद यानी परिवारवाद का मुखर विरोधी रहे हैं। उन्होंने खुद को और अपनी पार्टी जदयू को वंशवाद-मुक्त राजनीति का प्रतीक के रूप में पेश किया है, खासकर बिहार में लालू प्रसाद यादव और आरजेडी के परिवार-आधारित राजनीति के विपरीत।
नीतीश कुमार ने बार-बार बयान दिए हैं कि उन्होंने कभी अपने परिवार के सदस्यों या अन्य रिश्तेदारों को राजनीति में आगे नहीं बढ़ाया। चुनाव प्रचारों में वे कहते रहे हैं कि हमने अपने परिवार के लिए कुछ नहीं किया। 2024-2025 के चुनावों में उन्होंने एनडीए के साथ मिलकर आरजेडी और कांग्रेस को वंशवाद के लिए निशाना बनाया था। उन्होंने राहुल गांधी, तेजस्वी यादव जैसे नेताओं को 'परिवारवाद का नया अवतार' बताया था।
नीतीश ने अपनी राजनीति को सुशासन, पारदर्शिता और सिद्धांत-आधारित बताया, जहां परिवारवाद की कोई जगह नहीं है। लेकिन जब उनके मंत्रिमंडल की बात आती है तो उसमें कई मंत्री राजनीतिक परिवारों से शामिल हैं।
नीतीश की नई सरकार में 26 मंत्रियों में से 10 राजनीतिक परिवारों से आए थे, जिस पर आरजेडी ने हमला किया और 'परिवारवाद' का आरोप लगाया। अब खुद उनके बेटे के सक्रिय राजनीति में आने की ख़बर है।
बहरहाल, निशांत के पार्टी में शामिल होने की यह घटना बिहार में नई पीढ़ी की राजनीति की शुरुआत दिखाती है। नीतीश कुमार के 20 साल के शासन के बाद अब बीजेपी से पहली बार मुख्यमंत्री बन सकता है। एनडीए गठबंधन में सीटों के हिसाब से सरकार बनेगी। निशांत की भूमिका क्या होगी, यह आने वाले दिनों में साफ होगा, लेकिन उनकी एंट्री से जेडीयू में नई ऊर्जा आई है।