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नीतीश ने कहा- पेगासस जासूसी मामले की जांच हो 

पेगासस जासूसी मामले की जांच को लेकर अब एनडीए के अंदर से ही आवाज़ उठ रही है। जेडीयू के मुखिया और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को कहा है कि लोगों को परेशान करने के लिए इस तरह की चीजें नहीं की जा सकतीं और इस मामले में सब बातों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। 

निश्चित रूप से नीतीश कुमार के इस बयान से बीजेपी की मुश्किलें बढ़ेंगी क्योंकि वह एनडीए के सहयोगी दल के पहले ऐसे नेता हैं जिन्होंने इस मामले में न सिर्फ अपना बयान जारी किया है बल्कि जांच कराने की मांग की है।

यह मामला मरकज़ी सरकार के लिए मुसीबत का सबब बन चुका है और तमाम विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर उसे घेर लिया है। संसद के मानसून सत्र में इस मुद्दे पर खासा हंगामा हो चुका है और संसद के दोनों सदनों में विपक्ष ने जासूसी मामले की जांच कराने की मांग को पुरजोर ढंग से रखा है। 

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एकजुट हुआ विपक्ष 

विपक्षी सांसदों ने बीते बुधवार को एक साथ आकर और प्रेस कॉन्फ्रेन्स कर अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं। प्रेस कॉन्फ्रेन्स में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा था कि केंद्र सरकार बताए कि उसने पेगासस का सॉफ्टवेयर खरीदा या नहीं और उसने अपने लोगों पर इसका इस्तेमाल किया या नहीं। उन्होंने कहा था कि हम सिर्फ़ इतना ही जानना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सांसदों की आवाज़ को दबाया जा रहा है। इस दौरान उनके साथ कई विपक्षी दलों के सांसद मौजूद थे। 

5 अगस्त को होगी सुनवाई 

इजरायली कंपनी एनएसओ के पेगासस स्पाइवेयर से जासूसी मामले की जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिकाएं दायर की गई हैं। इन पर 5 अगस्त को सुनवाई होगी। दो जजों की बेंच इन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। इसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश एन.वी.रमन्ना और जस्टिस सूर्यकांत शामिल हैं।

वरिष्ठ पत्रकार एन. राम और शशि कुमार की ओर से याचिका दायर की गई थी। 

आरोप है कि पेगासस स्पाइवेयर से विपक्षी नेताओं, कुछ मंत्रियों, क़रीब 40 पत्रकारों सहित व अन्य लोगों की जासूसी की गई है। 

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बता दें कि 'द गार्डियन', 'वाशिंगटन पोस्ट', 'द वायर' सहित दुनिया भर के 17 मीडिया संस्थानों ने पेगासस स्पाइवेयर के बारे में खुलासा किया है। एक लीक हुए डेटाबेस के अनुसार इजरायली निगरानी प्रौद्योगिकी फर्म एनएसओ के कई सरकारी ग्राहकों द्वारा हज़ारों टेलीफोन नंबरों को सूचीबद्ध किया गया था। 

'द वायर' के अनुसार इसमें 300 से अधिक सत्यापित भारतीय मोबाइल टेलीफोन नंबर शामिल हैं। जो नंबर पेगासस के निशाने पर थे वे विपक्ष के नेताओं, मंत्रियों, पत्रकारों, क़ानूनी पेशे से जुड़े लोगों, व्यवसायियों, सरकारी अफ़सरों के हैं। 

सीजेआई को लिखा खत

देश के सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों सहित 500 लोगों ने सीजेआई एन.वी. रमन्ना को खुला ख़त लिखा है। इसमें उन्होंने कहा है कि पेगासस स्पाईवेयर से जासूसी नागरिकों की निजता, जिंदगी और स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के ख़िलाफ़ है।

ख़त पर हस्ताक्षर करने वालों में अरुणा रॉय, तीस्ता सीतलवाड़, हर्ष मंदर, रोमिला थापर, अरुंधति रॉय, अनुराधा भसीन, पेट्रीसिया मुखिम जैसे जाने पहचाने चेहरे शामिल हैं। 

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